राजधानी दिल्ली-एनसीआर में हवा की गुणवत्ता लगातार खराब होती जा रही है। बिगड़ती स्थिति को देखते हुए यहां ग्रैप-4 लागू कर दिया गया है। सोमवार (18 नवंबर) को दिन की शुरुआत घने कोहरे और धुंध के साथ हुई। कुछ स्थानों पर विजिबिलिटी घटकर 150 मीटर रह गई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार सोमवार सुबह वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 450 से अधिक दर्ज किया गया। इसे सीवियर+ की श्रेणी वाला माना जाता है। द्वारका में एक्यूआई 500 तक पहुंच गया।
Air Pollution: सेहत के लिए कितना खतरनाक है 450 से ज्यादा एक्यूआई, क्या हैं इसके दुष्प्रभाव? डॉक्टर से जानिए
सोमवार (18 नवंबर) को दिन की शुरुआत घने कोहरे और धुंध के साथ हुई। वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 450 से अधिक दर्ज किया गया। इसे सीवियर+ की श्रेणी वाला माना जाता है। इस तरह की स्थितियां दीर्घकालिक रूप से संपूर्ण स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाली हो सकती हैं।
हवा की खराब होती गुणवत्ता को देखते हुए GRAP-IV लागू
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इससे पहले रविवार को दिल्ली का एक्यूआई 441 रिकॉर्ड किया गया। नवंबर में ये चौथा ऐसा दिन था जब वायु गुणवत्ता इतने खराब स्तर की थी। सोमवार सुबह की स्थिति और भी खराब रही। बिगड़ते हालात को देखते हुए दिल्ली में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) 4 लागू कर दिया है, जिसमें प्रदूषण नियंत्रण को लेकर कड़े नियम लागू किए गए हैं।
जब एक्यूआई 450 से अधिक हो जाता है, तो GRAP-IV लागू किया जाता है, जिसमें निर्माण कार्यों पर पूरी तरह रोक दिया जाता है। स्कूल बंद किए जा सकते हैं तथा ऑड-ईवन लागू की जा सकती है।
कितना खतरनाक है 450 से अधिक एक्यूआई
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि 450 से अधिक एक्यूआई विशेषतौर पर बच्चों और बुजुर्गों की सेहत के लिए बहुत हानिकारक है। हवा की खराब होती गुणवत्ता श्वसन और हृदय की गंभीर बीमारियों को बढ़ाने वाली हो सकती हैं, जिसको लेकर सभी लोगों को अलर्ट रहना चाहिए।
बढ़ता प्रदूषण सेहत के लिए कितना खतरनाक है, इसे जानने के लिए हमने नोएडा स्थित एक अस्पताल में श्वसन रोग विशेषज्ञ डॉ विरेंद्र सिंह से बातचीत की। डॉक्टर कहते हैं, प्रदूषण हमारी सेहत के लिए अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों स्थितियों में खतरनाक है। सीवियर+ की श्रेणी के कारण गंभीर दुष्प्रभावों का जोखिम रहता है।
ट्रिगर हो सकती है अस्थमा या सांस की दिक्कतें
डॉ विरेंद्र कहते हैं, 450 या इससे अधिक का एक्यूआई ' बहुत गंभीर' माना जाता है। इस तरह की वायु गुणवत्ता उन लोगों के लिए सबसे खतरनाक है जो पहले से ही किसी क्रोनिक बीमारी से ग्रस्त हैं। उदाहरण के लिए जिन लोगों को पहले से अस्थमा या ब्रोंकाइटिस की समस्या है इसके ट्रिगर होने का जोखिम रहता है। इसके अलावा ये ब्लड प्रेशर और हृदय स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है।
हवा में हानिकारक प्रदूषक जैसे कि पार्टिकुलेट मैटर (PM2.5 और PM10), नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और ओजोन की स्तर बढ़ जाता है। ये प्रदूषक फेफड़ों और रक्तप्रवाह में प्रवेश कर सकते हैं, जिससे कई प्रकार की समस्याएं हो सकती हैं।
प्रदूषण से बचाव के लिए करें उपाय
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा, वायु प्रदूषण के उच्च स्तर के संपर्क में आने से आंख, नाक और गले में जलन, सांस लेने में तकलीफ और खांसी होती है। अस्थमा, ब्रोंकाइटिस या क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) जैसी बीमारी वाले व्यक्तियों में लक्षण बिगड़ने लगते हैं, जिससे अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत पड़ सकती है। बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं की सेहत के लिए ये और भी खतरनाक है।
वायु की बिगड़ती गुणवत्ता को देखते हुए बाहरी गतिविधियों को सीमित करना जरूरी है। जब तक जरूर न हो घरों से बाहर न जाएं। बाहर जाना जरूरी हो तो मास्क जरूर लगाएं। अस्थमा के रोगी हमेशा अपने साथ इनहेलर जरूर रखें। घर के भीतर की हवा को साफ रखने के लिए एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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