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कभी खुशी, कभी गम कहीं आपको भी तो नहीं ये गंभीर मानसिक बीमारी
डॉ. संजय तेवतिया, वरिष्ठ चिकित्सक
Updated Wed, 28 Mar 2018 11:00 AM IST
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'बाइपोलर डिसऑर्डर' एक मानसिक बीमारी है, जिसमे रोगी का मन लगातार कई महीनों या हफ्तों तक बहुत उदास या बहुत खुश रहता है। बाइपोलर डिसऑर्डर को मिजाज एवं व्यवहार में बदलाव, कभी अवसाद, कभी उन्माद, तो कभी मानसिक एवं मस्तिष्क विकार भी कहा जाता है।
bipolar disorder
उन्माद एवं अवसाद की अवस्थाएं-
उन्माद की अवस्था में व्यक्ति असामान्य रूप से ऊर्जावान, खुश या चिड़चिड़ा महसूस करता है। नतीजों की परवाह किए बिना गलत निर्णय लेता है। उन्माद की स्थिति में नींद की जरूरत काफी कम हो जाती है। अवसाद की स्थिति में व्यक्ति बिना कारण रोने लगता है। जीवन के प्रति उसका नजरिया नकारात्मक हो जाता है। ऐसा व्यक्ति दूसरे व्यक्ति से आंख कम ही मिलाता है।
उन्माद की अवस्था में व्यक्ति असामान्य रूप से ऊर्जावान, खुश या चिड़चिड़ा महसूस करता है। नतीजों की परवाह किए बिना गलत निर्णय लेता है। उन्माद की स्थिति में नींद की जरूरत काफी कम हो जाती है। अवसाद की स्थिति में व्यक्ति बिना कारण रोने लगता है। जीवन के प्रति उसका नजरिया नकारात्मक हो जाता है। ऐसा व्यक्ति दूसरे व्यक्ति से आंख कम ही मिलाता है।
bipolar disorder
क्या हैं लक्षण-
बाइपोलर डिसऑर्डर से पीड़ित व्यक्ति असामान्य रूप से तीव्र भावना, सोने के तरीके में बदलाव, सक्रियता का स्तर एवं असामान्य व्यवहार अनुभव करता है। इस स्थिति में मनोदशा में बार-बार बदलाव देखा जा सकता है। व्यक्ति के ऊर्जा के स्तर, कार्यशैली एवं निद्रा में भारी बदलाव, मनोदशा की स्थिति पर निर्भर करता है।
जब व्यक्ति अवसाद की स्थिति में होता है, तब वह दुखी, असहाय, खालीपन, नाउम्मीद, ऊर्जाहीन, कार्यशैली का स्तर कम होना, निंद न आना या फिर बहुत नींद आना, चिंतित रहना, एकाग्रता में परेशानी, चीजों को भूलना, बहुत ज्यादा या बहुत कम खाना, थकान, सुस्ती, आत्महत्या का ख्याल मन में आना आदि लक्षण देखने को मिलते हैं।
उन्माद की स्थिति में व्यक्ति असामान्य रूप से अतिउत्साहित एवं अतिसक्रियता की स्थिति में पीड़ित रहता है। अत्यअधिक खुश, जोर से बोलना, एक विचार से दूसरे विचार पर पहुंच जाना, दूसरे को चिढ़ाना, आसपास के वातावरण पर बहुत कम ध्यान देना आदि की स्थिति में रहता है।
बाइपोलर डिसऑर्डर से पीड़ित व्यक्ति असामान्य रूप से तीव्र भावना, सोने के तरीके में बदलाव, सक्रियता का स्तर एवं असामान्य व्यवहार अनुभव करता है। इस स्थिति में मनोदशा में बार-बार बदलाव देखा जा सकता है। व्यक्ति के ऊर्जा के स्तर, कार्यशैली एवं निद्रा में भारी बदलाव, मनोदशा की स्थिति पर निर्भर करता है।
जब व्यक्ति अवसाद की स्थिति में होता है, तब वह दुखी, असहाय, खालीपन, नाउम्मीद, ऊर्जाहीन, कार्यशैली का स्तर कम होना, निंद न आना या फिर बहुत नींद आना, चिंतित रहना, एकाग्रता में परेशानी, चीजों को भूलना, बहुत ज्यादा या बहुत कम खाना, थकान, सुस्ती, आत्महत्या का ख्याल मन में आना आदि लक्षण देखने को मिलते हैं।
उन्माद की स्थिति में व्यक्ति असामान्य रूप से अतिउत्साहित एवं अतिसक्रियता की स्थिति में पीड़ित रहता है। अत्यअधिक खुश, जोर से बोलना, एक विचार से दूसरे विचार पर पहुंच जाना, दूसरे को चिढ़ाना, आसपास के वातावरण पर बहुत कम ध्यान देना आदि की स्थिति में रहता है।
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कौन-कौन सी हैं वजहें-
