Arthritis Symptoms At 35: आर्थराइटिस या गठिया को पहले बुढ़ापे की बीमारी माना जाता था, मगर पिछले कुछ वर्षों में 30 से 35 वर्ष के युवाओं में भी इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, कम उम्र में जोड़ों के दर्द और सूजन का मुख्य कारण हमारी बिगड़ती जीवनशैली और दिनचर्या की छोटी-छोटी गलतियां हैं। लंबे समय तक एक ही जगह बैठकर काम करना, शारीरिक सक्रियता की कमी, और जंक फूड का अत्यधिक सेवन हमारे जोड़ों के कार्टिलेज को समय से पहले घिसने पर मजबूर कर देता है।
Arthritis Risk: दिनचर्या की ये गलतियां 35 में ही बना देती हैं आर्थराइटिस का मरीज, अभी से बरतें ये सावधानियां
Causes Of Early Joint Pain: कम उम्र में आर्थराइटिस की शिकायत होना आज के दिनों में बहुत आम हो गया है। देखा जाए तो बहुत से लोग इस समस्या से परेशान रहते हैं, मगर ऐसा होने के पीछे का सबसे बड़ा कारण कम उम्र की खराब जीवनशैली है। आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं।
खराब पोस्चर और निष्क्रिय जीवनशैली
आजकल की 'सेडेंटरी लाइफस्टाइल' आर्थराइटिस का सबसे बड़ा कारण है। ऑफिस में घंटों गलत तरीके से बैठने से कूल्हे और घुटनों के जोड़ों पर असामान्य भार पड़ता है। व्यायाम की कमी से मांसपेशियों में लचीलापन खत्म हो जाता है, जिससे जोड़ों को सहारा मिलना बंद हो जाता है। दिन में कम से कम 30 मिनट टहलना या स्ट्रेचिंग करना आपके कार्टिलेज के लिए बहुत फायदेमंद होता है।
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बढ़ता वजन और अनहेल्दी डाइट का असर
अगर किसी व्यक्ति का वजन तेजी से बढ़ रहा है तो शरीर के बढ़े हुए वजन का सीधा असर आपके घुटनों और टखनों के जोड़ों पर पड़ता है। अत्यधिक वजन जोड़ों के बीच के 'साइनोवियल फ्लूइड' को कम कर देता है, जिससे हड्डियां आपस में रगड़ने लगती हैं। साथ ही प्रोसेस्ड फूड, चीनी और अधिक नमक वाली डाइट शरीर में 'इंफ्लेमेशन' (सूजन) बढ़ाती है। पोषक तत्वों, विशेषकर विटामिन-D और कैल्शियम की कमी हड्डियों को अंदर से खोखला कर देती है, जिससे कम उम्र में ही गठिया का जोखिम बढ़ जाता है।
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धूम्रपान और नींद की कमी की भूमिका
शायद आपको जानकर हैरानी हो, लेकिन धूम्रपान सीधे तौर पर हड्डियों के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। तंबाकू में मौजूद टॉक्सिन्स हड्डियों के घनत्व को कम करते हैं और जोड़ों में सूजन बढ़ाते हैं। इसी तरह पर्याप्त नींद न लेने से शरीर की रिकवरी धीमी हो जाती है। रात के समय ही जोड़ों के ऊतकों की रिकवरी होती है, और नींद की कमी इस नेचुरल हीलिंग प्रक्रिया को बाधित कर आर्थराइटिस के जोखिम को बढ़ा देती है।
आर्थराइटिस से बचने के लिए अपनी दिनचर्या में संतुलित आहार और नियमित व्यायाम को शामिल करें। कैल्शियम और ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर खाद्य पदार्थ को डाइट में शामिल करें, इससे जोड़ों की चिकनाई बनाए रखने में मदद मिलती है। अगर जोड़ों में लगातार दर्द या लाली महसूस हो, तो तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श लें। ध्यान रखें हड्डियों का स्वास्थ्य आपकी सक्रियता पर काफी हद तक निर्भर करता है। आज की गई थोड़ी सी सावधानी आपको भविष्य के असहनीय दर्द और सर्जरी से बचा सकती है।
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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