वैश्विक स्तर पर जिन स्वास्थ्य जोखिमों को तेजी से बढ़ता हुआ देखा जा रहा है, एंटीबोयोटिक प्रतिरोध यानी कि एंटीबोयोटिक रेजिस्टेंस उनमें से एक है। कई अध्ययनों में लगातार इस बात को लेकर अलर्ट किया जाता रहा है कि अगर समय रहते एंटीबायोटिक्स के उपयोग को लेकर सावधानी न बरती गई तो भविष्य में इसके कारण बीमारियों के गंभीर रूप लेने का खतरा काफी बढ़ सकता है।
Alert: इस बढ़ते खतरे को लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय ने किया सावधान, सलाह- दवाओं को लेकर बिल्कुल न करें ये गलती
पहले जानिए क्या होता है एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस?
एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस तब होता है जब बैक्टीरिया या कवक जैसे रोगाणुओं को मारने के लिए बनाई गई दवाओं के प्रति ये रोगाणु बचाव की क्षमता विकसित कर लेते हैं।
एंटीबायोटिक दवाएं मुख्यरूप से संक्रमण की स्थिति में रोगजनकों को खत्म करने के लिए दी जाती हैं, पर एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस की स्थिति में ये दवाएं काम करना ही बंद कर देती हैं। इस स्थिति में दवा लेने पर भी रोगाणु मरते नहीं बल्कि और बढ़ते रहते हैं। प्रतिरोधी संक्रमणों का इलाज करना कठिन और असंभव भी हो सकता है। वैश्विक स्तर पर पिछले कुछ वर्षों में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का खतरा तेजी से बढ़ता देखा गया है।
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एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस को लेकर मंत्रालय ने किया सावधान
स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा, एंटीबायोटिक प्रतिरोध खतरनाक हो सकता है, सभी लोगों को इसके कारण होने वाले जोखिमों से सावधानी बरतते रहना चाहिए।
- एंटीबायोटिक प्रतिरोध जीवन के किसी भी चरण में किसी भी व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है।
- एंटीबायोटिक प्रतिरोध पशु चिकित्सा, मत्स्य पालन और कृषि क्षेत्रों को भी प्रभावित करता देखा जा रहा है।
- यदि प्रभावी तरीके से एंटीबायोटिक्स काम नहीं करेंगी तो कई प्रकार की गंभीर संक्रामक बीमारियों का उपचार करना कठिन हो सकता है।
एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग केवल डॉक्टर की सलाह पर लें, क्योंकि एंटीबायोटिक दवाओं का अनुचित सेवन प्रतिरोध को गति देता है।#AntimicrobialResistance #HealthForAll pic.twitter.com/dc5Amq4UVQ
— Ministry of Health (@MoHFW_INDIA) February 22, 2024
बढ़ रहा है एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का जोखिम
सेंटर फार डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के विशेषज्ञ भी कहते हैं, वैश्विक स्तर पर एंटीमाइक्रोबियल्स के अत्यधिक और अनुचित उपयोग के कारण प्रतिरोध पैदा हो गया है। सीडीसी का अनुमान है कि क्लीनिकों और आपातकालीन विभागों में जितने लोगों को एंटीबायोटिक्स दिए जाते हैं उनमें से 28 फीसदी की इसकी आवश्यकता नहीं होती है। अनावश्यक तौर पर एंटीबायोटिक दवाओं के सेवन के कारण खतरा हो सकता है।
अगर किसी व्यक्ति में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस हो जाता है और उसे हल्के स्तर का भी संक्रमण होता है तो इसके गंभीर रूप लेने का जोखिम हो सकता है।
क्या है विशेषज्ञों की सलाह?
अमर उजाला से बातचीत में स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिस गति से ये स्वास्थ्य जोखिम बढ़ता जा रहा है हमें इसपर गंभीरता से ध्यान देना जरूरी है। कुछ सामान्य सी बातों का पालन करके आप अपने जोखिमों को कम कर सकते हैं। हमेशा किसी विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह से ही दवा लें। बिना प्रिस्क्रिप्शन ओवर-द-काउंटर, इंटरनेट-यूट्यूब से देखकर न तो खुद डॉक्टर बनें, न ही खुद से दवा लेना शुरू करें। दवाएं जितने फायदे के लिए बनी हैं, दुरुपयोग की स्थिति में इससे कहीं ज्यादा नुकसानदायक भी हो सकती हैं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
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