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Harvard Study: शहरी आबादी में कम हो रही है औसत आयु, ये है प्रमुख वजह, आप भी रखें विशेष ध्यान

Fri, 07 Jul 2023 03:34 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Fri, 07 Jul 2023 03:34 PM IST
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air pollution reduces life expectancy, risk of chronic and life threatening disease
बढ़ रही है गंभीर बीमारियों का खतरा - फोटो : iStock

शहरी वातावरण और जीवनशैली को सेहत के लिए नकारात्मक प्रभावों वाला पाया गया है। अध्ययनों में तो यहां तक चिंता जताई गई है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वालों की तुलना में शहरी लोगों की आयु कम होती जा रही है। इन दुष्प्रभावों के वैसे तो कई कारण हो सकते हैं, पर वैज्ञानिकों ने सबसे ज्यादा चिंता तेजी से बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर जताई है। वायु प्रदूषण को फेफड़ों के साथ हृदय रोगों और अल्जाइमर जैसी बीमारियों का प्रमुख कारण पाया गया है, जिससे न सिर्फ क्वालिटी ऑफ लाइफ बिगड़ती है साथ ही जानलेवा दुष्प्रभाव भी अधिक होते हैं।



हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के विशेषज्ञों ने अध्ययन में चिंता जताते हुए कहा है कि अगर वायु प्रदूषण को कम करने के लिए पर्याप्त उपाय न किए गए तो यह भविष्य के लिए गंभीर सूचक हो सकता है। इसके कारण लोगों की जीवन प्रत्याशा कम होती देखी जा रही है। कई गंभीर और क्रोनिक बीमारियों का खतरा पहले की तुलना में काफी बढ़ गया है। यह सभी चिंताकारक विषय हैं।

air pollution reduces life expectancy, risk of chronic and life threatening disease
वायु प्रदूषण के हो सकते हैं गंभीर दुष्प्रभाव - फोटो : istock

समय से पहले मौत का कारण

यह पहले से ज्ञात है कि वायु प्रदूषण फेफड़ों के कैंसर, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी), अस्थमा, हृदय रोग और स्ट्रोक का कारण बनता है। इसी से संबंधित चीन में हाल ही में किए गए एक अध्ययन में अनुमान लगाया गया है कि 75 वर्ष और उससे अधिक उम्र वाले प्रति एक लाख लोगों में 1,166 की समय से पहले मौत के लिए भी वायु प्रदूषण एक कारक है।

अगर यह आपको पूरी तरह से नहीं मारता है, तो क्वालिटी ऑफ लाइफ को खराब कर देता है। वायु प्रदूषण के कारण डिमेंशिया और अल्जाइमर रोग के मामले बढ़े हुए देखे गए हैं।

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प्रदूषण का मस्तिष्क पर असर - फोटो : istock

मानसिक रोग बिगाड़ सकते हैं जीवन की गुणवत्ता

अध्ययनों से पता चलता है कि वायु प्रदूषण से संज्ञानात्मक क्षमता कम हो सकती है और इसके कारण डिमेंशिया और अल्जाइमर रोग काफी सामान्य होते जा रहे हैं। चीन और अमेरिका के शोधकर्ताओं ने मिलकर विश्लेषण किया जिसमें पाया कि वायु प्रदूषण के लंबे समय तक संपर्क में रहने का संबंध आपकी मानसिक कार्यक्षमता को प्रभावित करने वाला हो सकता है। 

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वायु प्रदूषण से हो रही हैं क्रोनिक बीमारियां - फोटो : Pixabay

अध्ययन में क्या पता चला?

एक अन्य अध्ययन में 50 से 79 वर्ष की आयु वाले 130,978 वयस्कों को शामिल किया गया। इसमें 2,181 लोगों में समय के साथ डिमेंशिया विकसित हुई। वायु प्रदूषण की उच्चतम सांद्रता वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में इसका जोखिम सबसे अधिक था। 

शोधकर्ताओं ने पाया कि चूंकि शहरों में गाड़ियों का धुंआ, फैक्ट्री के कारण वायु प्रदूषण अधिक होता है। पेड़ों की कमी के कारण ऑक्सीजन की मात्रा कम है जिसके कारण यहां के लोगों में अधिक जोखिम देखा जा रहा है। 

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वायु प्रदूषण के दुष्प्रभाव - फोटो : Pixabay

क्या कहते हैं वैज्ञानिक?

अध्ययन के निष्कर्ष में वैज्ञानिकों ने बताया- वायु प्रदूषण के संपर्क में आने से हर किसी के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। जब हम वायु प्रदूषकों में सांस लेते हैं, तो यह हमारे रक्तप्रवाह में प्रवेश कर जाता है जिससे सांसों से संबंधित बीमारियां होती हैं। इसके अलावा जिस तरह से उपरोक्त बिंदुओं में स्पष्ट किया गया है कि इसके कारण मस्तिष्क की सेहत पर दुष्प्रभाव हो रहा है ऐसे में प्रदूषण को संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पाया गया है।

यह कैंसर जैसे रोगों को भी बढ़ा रहा है जिससे समय से पहले मौत हो सकती है।


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स्रोत और संदर्भ
Air quality and health

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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