इस साल की शुरुआत में एचआईवी/एड्स के खिलाफ वैश्विक लड़ाई को उस वक्त बड़ा झटका लगा जब संयुक्त राज्य अमेरिका ने एचआईवी रोकथाम और उपचार कार्यक्रमों के लिए विदेशी सहायता निधि रोकने का फैसला किया था। इस कदम ने अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य समुदाय में खलबली मचा दी है, स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा अगर इस दिशा में जल्द फिर से विचार न किया गया तो इस महामारी के फिर से उभरने की आशंका हो सकती है।
UNAIDS: 2029 तक लाखों लोगों की एड्स से हो सकती है मौत, संयुक्त राष्ट्र चिंतित; जानिए क्यों बढ़ गया है खतरा
- संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि अगर एचआईवी कार्यक्रमों के लिए अमेरिकी धन की भरपाई नहीं की गई, तो 2029 तक लाखों और लोग मौत का शिकार हो सकते हैं।
अमेरिका के एक फैसले ने बिगाड़ दी व्यवस्था
यूएनएड्स ने गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा, धन की कमी ने आपूर्ति श्रृंखलाओं को पहले ही अस्थिर कर दिया है, स्वास्थ्य सुविधाएं बंद कर दी हैं, हजारों स्वास्थ्य क्लीनिक बिना कर्मचारियों के रह गए हैं, रोकथाम कार्यक्रमों में बाधा आई है, एचआईवी परीक्षण के प्रयास बाधित हुए हैं और कई सामुदायिक संगठनों को अपनी एचआईवी गतिविधियों को कम करने या रोकने के लिए मजबूर होना पड़ा है। ये गंभीर चिंता का विषय है।
दशकों से हो रही प्रगति पर फिर जाएग पानी
यूएनएड्स ने यह भी कहा कि उसे डर है कि अन्य प्रमुख दानदाता भी अपना सहयोग कम कर सकते हैं, जिससे दुनियाभर में एड्स के खिलाफ दशकों से हो रही प्रगति पर पानी फिर सकता है।
संयुक्त राज्य अमेरिका ने 2025 तक वैश्विक एचआईवी रिस्पॉस के लिए जो 4 बिलियन डॉलर का वादा किया था। ये जनवरी में लगभग रातों रात गायब हो गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सभी विदेशी सहायता को निलंबित करने का आदेश दिया और बाद में अमेरिकी एआईडी एजेंसी को बंद करने का फैसला किया था।
विशेषज्ञों ने जताई चिंता
यूएस स्थित लिवरपूल विश्वविद्यालय में एचआईवी विशेषज्ञ एंड्रयू हिल ने कहा वैसे तो ट्रम्प को अमेरिकी धन को अपनी इच्छानुसार खर्च करने का अधिकार है, हालांकि कोई भी जिम्मेदार सरकार पहले से चेतावनी दे देती है ताकि देश योजना बना सके, बजाय इसके कि रातोंरात क्लीनिक बंद होने पर मरीजो को फंसा दिया जाए।
2003 में शुरू कई गई थी योजना
गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति की एड्स राहत आपातकालीन योजना या PEPFAR सन 2003 में अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश द्वारा शुरू की गई थी, जो किसी भी देश द्वारा किसी एक बीमारी पर केंद्रित अब तक की सबसे बड़ी प्रतिबद्धता थी।
यूएनएड्स के अनुमान के अनुसार, 2024 में दुनियाभर में एड्स से संबंधित लगभग 6.30 लाख मौतें हुईं। अमेरिकी वित्त पोषण में कटौती के बाद विशेषज्ञों को आशंका है कि आने वाले दिनों में एचआईवी-एड्स के मामले और मौतों में फिर से वृद्धि हो सकती है।
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नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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