डॉ आंचल माहेश्वरी
कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर ने लोगों को स्पष्ट रूप से सिखा दिया है कि ऐसे गंभीर संक्रमणों से बचने के लिए अपनी इम्यूनिटी पर ध्यान देना बहुत जरूरी है। जब बात इम्यूनिटी बढ़ाने की आती है तो लोगों का ध्यान आयुर्वेद की ओर जाता है। यानी कोरोना से इलाज के लिए एलोपैथ और कोरोना से दीर्घकालिक सुरक्षा के लिए आयुर्वेद को लोग बेहतर मानते रहे हैं। हालांकि इसी को लेकर देश में आयुर्वेद और एलोपैथ की जंग भी चल रही है।
अमर उजाला फाउंडेशन की पहल के माध्यम से कोरोना महामारी को लेकर शनिवार को हुई चर्चा में हमने विशेषज्ञों से आयुर्वेद और एलोपैथ के माध्यम से कोविड-19 के इलाज के बारे में जानने की कोशिश की। इस दौरान रि-डिस्कवर आयुर्वेद की संस्थापक डॉ आंचल माहेश्वरी और दिल्ली एम्स के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ अमरिंदर सिंह मल्ही ने सभी संबंधित सवालों के जवाब दिए।
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अमर उजाला फाउंडेशन की पहल: जानिए कोरोना में आयुर्वेदिक और एलोपैथिक इलाज पद्धति की प्रभाविकता
Sat, 29 May 2021 08:23 PM IST
Abhilash Srivastava
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Abhilash Srivastava
Updated Sat, 29 May 2021 08:23 PM IST
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कोरोना का उपचार (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : iStock
आयुर्वेद का दवा आयुष 64
- फोटो : Social media
आयुर्वेद के जरिए कोरोना का इलाज
डॉ आंचल माहेश्वरी बताती हैं कि आयुर्वेद में कोरोना के लिए हर रोगी को उसकी स्थिति के आधार पर उपचार दिया जाता है। आयुर्वेद के माध्यम से सबसे पहले किसी भी वायरस को बढ़ने से रोकने पर ध्यान दिया जाता है। आयुष मंत्रालय ने भी कोरोना के इलाज के लिए आयुष-64 जैसी दवाइयों की सलाह दी है। इसके अलावा रोगी के लक्षणों के आधार पर कई तरह की अन्य दवाइयां दी जाती हैं। कोरोना की इस लहर में कई रोगियों, जिनका ऑक्सीजन लेवल 75 तक पहुंच गया था, आयुर्वेद के माध्यम से उनका भी सफल इलाज किया गया है।
डॉ आंचल माहेश्वरी बताती हैं कि आयुर्वेद में कोरोना के लिए हर रोगी को उसकी स्थिति के आधार पर उपचार दिया जाता है। आयुर्वेद के माध्यम से सबसे पहले किसी भी वायरस को बढ़ने से रोकने पर ध्यान दिया जाता है। आयुष मंत्रालय ने भी कोरोना के इलाज के लिए आयुष-64 जैसी दवाइयों की सलाह दी है। इसके अलावा रोगी के लक्षणों के आधार पर कई तरह की अन्य दवाइयां दी जाती हैं। कोरोना की इस लहर में कई रोगियों, जिनका ऑक्सीजन लेवल 75 तक पहुंच गया था, आयुर्वेद के माध्यम से उनका भी सफल इलाज किया गया है।
पोस्ट कोविड इलाज
- फोटो : Pixabay
एलोपैथी में पोस्ट कोविड इलाज
प्रोफेसर डॉ अमरिंदर सिंह मल्ही बताते हैं कि पोस्ट कोविड होने वाली तरह-तरह की समस्याओं को एलोपैथिक दवाइयों के माध्यम से ठीक किया जाता रहा है। हालांकि कोविड से ठीक होने के बाद दवाइयों के साथ लोगों को कोविड से सुरक्षा के तमाम उपायों को प्रयोग में लाते रहना चाहिए। सही तरीके से मास्क लगना और हाथों की स्वच्छता का ध्यान रखना, इन दो बातों को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बना लें।
प्रोफेसर डॉ अमरिंदर सिंह मल्ही बताते हैं कि पोस्ट कोविड होने वाली तरह-तरह की समस्याओं को एलोपैथिक दवाइयों के माध्यम से ठीक किया जाता रहा है। हालांकि कोविड से ठीक होने के बाद दवाइयों के साथ लोगों को कोविड से सुरक्षा के तमाम उपायों को प्रयोग में लाते रहना चाहिए। सही तरीके से मास्क लगना और हाथों की स्वच्छता का ध्यान रखना, इन दो बातों को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बना लें।
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वात और कफ में असंतुलन के कारण कोरोना की समस्या
- फोटो : social media
आयुर्वेद में पोस्ट कोविड समस्याओं का उपचार
डॉ आंचल माहेश्वरी बताती हैं कि आयुर्वेद की दृष्टि से कोरोना को वात और कफ में असंतुलन से संबंधित समस्या के रूप में देखा जाता है। कोरोना के जितने भी मामले देखने को मिल रहे हैं उसमें रोगी में या तो वात बढ़ा होता है या फिर कफ। जिन लोगों को कोरोना के बाद कमजोरी का अनुभव होता है उनमें वात समस्याओं को शांत करने के उपाय किए जाते हैं। इसके लिए रोगी आयुर्वेद विशेषज्ञों से सलाह और दवाइयां प्राप्त कर सकते हैं।
डॉ आंचल माहेश्वरी बताती हैं कि आयुर्वेद की दृष्टि से कोरोना को वात और कफ में असंतुलन से संबंधित समस्या के रूप में देखा जाता है। कोरोना के जितने भी मामले देखने को मिल रहे हैं उसमें रोगी में या तो वात बढ़ा होता है या फिर कफ। जिन लोगों को कोरोना के बाद कमजोरी का अनुभव होता है उनमें वात समस्याओं को शांत करने के उपाय किए जाते हैं। इसके लिए रोगी आयुर्वेद विशेषज्ञों से सलाह और दवाइयां प्राप्त कर सकते हैं।
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पोस्ट कोविड आयुर्वेद में इलाज
- फोटो : Social Media
पोस्ट कोविड तनाव और नींद की समस्या
डॉ आंचल बताती हैं कि कोविड रिकवरी के बाद लोगों को तनाव, घबराहट और नींद से संबंधित समस्याएं हो सकती हैं, इसके लिए सामान्य तौर पर वेद्य द्रव्यों को लेने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा नाक में तेल डालने से भी की कई प्रकार के फायदे मिल सकते हैं। मस्तिष्क को पोषण देने के लिए यह काफी फायदेमंद हो सकते हैं।
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नोट: यह लेख रि-डिस्कवर आयुर्वेद की संस्थापक डॉ आंचल माहेश्वरी और दिल्ली एम्स में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ अमरिंदर सिंह मल्ही से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। ।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
डॉ आंचल बताती हैं कि कोविड रिकवरी के बाद लोगों को तनाव, घबराहट और नींद से संबंधित समस्याएं हो सकती हैं, इसके लिए सामान्य तौर पर वेद्य द्रव्यों को लेने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा नाक में तेल डालने से भी की कई प्रकार के फायदे मिल सकते हैं। मस्तिष्क को पोषण देने के लिए यह काफी फायदेमंद हो सकते हैं।
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नोट: यह लेख रि-डिस्कवर आयुर्वेद की संस्थापक डॉ आंचल माहेश्वरी और दिल्ली एम्स में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ अमरिंदर सिंह मल्ही से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। ।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।