Medically Reviewed by Dr. I.N. Vajpai
न्यूरो सर्जन
डिग्री- एम.बी.बी.एस, एम.एस (जनरल सर्जरी), एमसीएच (न्यूरो सर्जरी), उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
अनुभव- 45 वर्ष
कोरोना ने लोगों को काफी परेशान करके रख दिया है। यहां तक कि संक्रमणमुक्त होने के बाद भी मरीज पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो रहे। उन्हें तरह-तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कुछ दिन पहले तक कोरोना से ठीक हुए मरीजों में ब्लैक फंगस के मामले अधिक देखने को मिल रहे थे और अब ऐसे लोगों पर एक नया खतरा मंडराने लगा है, जिसका नाम है एवैस्कुलर नेक्रोसिस। इसे 'डेथ ऑफ बोन' के नाम से भी जाना जाता है। मुंबई में इसके तीन मामले सामने आए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि म्यूकरमाइकोसिस के प्रकोप के बाद कोरोना से ठीक होने वाले मरीजों में यह अगली दुर्बल करने वाली स्थिति हो सकती है। डॉक्टरों को डर है कि अगले कुछ महीनों में एवैस्कुलर नेक्रोसिस के और मामले सामने आ सकते हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि आखिर ये नई समस्या है क्या और इसके लक्षण क्या हैं?
नया खतरा: अब कोरोना से ठीक हुए मरीजों को हो रही ये गंभीर बीमारी, लक्षणों को न करें नजरअंदाज
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इस बीमारी से संबंधित अध्ययन को हाल ही में मेडिकल जर्नल 'बीएमजे केस स्टडीज' में प्रकाशित किया गया है। मुंबई स्थित हिंदुजा अस्पताल के चिकित्सा निदेशक डॉ. संजय अग्रवाल ने एवैस्कुलर नेक्रोसिस को 'लॉन्ग कोविड' का हिस्सा बताया है और कहा कि कोविड-19 के मामलों में 'जीवन रक्षक कॉर्टिकोस्टेरॉयड्स का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल' के चलते' इसके मामलों में बढ़ोतरी होगी।
क्या है ये बीमारी?
- एवैस्कुलर नेक्रोसिस हड्डियों में होने वाली एक गंभीर समस्या है, जिसमें हड्डियों के ऊतक मरने लगते हैं। यानी कहने का मतलब ये है कि इस बीमारी में हड्डियां गलने लगती हैं। इसका कारण ये है कि रक्त प्रवाह में बाधा आती है और ऊतकों तक पर्याप्त मात्रा में खून का नहीं पहुंच पाता है। ऐसे में पोषण की कमी हो जाती है और हड्डियों के ऊतक मरने लगते हैं।
इस उम्र के लोग सबसे अधिक होते हैं प्रभावित
- विशेषज्ञ कहते हैं कि एवैस्कुलर नेक्रोसिस की समस्या सबसे अधिक कूल्हे की हड्डी में होती है, जिसकी वजह से जांध की हड्डी का गोल हिस्सा, जो कूल्हे का जोड़ बनता है, वो गलने लगता है। वैसे तो यह समस्या किसी को भी किसी भी उम्र में हो सकती है, लेकिन आमतौर पर 30 से 60 साल की उम्र के लोग इससे अधिक प्रभावित और पीड़ित होते हैं।
एवैस्कुलर नेक्रोसिस के लक्षण क्या हैं?
- जांघ और कूल्हे की हड्डियों में भयंकर दर्द
- चलने में लचक होना
- सोते जागते लगातार दर्द का बने रहना
- कंधे, घुटने, हाथ और पैरों में भी दर्द
- लक्षण दिखने पर या जोड़ों में लगातार दर्द रहने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
स्रोत और संदर्भ:
Avascular necrosis as a part of ‘long COVID-19’
https://casereports.bmj.com/content/bmjcr/14/7/e242101.full.pdf
नोट: डॉ. आईएन वाजपई अत्यधिक योग्य और अनुभवी न्यूरो सर्जन हैं। इन्होंने लखनऊ के केजीएमसी से अपना एमबीबीएस किया है। इसके बाद इन्होंने जनरल सर्जरी में एमएस किया और न्यूरो सर्जरी में एमसीएच की पढ़ाई की है। इन्होंने 1996 में कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में काम किया और 2012 में प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष के रूप में रिटायर हुए। डॉक्टर आईएन वाजपाई आईएमए एंड न्यूरोलॉजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया के आजीवन सदस्य भी हैं। डॉक्टर वाजपई को 45 वर्षों का अनुभव है।
अस्वीकरण नोट: यह लेख मेडिकल जर्नल 'बीएमजे केस स्टडीज' में प्रकाशित रिपोर्ट और डॉक्टर आईएन वाजपई से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। किसी भी तरह की बीमारी के लक्षण हों अथवा आप किसी रोग से ग्रसित हों तो अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।