दिल्ली-एनसीआर के लोगों के लिए वायु प्रदूषण लगातार गंभीर खतरा बना हुआ है। बुधवार की सुबह भी राष्ट्रीय राजधानी में हवा की गुणवत्ता 'बहुत खराब' श्रेणी में दर्ज की गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक शहर का समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 354 के करीब रहा। स्वास्थ्य विशेषज्ञ 300 से इससे अधिक के एक्यूआई लेवल को सेहत के लिहाजे से बेहद गंभीर मानते हैं। इस प्रकार की वायु के संपर्क में लंबे समय तक रहने वालों में कई प्रकार की गंभीर-क्रोनिक बीमारियों का खतरा अधिक होता है।
Air Pollution: 'बेहद खराब' स्थिति में दिल्ली की हवा, विशेषज्ञ ने इसके गंभीर जोखिमों को लेकर किया अलर्ट
वायु प्रदूषण के कारण बढ़ रही हैं स्वास्थ्य समस्याएं
#AirPollution | Commonest complaint is eye becoming sore, burning in eyes, red eyes, watering from eyes&dry-itchy eyes, burning in nose&funny taste on lips. If you touch your tongue there's metallic taste, sore throat too: Dr Arvind Kr,Chairman,Institute of Chest Surgery, Medanta pic.twitter.com/IRu8xIHJOy
दिल्ली-एनसीआर की बिगड़ती आबोहवा से होने वाले खतरे को लेकर मेदांता के इंस्टीट्यूट ऑफ चेस्ट सर्जरी के चेयरमैन डॉ अरविंद कुमार ने सभी से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। डॉ अरविंद कहते हैं, वायु प्रदूषण कई प्रकार से हमारी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। इन दिनों आंखों में जलन, सूजन और लालिमा, आंखों से पानी आने, आंखों में सूखापन और खुजली ,नाक में जलन और होठों पर अजीब स्वाद आने की समस्या के साथ लोग अस्पतालों में आ रहे हैं। ये सभी प्रदूषण के अल्पकालिक प्रभाव हैं, जबकि इससे लंबे समय तक बनी रहने वाली स्वास्थ्य समस्याओं का भी खतरा हो सकता है।
वायु प्रदूषण ने छाती से संबंधित रोगों को बढ़ा दिया है खतरा
डॉ अरविंद कहते हैं, वायु प्रदूषण के संपर्क में रहने के कई दीर्घकालिक दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं, इससे सबसे ज्यादा समस्याएं छाती में देखी जाती रही हैं। जब प्रदूषित हवा छाती के अंदर जाता है, तो इसके कारण श्वासनली और फेफड़ों में एक्यूट सूजन का खतरा काफी बढ़ जाता है। हवा में मौजूद जहरीले रसायन फेफड़ों सेअवशोषित होकर रक्त में चले जाते हैं, जिसके माध्यम यह सिर से पांव तक हर जगह फैलने लगते हैं। इसका असर शरीर के कई अंगों पर हो सकता है।
इन दिनों हमारे आईसीयू में छाती में संक्रमण, निमोनिया की समस्या वाले मरीज अधिक आ रहे हैं। प्रदूषण बढ़ने के बाद निमोनिया और छाती में संक्रमण के कारण आईसीयू में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी पहले भी होती रही है।
मस्तिष्क पर दीर्घकालिक प्रभाव
डॉ अरविंद बताते हैं, वायु प्रदूषण के कारण छाती के साथ मस्तिष्क की भी समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है। अध्ययनों में इसके कारण बच्चों में चिड़चिड़ापन बढ़ने की समस्या भी देखी गई है। प्रदूषण के कारण वायु में मिले विषाक्त पदार्थों के कारण न्यूरो-इंफ्लामेशन के मामले देखे जाते रहे हैं, जिसका हर उम्र के लोगों में गंभीर दुष्प्रभाव हो सकता है। वृद्ध लोगों में, यह स्ट्रोक के जोखिम को 10 गुना बढ़ा देता है। यही कारण है कि वायु प्रदूषण से सभी लोगों को बचाव करते रहने की आवश्यकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, वायु प्रदूषण के जोखिमों से सुरक्षित रहने के लिए सभी को निरंतर इससे बचाव के तरीकों को प्रयोग में लाते रहना जरूरी है। वायु प्रदूषण और इसके विषाक्त दुष्प्रभावों से बचे रहने के लिए अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें। बाहर जाते समय एन-95 मास्क जरूर लगाएं, ये हवा को फिल्टर करने में सहायक माने जाते हैं। बाहर के प्रदूषण के साथ इनडोर प्रदूषण का भी खतरा रहता है, इससे बचाव के लिए कमरे में वेंटिलेशन को बनाए रखने का प्रयास करें। जिन लोगों को पहले से ही सांस की समस्या है उन्हें डॉक्टर की सलाह पर दवाइयां और इनहेलर का प्रयोग करते रहना चाहिए।
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नोट: यह लेख स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
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