दुनियाभार में कोरोना की तीसरी लहर को लेकर चर्चा का दौर जारी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो कोरोना से बचाव के लिए शरीर में बनीं एंटीबॉडीज महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। शरीर में एंटीबॉडीज का निर्माण मुख्यरूप से दो तरह से होता है, पहला- संक्रमण के बाद स्वाभाविक रूप से निर्मित एंटीबॉडीज और दूसरी वैक्सीन से बनी एंटीबॉडीज। हालांकि यह एंटीबॉडीज कितने समय तक शरीर को संक्रमण से सुरक्षित रखने में सहायक हो सकती हैं? यह अब भी लोगों के लिए बड़ा सवाल बना हुआ है। इसी से संबंधित हाल ही में हुए एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बड़ा दावा किया है।
अध्ययन में दावा: संक्रमण से बनीं एंटीबॉडीज तीन महीने में नहीं होती हैं खत्म, इतने समय तक दे सकती हैं सुरक्षा
महामारी की शुरुआत से ही किया गया अध्ययन
वैज्ञानिकों का कहना है कि महामारी को लेकर भविष्यवाणी करने और प्रभावी रणनीति विकसित करने के लिए लोगों में सार्स-सीओवी-2 वायरस के प्रति प्रतिरोधक क्षमता की प्रभाविकता और अवधि को बेहतर ढंग से समझना महत्वपूर्ण है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए प्रमुख शोधकर्ता कार्लोटा डोबानो के नेतृत्व वाली टीम ने स्वास्थ्य कर्मियों के एक समूह पर महामारी की शुरुआत से ही अध्ययन किया। प्रोफेसर डोबानो कहते हैं, यह अपने प्रकार का पहला अध्ययन है जिसमें इतने बड़े पैनल पर एंटीबॉडीज के स्तर का मूल्यांकन किया गया है।
अध्ययन में सामने आई यह महत्वपूर्ण बात
इस अध्ययन के लिए 578 प्रतिभागियों के रक्त के नमूनों का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं की टीम ने मार्च से अक्टूबर 2020 के बीच अलग-अलग समय पर चार बार इन प्रतिभागियों के सैंपल लिए। ल्यूमिनेक्स तकनीक का उपयोग करते हुए वैज्ञानिकों ने सार्स के छह अलग-अलग एंटीजन के खिलाफ तमाम तरह की एंटीबॉडीज के स्तर को जानने की कोशिश की गई।
अध्ययन के निष्कर्षों से पता चला कि स्वास्थ्य कर्मियों के बीच अधिकांश संक्रमण महामारी की पहली लहर के दौरान हुआ। प्रतिभागियों में मार्च से लेकर अक्टूबर के बीच एंटीबॉडीज के स्तर में 13.5 प्रतिशत से 16.4 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई।
संक्रमण के पांच महीने बाद बढ़ सकती हैं एंटीबॉडीज
अध्ययन के निष्कर्ष में वैज्ञानिकों ने पाया कि न्यूक्लियोकैप्सिड (एन) के खिलाफ आईजीएम और आईजीजी एंटीबॉडी को छोड़कर, बाकी आईजीजी एंटीबॉडीज का स्तर स्थिर बना रहा। अध्ययन के वरिष्ठ सह-लेखक जेम्मा मोनकुनिल बताते हैं, संक्रमण के पांच महीने के बाद से करीब 75 प्रतिशत प्रतिभागियों में आईजीजी एंटी-स्पाइक एंटीबॉडी के स्तर में की वृद्धि देखी गई। इस आधार पर कहा जा सकता है कि संक्रमण के बाद शरीर में बनीं एंटीबॉडीज सात महीने तक स्थिर बनी रह सकती हैं।
एचसीओवी भी कोरोना से देती हैं सुरक्षा
इसके अलावा वैज्ञानिकों ने बताया कि ह्यूमन कोल्ड कोरोनावायरस (एचसीओवी) के खिलाफ एंटीबॉडी के संबंध में पता चला है कि यह कोविड-19 संक्रमण के खिलाफ क्रॉस-प्रोटेक्शन प्रदान कर सकती हैं। सार्स-सीओवी-2 से संक्रमित लोगों में एचसीओवी एंटीबॉडीज का स्तर कम पाया गया। इसके अलावा जिन लोगों में कोरोना के एसिम्टोमैटिक लक्षण थे उनमें सिम्टोमैटि रोगियों की तुलना में एंटी-एचसीओवी आईजीजी और आईजीए एंटीबॉडीज का स्तर अधिक पाया गया।
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स्रोत और संदर्भ:
Seven-month kinetics of SARS-CoV-2 antibodies and role of pre-existing antibodies to human coronaviruses
अस्वीकरण नोट: यह लेख बार्सिलोना इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए अध्ययनके आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। ज्यादा जानकारी के लिए आप अपने चिकित्सक से संपर्क कर सकते हैं।