वनीला का स्वाद काफी लोगों को पसंद होता है। आइसक्रीम से लेकर केक, चॉकलेट मूज, डेजर्ट में इस्तेमाल किए जाना वाला वनीला बच्चो से लेकर बूढ़ों तक पसंदीदा फूड फ्लेवर है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि वनीला बींस का महत्व खाने का स्वाद बढ़ाने से कहीं ज्यादा है। वनीला बींस का उपयोग अगर सही तरह और सही मात्रा में किया जाए तो हमें ढेरों स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं।
वनीला बींस में वनैलिन नामक सक्रिय रासायनिक तत्व पाया जाता है, जो शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को संतुलित करता है। यह बैड कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम और गुड कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ाने का काम करता है। वनीला का सेवन ह्रदय संबंधित समस्याओं को कम करने, कार्डीयो वैस्क्यूलर फंक्शन को बढ़ाने, धमनी क्षति से रक्षा करने और स्ट्रोक की संभावना को कम करने में कारगर है।
वनीला ऐंटी-ऑक्सिडेंट्स गुणों से भी भरपूर होता है, जो शरीर में मौजूद फ्री रैडिकल्स से लड़कर कैंसर जैसी बीमारियों से बचाव करते हुए सेल्स हेल्थ को बेहतर बनाते हैं। इसमें मौजूद ऐंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण शरीर के सभी जरूरी अंगों, खासकर लिवर और जोड़ों के लिए लाभदायक होता है।
वनीला बींस में ऐंटी-बैक्टीरियल गुण भी होते हैं। इसके नियमित सेवन से पेट साफ रहता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, जिससे जुकाम और बुखार जैसी बीमारियां दूर रहती हैं। यह अवसाद और एंजाइटी को दूर रखकर मन को शांत रखने का काम करता है।
हालांकि इन सारे फायदों के लिए वनीला एसेंस और उसके तेल के इस्तेमाल से बचना चाहिए और जितना हो सके वनीला बींस का उपयोग करना चाहिए। बाजार से ताजे वनीला बींस को खरीदकर एक-दो सप्ताह में उसका इस्तेमाल कर लें। बींस को किसी धारदार वस्तु से खुरचकर निकालें क्योंकि एक वनीला बींस से कम से कम तीन टी स्पून वनीला निकलता है। बींस के ऊपरी भाग को भी दूध और पानी में उबालकर वनीला चाय के रूप में उपयोग कर सकते हैं।