डॉ. राजन गांधी
किसी भी बीमारी के संदर्भ में शारीरिक इलाज के अलावा जो बाl सबसे ज्यादा मायने रखती है वह है मरीज को मानसिक रूप से मजबूत बनाना। हाल ही में ऑस्कर अवार्ड के समारोह के दौरान हॉलीवुड अभिनेता विल स्मिथ की प्रतिक्रिया बहुत चर्चा में रही। विल स्मिथ की पत्नी एलोपेशिया नामक बीमारी से जूझ रही हैं और कार्यक्रम के होस्ट ने इसी बात पर उनका मजाक बना डाला। उक्त कार्यक्रम में जो हुआ वह नहीं होना चाहिए था। लेकिन बाकी तमाम टिप्पणियों के अलावा इस बारे में विल स्मिथ ने जो बात कही उसपर विचार होना भी जरूरी है। विल ने इसी आयोजन में पुरस्कार पाने के बाद सार्वजनिक रूप से कहा- जोक्स कहना हमारे काम और जीवन का हिस्सा हैं। लेकिन मेरी पत्नी की बीमारी पर किया गया जोक असहनीय था। ऐसा इसलिए कि किसी भी बीमारी के दौरान, उपचार लेते हुए मरीज के साथ-साथ उसका परिवार भी मानसिक विचलन, डर और अस्थिरता के दौर से गुजरता है। ऐसे में अगर बीमारी फिजिकल अपीयरेंस से जुड़ी हो तो चिंता और बढ़ जाती है। सेलिब्रिटीज के मामले में ही नहीं किसी आम व्यक्ति के लिए भी इससे बाहर निकालने बड़ी चुनौती होती है। जानें एलोपेशिया के बारे में, इलाद के साथ काउंसलिंग क्यों हैं जरूरी?
Alopecia: बाल झड़ने की बीमारी एलोपेशिया के लक्षण, इलाज के साथ काउंसलिंग भी दे सकती है राहत
क्या है एलोपेशिया ?
ऑस्कर के इस चर्चे के बाद इस बीमारी का नाम और भी वायरल हो गया। एलोपेशिया अरेटा जो कि इसका पूरा नाम है, असल मे एक ऑटोइम्यून डिसऑर्डर होता है। इसमें मरीज के सिर के बाल ही नहीं, बल्कि शरीर में किसी भी जगह के बाल झड़ सकते हैं। ये बाल गुच्छों के रूप में भी बाहर निकल सकते हैं। ऐसे में बालों के झड़ने वाली जगह पर एक पैच सा बन जाता है। कई लोगों में बाल दोबारा उगते हैं तो फिर झड़ जाते हैं जबकि कुछ लोगों में बाल स्थाई रूप से आ भी सकते हैं। इस बीमारी के कई प्रकार हैं जिनमें सबसे आम है एलोपेशिया अरेटा।
एलोपेशिया के लक्षण:
हालांकि इस बीमारी के लक्षण हर मरीज में अलग अलग हो सकते हैं। लेकिन आमतौर पर बालो का बिना किसी तकलीफ गुच्छों में झड़ना सामने आता है। इसकी वजह से उस जगह पर पैचेस यानी खाली जगह जैसे धब्बे बन जाते हैं। कम समय में ही तेजी से बाल झड़ते हैं। ठंडे मौसम में बालों के झड़ने की क्रिया और बढ़ जाती है। साथ ही हाथ और पैरों की उंगलियों के नाखून भुरभुरे, लाल और धंसे हुए हो जाते हैं। बालों की जगह बने हुए ये स्किन पैचेज सफेद और मुलायम होते हैं लेकिन कई बार इनमे गुदगुदाहट, खुजली या जलन हो सकती है।
मन की सेहत पर असर:
इस बीमारी का असर मन पर इसलिए भी ज्यादा हो सकती है क्योंकि यह बाहरी सौंदर्य या व्यक्तित्व से जुड़ी होती है। खासकर महिलाओं के मामले में यह स्थिति और भी खराब हो सकती है क्योंकि उनपर सामाजिक रूप से भी कई बार दबाव होता है कि वे अच्छी दिखें। ऐसे में बालों का इस तरह झड़ना उनके लिए अवसाद, तनाव, चिड़चिड़ाहट, एंग्जायटी आदि पैदा कर सकता है। इसलिए बहुत जरूरी है कि मरीज को मानसिक सम्बल मिले।
इलाज और काउंसलिंग:
एलोपेशिया के इलाज के लिए सबसे पहले किसी त्वचा रोग विशेषज्ञ या डर्मेटोलॉजिस्ट के पास जाकर सलाह लेना जरूरी होती है। डॉक्टर आपके लक्षणों को देखकर, बालों और नाखूनों की जांच करके बीमारी के स्तर का पता लगाते हैं। इसके अलावा खून की जांच व अन्य टेस्ट के लिए भी सलाह दी जा सकती है। रेयर स्थितियों में बायोप्सी की जरूरत भी हो सकती है। इलाज के लिए कई तरीके अपनाए जा सकते हैं जो बीमारी की स्थिति पर निर्भर करते हैं। हालांकि ये बीमारी पूरी तरह ठीक नहीं हो सकती लेकिन इलाज हो सकता है और बाल फिर से उग भी सकते हैं।