अक्तूबर से लेकर फरवरी के महीनों में राजधानी दिल्ली-एनसीआर सहित देश के तमाम हिस्सों में वायु प्रदूषण का खतरा बढ़ जाता है। विशेषकर दिवाली के बाद धुएं और कई राज्यों में पराली जलाने को इसका प्रमुख कारण माना जाता रहा है। अभी दिवाली में दो हफ्तों से ज्यादा का समय बाकी है, इससे पहले ही दिल्ली-एनसीआर में हवा की गुणवत्ता खराब होने लगी है। हवा की गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने राजधानी क्षेत्र में स्थिति को और अधिक बिगड़ने से रोकने के लिए 'ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान' (ग्रैप) के पहले चरण को लागू करने की घोषणा कर दी है।
अलर्ट: एक्यूआई बढ़ने पर शरीर में क्या बदलाव होते हैं? शुरुआती लक्षणों की पहचान कर तुरंत शुरू कर दें बचाव
AQI Health Effects: एक्यूआई बढ़ने पर आंखों में जलन, गले में खराश, खांसी और सांस फूलने जैसे लक्षण हो सकते हैं। बच्चों, बुजुर्गों और हृदय या फेफड़ों की बीमारी वाले लोगों को अधिक सावधानी बरतनी चाहिए। प्रदूषण के दिनों में बाहरी गतिविधियां कम करना और मास्क पहनना जोखिमों से बचाने में मदद कर सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, प्रदूषण का बढ़ना सेहत के लिए कई प्रकार से चिंता कारण हो सकता है। इसका असर केवल फेफड़ों पर ही नहीं, बल्कि आंखों, नाक, गले और हृदय संबंधी स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है। प्रदूषित हवा में कुछ समय बिताने के बाद कई लोगों को आंखों में जलन, गले में खराश, खांसी या सांस लेने में परेशानी महसूस होने लगती है। वहीं स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, लंबे समय में प्रदूषित हवा के संपर्क में रहना बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और अस्थमा या हृदय रोग से पीड़ित लोगों के लिए खतरनाक हो सकता है।
आइए जानते हैं कि एक्यूआई बढ़ने का सेहत पर किस तरह से असर होता है?
एक्यूआई बढ़ने पर शरीर में क्या बदलाव होते हैं?
प्रदूषित हवा के संपर्क में आने पर सबसे पहले आंखों, नाक और गले में जलन जैसी परेशानियां महसूस हो सकती हैं। हवा में मौजूद सूक्ष्म कण श्वसन तंत्र में पहुंचकर सूजन और जलन पैदा कर सकते हैं। प्रदूषित हवा में कुछ समय बिताना सेहत के लिए कई तरह से मुश्किलें बढ़ाने वाला हो सकता है।
- आंखों में जलन, लालिमा या पानी आना।
- नाक बहना, गले में खराश या बार-बार छींक आना।
- सूखी खांसी या गले में कुछ फंसा हुआ महसूस होना।
- सिरदर्द या थकान महसूस होना।
- अमर उजाला में हाल ही में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने बताया कि प्रदूषण के कारण किस तरह से हमारी हड्डियों को भी नुकसान हो सकता है?
सांस और फेफड़ों पर होता है सबसे ज्यादा असर
हवा में मौजूद PM 10 और PM2.5 जैसे प्रदूषक कण सांस के साथ शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। PM2.5 के कण इतने छोटे होते हैं कि वे फेफड़ों के गहरे हिस्सों तक पहुंच सकते हैं। कुछ कण फेफड़ों से होते हुए खून के संचार में भी प्रवेश कर सकते हैं। इससे प्रदूषकों के शरीर के दूसरे हिस्सों में पहुंचने का खतरा हो सकता है।
- जिन लोगों को पहले से सांस की समस्या या अस्थमा की दिक्कत रही है उनमें अस्थमा अटैक या घरघराहट की शिकायत हो सकती है।
- लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क रहने से फेफड़ों की कार्यक्षमता प्रभावित होती है और समय के साथ इससे हृदय रोग और स्ट्रोक का खतरा भी काफी बढ़ जाता है।
एक्यूआई ज्यादा हो तो बचाव के लिए क्या करें?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, एक्यूआई ज्यादा हो तो सभी लोगों का लगातार सावधानी बरतते रहनी चाहिए।
- बाहर निकलने से पहले स्थानीय एक्यूआई की जांच करें और बहुत प्रदूषण होने पर बाहर की गतिविधियां कम करें।
- जरूरत पड़ने पर अच्छी फिटिंग वाले एन95 मास्क का इस्तेमाल करें।
- घर में धुआं पैदा करने वाली गतिविधियां कम करें और उचित फिल्ट्रेशन का इस्तेमाल करें।
- अस्थमा के मरीजों को अपनी निर्धारित दवाएं और डॉक्टर की सलाह के अनुसार बचाव के तरीकों का इस्तेमाल करते रहें।
--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।