अलर्ट: बढ़ता प्रदूषण भी आपकी हड्डियों को कर रहा है कमजोर, हल्की सी ठोकर से भी फ्रैक्चर का खतरा; बरतें सावधानी
World Osteoporosis Day: ऑस्टियोपोरोसिस हड्डियों को कमजोर और भुरभुरा बनाने वाली बीमारी है, जिससे फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है। उम्र बढ़ने, कैल्शियम और विटामिन-डी की कमी इसके जोखिमों को बढ़ा देते हैं। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, धूप लेना और समय पर बोन डेंसिटी टेस्ट से हड्डियों की सेहत को ठीक रखने में मदद मिल सकती है।
विस्तार
लाइफस्टाइल और खानपान की गड़बड़ी ने हमारी पूरी सेहत को प्रभावित किया है, हड्डियों पर भी इसका नकारात्मक असर देखा जा रहा है। ऑस्टियोपोरोसिस के बढ़ते मामलों को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को अलर्ट कर रहे हैं। ऑस्टियोपोरोसिस को साइलेंट डिजीज माना जाता है, जिसमें हड्डियां अंदर से कमजोर और भुरभुरी हो जाती है, जिससे इनके आसानी से टूटने का खतरा बहुत बढ़ जाता है। बीमारी के शुरुआती दौर में इसका कोई खास लक्षण महसूस नहीं होता है, यही कारण है कि बीमारी अंदर ही अंदर बढ़ती जाती है और इससे गंभीर खतरे हो सकते हैं।
आज वर्ल्ड ऑस्टियोपोरोसिस डे है। हड्डियों को मजबूत रखने और फ्रैक्चर की रोकथाम, समय पर पहचान तथा इलाज के प्रति दुनियाभर में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से हर साल 20 अक्तूबर को ये खास दिन मनाया जाता है।
आंकड़ों से पता चलता है कि भारत में बड़ी संख्या में युवा वयस्क तेज से इसका शिकार हो रहे हैं, चूंकि ये बीमारी हड्डियों को काफी कमजोर करने वाली होती है यही कारण है कि अगर समय रहते इसपर ध्यान न दिया जाए तो इससे जीवन की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
भारत में ऑस्टियोपोरोसिस के मामले
भारत में ऑस्टियोपोरोसिस के मामले एक बड़ी समस्या के रूप में उभर रहे हैं। सितंबर 2026 में 'इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च' में प्रकाशित एक समीक्षा और मेटा-विश्लेषण में शामिल स्वस्थ वयस्क भारतीय पुरुषों में से 14.6 प्रतिशत को ऑस्टियोपोरोसिस था, जबकि 50.3 प्रतिशत लोग ऑस्टियोपेनिया से पीड़ित थे। ये निष्कर्ष बताते हैं कि फ्रैक्चर के जोखिम को कम करने के लिए जागरूकता बढ़ाना, समय रहते जोखिमों का आकलन और बचाव के उपायों के बारे में लोगों को अलर्ट रहना बहुत जरूरी है।
- भारतीय महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा 8 से 62% के तक देखा जा रहा है। मेनोपॉज के बाद की लगभग 30 से 33% महिलाएं इससे प्रभावित हो जाती हैं।
- अध्ययनों से पता चलता है कि लाइफस्टाइल और खान-पान की गड़बड़ी तो हड्डियों को कमजोर कर ही रही है साथ ही साथ दुनियाभर में बढ़ते प्रदूषण का भी हड्डियों की सेहत पर नकारात्मक असर देखा जा रहा है।
प्रदूषण किस तरह से हड्डियों के लिए खतरनाक है, आइए इस बारे में जान लेते हैं।
वायु प्रदूषण से हड्डियों की समस्याएं
दिल्ली-एनसीआर में आमतौर पर नवंबर से लेकर जनवरी-फरवरी तक वायु प्रदूषण एक बड़ा संकट रहता है।
- स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं वायु प्रदूषण कई प्रकार से आपकी हड्डियों की सेहत को नुकसान पहुंचाने वाला हो सकता है।
- सांस के जरिए पार्टिकुलेट मैटर (PM 2.5 और PM 10) और जहरीली गैसे शरीर के अंदर जाने से पूरे शरीर में दीर्घकालिक सूजन होने का खतरा बढ़ जाता है। इससे ट्यूमर नेक्रोसिस फैक्टर-अल्फा (TNF-α) और इंटरल्यूकिन्स जैसे सूजन वाले संकेत रिलीज होते हैं जिससे ऑस्टियोक्लास्ट (हड्डियों को ब्रेक डाउन करने वाली कोशिकाएं) एक्टिव हो सकती हैं।
- वायु प्रदूषक हड्डियों के ऊतकों में हानिकारक फ्री रेडिकल्स उत्पन्न करते हैं, जिससे हड्डियों के निर्माण और ब्रेकडाउन के बीच संतुलन बिगड़ जाता है।
- वायु गुणवत्ता में खराबी और इसके कारण किडनी पर पड़ने वाला स्ट्रेस विटामिन-डी के मेटाबॉलिज्म को बाधित कर सकता है, जिससे कैल्शियम का अवशोषण कम हो जाता है और हड्डियों की डेंसिटी कमजोर हो जाती है। इससे आर्थराइटिस और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है।
ऑस्टियोपोरोसिस के खतरों को जानिए
ऑस्टियोपोरोसिस के कारण हड्डियां इतनी कमजोर हो जाती हैं कि इनके बहुत आसानी से टूटने का जोखिम हो सकता है। इससे कूल्हे, रीढ़ की हड्डी और कलाई में फ्रैक्चर होने की आशंका बढ़ जाती है।
- महिलाओं में इसका खतरा खास तौर पर उम्र बढ़ने और मेनोपॉज के आसपास बढ़ जाता है। इस समय एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम होने लगता है।
- जिन महिलाओं का वजन ज्यादा होता है या जिन्हें पहले से हड्डियों में कमजोरी की समस्या है उनमें ऑस्टियोपोरोसिस और आर्थराइटिस का जोखिम ज्यादा बढ़ जाता है।
ऑस्टियोपोरोसिस से कैसे करें बचाव
ऑस्टियोपोरोसिस से बचाव के लिए बचपन से ही हड्डियों की सेहत पर ध्यान देना जरूरी है। इसके लिए कैल्शियम और विटामिन-डी से भरपूर संतुलित आहार लें।
- दूध, दही, पनीर, रागी, तिल और कैल्शियम युक्त अन्य खाद्य पदार्थ हड्डियों को मजबूत बनाए रखने में मदद करते हैं।
- विटामिन-डी कैल्शियम के अवशोषण के लिए जरूरी है। इसकी पूर्ति के लिए सुरक्षित तरीके से धूप लें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट लें।
- नियमित रूप से पैदल चलना, सीढ़ियां चढ़ना और अपनी क्षमता के अनुसार व्यायाम करना भी हड्डियों की सेहत के लिए जरूरी है। मांसपेशियों को मजबूत बनाने वाले व्यायाम और संतुलन सुधारने वाली गतिविधियां गिरने का खतरा कम कर सकती हैं।
- बढ़ती उम्र, मेनोपॉज या अन्य जोखिम कारकों वाले लोगों को डॉक्टर की सलाह से बोन डेंसिटी टेस्ट करवाना चाहिए।
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स्रोत:
Fine particulate matter and osteoporosis: evidence, mechanisms, and emerging perspectives
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