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हेल्थ अलर्ट: डेंगू में कितने प्लेटलेट्स होने पर बढ़ जाता है खतरा, कब जाएं डॉक्टर के पास? यहां जानिए सबकुछ

Thu, 22 Oct 2026 05:08 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Thu, 22 Oct 2026 05:08 PM IST
सार

Low Platelet Count: प्लेटलेट्स कम होने का मतलब हमेशा अस्पताल में भर्ती होना जरूरी नहीं है। डॉक्टर डेंगू में मरीज के लक्षण, ब्लड प्रेशर, पेशाब की मात्रा और रक्तस्राव का आकलन जरूरी है। केवल प्लेटलेट काउंट के आधार पर डरने की जरूरत नहीं है।

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Dengue Platelet Count Warning Signs You Should Never Ignore
डेंगू में लो-प्लेटलेट्स की समस्या - फोटो : Amarujala.com/AI

देश के कई हिस्से इन दिनों मच्छर जनित रोगों की चपेट में देखे जा रहे हैं। हालिया रिपोर्ट्स में राजधानी दिल्ली-एनसीआर, उत्तर-प्रदेश सहित कई अन्य हिस्सों में इन बीमारियों का खतरा देखा जा रहा है। इस महीने की शुरुआत में हमने बताया था कि किस तरह से दिल्ली से लेकर गुजरात-तमिलनाडु तक डेंगू का कहर देखा जा रहा है?



डेंगू के बारे में बात होते ही बुखार-ब्लीडिंग के समस्या के साथ प्लेटलेट्स को लेकर भी खूब बात की जाती है। ये हमारे खून में पाई जाने वाली कोशिकाएं होती हैं जिनका काम शरीर में कहीं कट या चोट आ जाए उस जगह पर इकट्ठा होकर थक्का बनाने का होता है, जिससे खून बहना बंद हो जाता है। डेंगू में  प्लेटलेट्स की संख्या तेजी से कम होती जाती है, जिससे ब्लीडिंग की समस्या हो सकती है।

अक्सर यह मान लिया जाता है कि प्लेटलेट्स काउंट अगर कम हो जाए तो तुरंत अस्पताल में भर्ती हो जाना चाहिए। क्या हर बार  प्लेटलेट्स लो होते ही वास्तव में अस्पताल पहुंच जाना जरूरी है? 

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Dengue Platelet Count Warning Signs You Should Never Ignore
डेंगू में प्लेटलेट्स का रखें ध्यान - फोटो : Freepik.com

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, प्लेटलेट्स की संख्या पर ध्यान देते रहना जरूरी है, इसकी कमी से अत्यधिक रक्तस्राव हो सकती है। डेंगू में बुखार उतरने के बाद भी कुछ मरीजों की स्थिति बिगड़ सकती है। इसलिए प्लेटलेट्स की संख्या के साथ लक्षणों पर नजर रखना जरूरी है। पर ये स्थिति आपकी उम्र, दूसरी बीमारियों, शरीर में खून के स्तर आदि पर भी निर्भर करती है।

पहले जानिए प्लेटलेट्स का सामान्य स्तर कितना है?

स्वस्थ वयस्कों में प्लेटलेट्स की सामान्य सीमा आमतौर पर लगभग 1.5 लाख से 4.5 लाख प्रति माइक्रोलीटर होती है।
 

  • 1.5 लाख से कम प्लेटलेट्स को थ्रोम्बोसाइटोपीनिया कहा जाता है।
  • 1 लाख से कम होने पर डॉक्टर मरीज की स्थिति और गिरावट के कारण का विशेष आकलन कर सकते हैं।
  • प्लेटलेट्स के 50 हजार से कम होने पर रक्तस्राव का जोखिम बढ़ सकता है,
  • वहीं इसके 10 हजार से कम होने पर गंभीर रक्तस्राव और दूसरी स्वास्थ्य जटिलताओं को जोखिम रहता है।
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डेंगू की गंभीर स्थितियां - फोटो : Adobe stock

प्लेटलेट्स लो होने पर अस्पताल में भर्ती होना जरूरी है?

जनरल फिजिशियन डॉ अरविंद रावत बताते हैं,  डेंगू के हर मरीज को अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत नहीं होती। ब्लड प्रेशर कंट्रोल रहने और पर्याप्त पेशाब वाले मरीज को डॉक्टर की सलाह पर घर में निगरानी के साथ रखा जा सकता है।

अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत तब पड़ सकती है, जब मरीज में गंभीर लक्षण हों, वह पानी या जूस जैसे तरल पदार्थ नहीं पी पा रहा हो, पेशाब कम हो रहा हो, ब्लड प्रेशर कंट्रोल में न हो या उसे अन्य गंभीर बीमारी हो। ये स्थितियां डेंगू के लक्षणों को गंभीर बनाने वाली हो सकती हैं, इसलिए ऐसी स्थिति में खास निगरानी की जरूरत होती है।

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डेंगू के कारण होने वाली दिक्कतें - फोटो : Freepik.com
डेंगू के किन लक्षणों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी?

डॉक्टर बताते हैं कि डेंगू में बुखार उतरने के आसपास या उसके बाद भी स्थिति गंभीर हो सकती है। ऐसे में बुखार उतरने के बाद भी लक्षणों पर गंभीरता से ध्यान देते रहना चाहिए। कुछ स्थितियों में आपको तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
  • पेट में तेज दर्द या लगातार उल्टी।
  • नाक या मसूड़ों से खून आना।
  • ल्टी में खून या मल का काला पड़ना।
  • अत्यधिक कमजोरी, बेचैनी, सुस्ती या बेहोशी।
  • सांस लेने में परेशानी या पेशाब बहुत कम होना।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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