शहरी वातावरण और जीवनशैली को सेहत के लिए नकारात्मक प्रभावों वाला पाया गया है। अध्ययनों में तो यहां तक चिंता जताई गई है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वालों की तुलना में शहरी लोगों की आयु कम होती जा रही है। इन दुष्प्रभावों के वैसे तो कई कारण हो सकते हैं, पर वैज्ञानिकों ने सबसे ज्यादा चिंता तेजी से बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर जताई है। वायु प्रदूषण को फेफड़ों के साथ हृदय रोगों और अल्जाइमर जैसी बीमारियों का प्रमुख कारण पाया गया है, जिससे न सिर्फ क्वालिटी ऑफ लाइफ बिगड़ती है साथ ही जानलेवा दुष्प्रभाव भी अधिक होते हैं।
Harvard Study: शहरी आबादी में कम हो रही है औसत आयु, ये है प्रमुख वजह, आप भी रखें विशेष ध्यान
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समय से पहले मौत का कारण
यह पहले से ज्ञात है कि वायु प्रदूषण फेफड़ों के कैंसर, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी), अस्थमा, हृदय रोग और स्ट्रोक का कारण बनता है। इसी से संबंधित चीन में हाल ही में किए गए एक अध्ययन में अनुमान लगाया गया है कि 75 वर्ष और उससे अधिक उम्र वाले प्रति एक लाख लोगों में 1,166 की समय से पहले मौत के लिए भी वायु प्रदूषण एक कारक है।
अगर यह आपको पूरी तरह से नहीं मारता है, तो क्वालिटी ऑफ लाइफ को खराब कर देता है। वायु प्रदूषण के कारण डिमेंशिया और अल्जाइमर रोग के मामले बढ़े हुए देखे गए हैं।
मानसिक रोग बिगाड़ सकते हैं जीवन की गुणवत्ता
अध्ययनों से पता चलता है कि वायु प्रदूषण से संज्ञानात्मक क्षमता कम हो सकती है और इसके कारण डिमेंशिया और अल्जाइमर रोग काफी सामान्य होते जा रहे हैं। चीन और अमेरिका के शोधकर्ताओं ने मिलकर विश्लेषण किया जिसमें पाया कि वायु प्रदूषण के लंबे समय तक संपर्क में रहने का संबंध आपकी मानसिक कार्यक्षमता को प्रभावित करने वाला हो सकता है।
अध्ययन में क्या पता चला?
एक अन्य अध्ययन में 50 से 79 वर्ष की आयु वाले 130,978 वयस्कों को शामिल किया गया। इसमें 2,181 लोगों में समय के साथ डिमेंशिया विकसित हुई। वायु प्रदूषण की उच्चतम सांद्रता वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में इसका जोखिम सबसे अधिक था।
शोधकर्ताओं ने पाया कि चूंकि शहरों में गाड़ियों का धुंआ, फैक्ट्री के कारण वायु प्रदूषण अधिक होता है। पेड़ों की कमी के कारण ऑक्सीजन की मात्रा कम है जिसके कारण यहां के लोगों में अधिक जोखिम देखा जा रहा है।
क्या कहते हैं वैज्ञानिक?
अध्ययन के निष्कर्ष में वैज्ञानिकों ने बताया- वायु प्रदूषण के संपर्क में आने से हर किसी के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। जब हम वायु प्रदूषकों में सांस लेते हैं, तो यह हमारे रक्तप्रवाह में प्रवेश कर जाता है जिससे सांसों से संबंधित बीमारियां होती हैं। इसके अलावा जिस तरह से उपरोक्त बिंदुओं में स्पष्ट किया गया है कि इसके कारण मस्तिष्क की सेहत पर दुष्प्रभाव हो रहा है ऐसे में प्रदूषण को संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पाया गया है।
यह कैंसर जैसे रोगों को भी बढ़ा रहा है जिससे समय से पहले मौत हो सकती है।
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स्रोत और संदर्भ
Air quality and health
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