बाइपोलर डिसऑर्डर कई कारणों से हो सकता है। विभिन्न शोध के अनुसार, यह वंशानुगत भी होता है। वातावरण जनित, व्यक्तिगत मनोवैज्ञानिक एवं अनुवांशिक कारण इस बीमारी के होने की सम्भावनाओं को काफी बढ़ा देते हैं। ऐसा भी देखा गया है कि जीवन की कुछ अप्रिय घटनाएं, खराब व्यक्तिगत रिश्ते, बचपन में हुए बुरे व्यवहार या कोई दुर्घटना भी इसके कम उम्र में होने की संभावनाओं को बढ़ा देता है।
इसके साथ ही मस्तिष्क में लगी चोट, एड्स का संक्रमण, मिर्गी, मस्तिष्क एवं नसों की बीमारी भी कभी-कभी इसके होने का कारण बनता है। बीमारी की सही समय पर पहचान और उपचार, इससे पीड़ित व्यक्ति के स्वास्थ्य एवं निर्णयात्मक जीवन जीने में मदद करता है।
बाइपोलर डिसऑर्डर कई कारणों से हो सकता है। विभिन्न शोध के अनुसार, यह वंशानुगत भी होता है। वातावरण जनित, व्यक्तिगत मनोवैज्ञानिक एवं अनुवांशिक कारण इस बीमारी के होने की सम्भावनाओं को काफी बढ़ा देते हैं। ऐसा भी देखा गया है कि जीवन की कुछ अप्रिय घटनाएं, खराब व्यक्तिगत रिश्ते, बचपन में हुए बुरे व्यवहार या कोई दुर्घटना भी इसके कम उम्र में होने की संभावनाओं को बढ़ा देता है।
इसके साथ ही मस्तिष्क में लगी चोट, एड्स का संक्रमण, मिर्गी, मस्तिष्क एवं नसों की बीमारी भी कभी-कभी इसके होने का कारण बनता है। बीमारी की सही समय पर पहचान और उपचार, इससे पीड़ित व्यक्ति के स्वास्थ्य एवं निर्णयात्मक जीवन जीने में मदद करता है।
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bipolar disorder
इलाज में न करें देर-
यह एक ऐसी बिमारी है, जो जीवन पर्यन्त रहती है, लेकिन इसका लम्बे समय तक लगातार उपचार, इसके लक्षणों को नियंत्रित करने में मददगार होता है। अवसाद एवं उन्माद के लक्षण समय-समय पर बार-बार आते रहते हैं। बाइपोलर डिसऑर्डर के उपचार में भावनाओं को नियंत्रित करने वाली मनोरोग प्रतिरोधी एवं अवसाद प्रतिरोधी दवाओं का प्रयोग किया जाता है।
संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी, परिवार केन्द्रित थेरेपी, मनोवैज्ञानिक शिक्षा, बीमारी के बार-बार होने की रोकथाम में मददगार होती है। जबकि व्यक्तिगत एवं सामाजिक समन्वय थेरेपी, बचे हुऐ अवसाद के लक्षणों में बहुत कारगर साबित होती है। ऐसे व्यक्ति को तब तक किसी व्यवसाय से संबंधित प्रयोगात्मक निर्णय, कार्य के बदलाव या घरेलू मामले से अलग रखना चाहिए, जब तक कि वह अपनी सामान्य मानसिक स्थिति में नहीं आ जाता।
एक बार जब व्यक्ति की भावनाएं, दवाओं एवं इलेक्ट्रोकन्वल्सिव थेरेपी से नियंत्रित हो जाती हैं, तब उसकी व्यक्तिगत परिस्थितियों की समीक्षा करना आवश्यक हो जाता है, ताकि उसे मुश्किलों एवं मुसीबतों से निकालने की योजना बनाई जा सके, जो कि बीमारी के होने का कारण होती हैं।
यह एक ऐसी बिमारी है, जो जीवन पर्यन्त रहती है, लेकिन इसका लम्बे समय तक लगातार उपचार, इसके लक्षणों को नियंत्रित करने में मददगार होता है। अवसाद एवं उन्माद के लक्षण समय-समय पर बार-बार आते रहते हैं। बाइपोलर डिसऑर्डर के उपचार में भावनाओं को नियंत्रित करने वाली मनोरोग प्रतिरोधी एवं अवसाद प्रतिरोधी दवाओं का प्रयोग किया जाता है।
संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी, परिवार केन्द्रित थेरेपी, मनोवैज्ञानिक शिक्षा, बीमारी के बार-बार होने की रोकथाम में मददगार होती है। जबकि व्यक्तिगत एवं सामाजिक समन्वय थेरेपी, बचे हुऐ अवसाद के लक्षणों में बहुत कारगर साबित होती है। ऐसे व्यक्ति को तब तक किसी व्यवसाय से संबंधित प्रयोगात्मक निर्णय, कार्य के बदलाव या घरेलू मामले से अलग रखना चाहिए, जब तक कि वह अपनी सामान्य मानसिक स्थिति में नहीं आ जाता।
एक बार जब व्यक्ति की भावनाएं, दवाओं एवं इलेक्ट्रोकन्वल्सिव थेरेपी से नियंत्रित हो जाती हैं, तब उसकी व्यक्तिगत परिस्थितियों की समीक्षा करना आवश्यक हो जाता है, ताकि उसे मुश्किलों एवं मुसीबतों से निकालने की योजना बनाई जा सके, जो कि बीमारी के होने का कारण होती हैं।