मोटापा वैश्विक स्तर पर बढ़ती गंभीर स्वास्थ्य स्थितियों में से एक है, जिसे कई प्रकार की क्रोनिक बीमारियों का कारण माना जाता रहा है। आंकड़ों से पता चलता है कि भारत दुनियाभर में मोटापाग्रस्त शीर्ष तीन देशों में से एक है। यहां की 70 फीसदी से अधिक की आबादी अधिक वजन या मोटापा का शिकार हो सकती है।
Obesity Medicine: मोटापा कम करने में कारगर साबित होगी डायबिटीज की ये दवा? जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ
मोटापा कम करने वाली दवा
नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ एंड केयर एक्सीलेंस (नाइस) ने एक दिशानिर्देश जारी करते हुए सिफारिश की है कि अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त लोगों को डॉक्टरी सलाह पर टिर्जेपेटाइड इंजेक्शन दी जा सकती है, इसे यूके में माउंजरो के नाम से बेचा जाता है। नैदानिक परीक्षणों से पता चला है कि टिर्जेपेटाइड की मदद से उपयोगकर्ताओं को 72 सप्ताह में शरीर के वजन का 22.5% तक कम करने में मदद मिली।
नाइस ने अपने दिशानिर्देश में कहा था कि डॉक्टर इंग्लैंड में उन लोगों को यह दवा दे सकेंगे जिनका बॉडी मास इंडेक्स कम से कम 35 है और वजन से संबंधित कम से कम एक कोमोरबिडिटी की समस्याजैसे हृदय रोग, टाइप 2 मधुमेह या स्लीप एपनिया है।
टाइप-2 डायबिटीज की दवा से कम होगा मोटापा
क्लिनिकल परीक्षण से पता चलता है कि आहार और व्यायाम के साथ टिर्जेपेटाइड अधिक प्रभावी साबित हो सकती है।
यहां गौर करने वाली बात ये है कि माउंजरो मुख्य रूप से टाइप-2 डायबिटीज का इलाज करने वाली दवाई है। इसमें टिर्जेपेटाइड नामक कंपाउंड होता है जो मस्तिष्क के उस हिस्से को एक्टिव करता है जो भूख को नियंत्रित करने में मदद करती है। माउंजरो को इंसुलिन के स्राव को उत्तेजित करने के प्रभावों के लिए भी जाना जाता है। यह ग्लूकागन हार्मोन के उत्पादन में सुधार करती है, जिससे शुगर के स्तर को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है।
मसलन इस एक दवा/ इंजेक्शन की मदद से ब्लड शुगर और वजन दोनों को कंट्रोल रखना आसान हो सकता है।
भारत में मंजूरी का इंतजार
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एली लिली कंपनी द्वारा निर्मित इस दवा का लाभ जल्द ही भारत में भी लोग उठा सकेंगे। हालांकि इसे ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया से मंजूरी मिलनी अभी बाकी है। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में क्लीनिकल बायोकेमिस्ट्री और मेडिसिन के प्रोफेसर सर स्टीफन ओ'राहिली ने कहा कि खतरनाक तरीके से वजन बढ़ने के मामलों को देखते हुए टिर्जेपेटाइड जैसी दवाएं बहुत कारगर साबित हो सकती हैं। कई देशों में इसे मंजूरी दी जा चुकी है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ये इंजेक्शन तभी लिए जाने चाहिए जब डॉक्टर्स ने इसकी सलाह दी है। इसके साइड-इफेक्ट्स भी हो सकते हैं, इसलिए सावधानी बरतते रहना जरूरी है।
डॉक्टर्स भी बरतें सावधानी
पैनल ने डॉक्टरों को भी सलाह दी कि वे मरीजों का चयन बहुत सावधानी से करें। विशेषज्ञ ने कहा, अग्नाशय की बीमारियों, अंतःस्रावी तंत्र के विकारों, मतली और उल्टी के इतिहास वाले लोगों को यह दवा नहीं दी जानी चाहिए। मरीजों को पहले आहार और व्यायाम का पालन करने के लिए भी कहा जाना चाहिए। दवा केवल तभी निर्धारित की जानी चाहिए जब अन्य उपायों की मदद से रोगी को आराम न मिल रहा हो।
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स्रोत और संदर्भ
Lilly's weight-loss and diabetes drug
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