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Air Pollution: सेहत के लिए कितना खतरनाक है 450 से ज्यादा एक्यूआई, क्या हैं इसके दुष्प्रभाव? डॉक्टर से जानिए

Mon, 18 Nov 2024 01:09 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Mon, 18 Nov 2024 01:09 PM IST
सार

सोमवार (18 नवंबर) को दिन की शुरुआत  घने कोहरे  और धुंध के साथ हुई। वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 450 से अधिक दर्ज किया गया। इसे सीवियर+ की श्रेणी वाला माना जाता है। इस तरह की स्थितियां दीर्घकालिक रूप से संपूर्ण स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाली हो सकती हैं। 

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वायु प्रदूषण का खतरा - फोटो : Adobe stock

राजधानी दिल्ली-एनसीआर में हवा की गुणवत्ता लगातार खराब होती जा रही है। बिगड़ती स्थिति को देखते हुए यहां ग्रैप-4 लागू कर दिया गया है। सोमवार (18 नवंबर) को दिन की शुरुआत घने कोहरे और धुंध के साथ हुई। कुछ स्थानों पर विजिबिलिटी घटकर  150 मीटर रह गई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार सोमवार सुबह वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 450 से अधिक दर्ज किया गया। इसे सीवियर+ की श्रेणी वाला माना जाता है। द्वारका में एक्यूआई 500 तक पहुंच गया।



इस तरह की हवा को सेहत के लिए कई प्रकार से गंभीर दुष्प्रभावों वाला माना जा रहा है। दिल्ली में प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञ ने सभी लोगों को अलर्ट रहने की सलाह दी है। 

(ये भी पढ़ें- बढ़ता प्रदूषण कहीं छीन न ले आंखों की रोशनी)

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, कई लोगों को प्रदूषण के कारण आंखों में जलन, सांस लेने में दिक्कत, खांसी और जुकाम की समस्या हो रही है। हवा के साथ जल प्रदूषण का भी यहां पर खतरनाक स्तर देखा जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चिंता जताते हुए कहा है कि इस तरह की स्थितियां दीर्घकालिक रूप से संपूर्ण स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाली हो सकती हैं। 
 

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दिल्ली में बढ़ रहा है वायु प्रदूषण - फोटो : एएनआई

हवा की खराब होती गुणवत्ता को देखते हुए GRAP-IV लागू

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इससे पहले रविवार को दिल्ली का एक्यूआई 441 रिकॉर्ड किया गया। नवंबर में ये चौथा ऐसा दिन था जब वायु गुणवत्ता इतने खराब स्तर की थी। सोमवार सुबह की स्थिति और भी खराब रही। बिगड़ते हालात को देखते हुए दिल्ली में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) 4 लागू कर दिया है, जिसमें प्रदूषण नियंत्रण को लेकर कड़े नियम लागू किए गए हैं। 

जब एक्यूआई 450 से अधिक हो जाता है, तो GRAP-IV लागू किया जाता है, जिसमें निर्माण कार्यों पर पूरी तरह रोक दिया जाता है। स्कूल बंद किए जा सकते हैं तथा ऑड-ईवन लागू की जा सकती है। 

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वायु प्रदूषण के कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : Adobe stock

कितना खतरनाक है 450 से अधिक एक्यूआई 

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि 450 से अधिक एक्यूआई विशेषतौर पर बच्चों और बुजुर्गों की सेहत के लिए बहुत हानिकारक है। हवा की खराब होती गुणवत्ता श्वसन और हृदय की गंभीर बीमारियों को बढ़ाने वाली हो सकती हैं, जिसको लेकर सभी लोगों को अलर्ट रहना चाहिए।

बढ़ता प्रदूषण सेहत के लिए कितना खतरनाक है, इसे जानने के लिए हमने नोएडा स्थित एक अस्पताल में श्वसन रोग विशेषज्ञ डॉ विरेंद्र सिंह से बातचीत की। डॉक्टर कहते हैं, प्रदूषण हमारी सेहत के लिए अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों स्थितियों में खतरनाक है। सीवियर+ की श्रेणी के कारण गंभीर दुष्प्रभावों का जोखिम रहता है। 

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सांस की समस्या - फोटो : Freepik.com

ट्रिगर हो सकती है अस्थमा या सांस की दिक्कतें

डॉ विरेंद्र कहते हैं, 450 या इससे अधिक का एक्यूआई ' बहुत गंभीर' माना जाता है। इस तरह की वायु गुणवत्ता उन लोगों के लिए सबसे खतरनाक है जो पहले से ही किसी क्रोनिक बीमारी से ग्रस्त हैं। उदाहरण के लिए जिन लोगों को पहले से अस्थमा या ब्रोंकाइटिस की समस्या है इसके ट्रिगर होने का जोखिम रहता है। इसके अलावा ये ब्लड प्रेशर और हृदय स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है। 

हवा में हानिकारक प्रदूषक जैसे कि पार्टिकुलेट मैटर (PM2.5 और PM10), नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और ओजोन की स्तर बढ़ जाता है। ये प्रदूषक फेफड़ों और रक्तप्रवाह में प्रवेश कर सकते हैं, जिससे कई प्रकार की समस्याएं हो सकती हैं। 

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अस्थमा अटैक का जोखिम - फोटो : Freepik

प्रदूषण से बचाव के लिए करें उपाय

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा, वायु प्रदूषण के उच्च स्तर के संपर्क में आने से आंख, नाक और गले में जलन, सांस लेने में तकलीफ और खांसी होती है। अस्थमा, ब्रोंकाइटिस या क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) जैसी बीमारी वाले व्यक्तियों में लक्षण बिगड़ने लगते हैं, जिससे अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत पड़ सकती है। बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं की सेहत के लिए ये और भी खतरनाक है। 

वायु की बिगड़ती गुणवत्ता को देखते हुए बाहरी गतिविधियों को सीमित करना जरूरी है। जब तक जरूर न हो घरों से बाहर न जाएं। बाहर जाना जरूरी हो तो मास्क जरूर लगाएं। अस्थमा के रोगी हमेशा अपने साथ इनहेलर जरूर रखें। घर के भीतर की हवा को साफ रखने के लिए एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें। 



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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