डॉ. प्रिया पाण्डेय
डिग्री- बीएससी (ह्यूमन न्यूट्रीशियन)
अनुभव - आठ वर्ष
Medically Reviewed by Dr. Priya pandey
मैग्नीशियम शरीर के लिए बेहद ही उपयोगी खनिज पदार्थ यानी मिनरल्स में से एक है। शरीर को इसकी जरूरत प्रतिदिन होती है। इसके कई फायदे हैं, जैसे डीएनए निर्माण के लिए यह जरूरी है। वहीं शरीर के मेटाबॉलिज्म में भी यह मदद करता है और साथ ही यह शुगर लेवल को भी नियंत्रित करने का काम करता है। हालांकि कुछ खनिजों की तरह मैग्नीशियम भी शरीर में अपने आप नहीं बनता है, बल्कि मैग्नीशियम युक्त खाद्य पदार्थों के सेवन से आप इसे ग्रहण कर सकते हैं। आइए जानते हैं मैग्नीशियम के फायदे, नुकसान और इसके स्रोत के बारे में सबकुछ...
बीमारी: गंभीर हो सकती है शरीर में मैग्नीशियम की कमी, इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
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मैग्नीशियम के फायदे
- मैग्नीशियम हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है और इसके द्वारा हड्डियों को जरूरी पोषक तत्व मिलते रहते हैं। इसके अलावा यह चिंता और अनिद्रा की समस्या को भी दूर करता है और अच्छी नींद प्रदान करता है। सिर्फ यही नहीं, मैग्नीशियम जिंक और कैल्शियम आदि के साथ मिलकर हृदय, मांसपेशियों और किडनी को भी मजबूत बनाता है।
मैग्नीशियम की कमी से होने वाले नुकसान
- शरीर में मैग्नीशियम की कमी से आपको कई तरह की समस्याओं से गुजरना पड़ सकता है। इसकी कमी के कारण शारीरिक कार्यों पर विपरीत असर पड़ता है और मांसपेशियों का संचालन धीमा हो जाता है। मैग्नीशियम की कमी के कारण हाथ-पैर सुन्न होना, झुनझुनी, मांसपेशियों में ऐंठन, किसी अंग का काम न करना और असामान्य हृदय गति जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा शरीर में मैग्नीशियम की कमी दिल के खतरे को भी बढ़ा सकती है।
मैग्नीशियम की कमी के लक्षण
- मानसिक और शारीरिक थकान
- कमजोरी, सिरदर्द
- भूख में कमी
- जी मिचलाना, उल्टी
- मांसपेशियों में ऐंठन
मैग्नीशियम की कमी कैसे पूरी करें (मैग्नीशियम के स्रोत)
- हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करें (जैसे- पालक)
- कद्दू के बीज और तिल का सेवन करें
- सेम और दालें खाएं
- अनाज (जैसे गेहूं, ओट्स, जौ) का सेवन करें
- दूध, दही आदि का सेवन करें
- फैटी मछलियां (जैसे- सालमोन) खाएं
नोट: यह लेख दिल्ली की डॉ. प्रिया पाण्डेय से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। डॉक्टर प्रिया को 8 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने कानपुर विश्वविद्यालय से ह्यूमन न्यूट्रीशियन में स्नातक किया हुआ है। वह आभा सुपर स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल में आहार विशेषज्ञ के तौर पर कार्यरत हैं। डॉ प्रिया कई संस्थानों में बतौर लेक्चरर ह्यूमन न्यूट्रीशियन के छात्रों को पढ़ाती भी हैं।
अस्वीकरण: अमर उजाला के हेल्थ एंड फिटनेस कैटेगिरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर और विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों और सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा परखा व जांचा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठकों की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और ना ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श करें।