फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

Air Pollotion: नहीं उठाए गए बड़े कदम तो हर साल 66 लाख लोगों को गंवानी पड़ सकती है जान, हो जाइए सावधान

Fri, 08 Nov 2024 04:21 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Fri, 08 Nov 2024 04:21 PM IST
सार

  • प्रदूषित वातावरण में रहने से फेफड़े, हृदय और मस्तिष्क से संबंधित कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं।
  • विशेषज्ञों ने चेताया है कि यदि प्रदूषण-रोधी कोई व्यापक उपाय नहीं किए गए तो वायु प्रदूषण के कारण 2050 तक हर साल 6.6 मिलियन (66 लाख) लोगों की असामयिक मृत्यु हो सकती है। 

विज्ञापन
Air pollution is a leading cause of death globally know Air pollution health risk
वायु प्रदूषण के दुष्प्रभाव - फोटो : Freepik.com

वायु प्रदूषण वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। पिछले एक महीने से दिल्ली-एनसीआर सहित पड़ोसी राज्य प्रदूषित वातावरण की मार झेल रहे हैं। अध्ययनों में इसे सेहत के लिए कई प्रकार से नुकसानदायक बताया गया है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के लिए प्रदूषण खतरनाक हो सकता है। शोध बताते हैं कि प्रदूषित वातावरण में रहने से फेफड़े, हृदय और मस्तिष्क से संबंधित कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं, जो समय से पहले मृत्यु के जोखिमों को बढ़ाने वाली मानी जाती हैं।



विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का अनुमान है कि वायु प्रदूषण के कारण हर साल 7 मिलियन (70 लाख) लोगों की असमय मौत हो जाती है। हेल्थ इफेक्ट्स इंस्टीट्यूट (HEI) का अनुमान है कि साल 2021 में वायु प्रदूषण के कारण 8.1 मिलियन (81 लाख) लोगों की मौत हुई।

इसी से संबंधित जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में विशेषज्ञों ने चेताया था कि यदि प्रदूषण-रोधी कोई व्यापक उपाय नहीं किए गए तो वायु प्रदूषण के कारण 2050 तक हर साल 6.6 मिलियन (66 लाख) लोगों की असामयिक मृत्यु हो सकती है। 

Air pollution is a leading cause of death globally know Air pollution health risk
वायु प्रदूषण का असर - फोटो : Adobe stock

वायु प्रदूषण के दुष्प्रभाव

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, वायु प्रदूषण आपके फेफड़ों पर सबसे ज्यादा असर डालता है। जब प्रदूषित हवा में मौजूद सूक्ष्म कण सांस के साथ अंदर जाते हैं तो इससे फेफड़ों के लिए दिक्कतें बढ़ सकती हैं। यह स्थिति पहले से ही सांस की बीमारियों जैसे अस्थमा और ब्रोंकाइटिस वाले मरीजों के लिए खतरनाक और जानलेवा भी हो सकती है।

इसी तरह वायु प्रदूषण फेफड़ों के साथ-साथ हृदय रोग के शिकार लोगों के लिए भी बहुत नुकसानदायक है। प्रदूषित वातावरण में रहने से ब्लड प्रेशर बढ़ने, हृदय गति रुकने, स्ट्रोक जैसी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।

कैंसर रिसर्च यूके ने एक रिपोर्ट में बताया, वायु प्रदूषण में कई प्रकार के सूक्ष्म और हानिकारक कणों का मिश्रण होता है, जिससे कैंसर होने का जोखिम भी बढ़ जाता है। ये सभी बीमारियां समय से पहले मौत का खतरा बढ़ाने वाली मानी जाती हैं।

Air pollution is a leading cause of death globally know Air pollution health risk
दिल्ली में वायु प्रदूषण - फोटो : एएनआई

लैंसेंट की रिपोर्ट को लेकर विवाद

इस बीच केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने लैंसेट के उस अध्ययन के निष्कर्षों का विरोध किया है जिसमें कहा गया था कि देश के दस प्रमुख शहरों में वायु की गुणवत्ता खराब होने के कारण मृत्यु दर पर गंभीर असर पड़ा है। सीपीसीबी ने कहा कि इस अध्ययन के आंकड़े पूरी तरह से सही नहीं हैं। मौतों के लिए सीधे वायु प्रदूषण को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

बोर्ड ने यह भी कहा कि जो सैटेलाइट डेटा और विश्लेषण की तकनीकें इस अध्ययन में इस्तेमाल की गई हैं, वह भारत की वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शाती हैं। 

विज्ञापन
विज्ञापन
Air pollution is a leading cause of death globally know Air pollution health risk
प्रदूषण के कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : Adobe Stock

क्या था लैंसेट का अध्ययन

लैंसेट ने एक अध्ययन में बताया था
कि वायु प्रदूषण की वजह से हर साल भारत में करीब 33 हजार मौतें होती हैं। यह अध्ययन दिल्ली, अहमदाबाद, बंगलूरू, चेन्नई, हैदराबाद, कोलकाता, मुंबई, पुणे, शिमला और वाराणसी जैसे दस शहरों में किया गया था। 

इस सबंध में सीपीसीबी ने कहा रिपोर्ट के मुताबिक पीएम 2.5 के शॉर्ट-टर्म एक्सपोजर (कम समय के लिए संपर्क) के कारण भारत में मृत्यु दर अधिक होती है। इस अध्ययन की कुछ सीमाएं हैं। यानी इसमें कुछ गलतियां या कमियां हो सकती हैं। सीपीसीबी ने कहा कि भारत के अलग-अलग राज्यों और शहरों में मृत्यु के पंजीकरण की प्रणाली अलग-अलग तरीके से काम करती हैं। जिससे आंकड़ों में अंतर हो सकता है।

अध्ययन में मौत के कारणों के विश्लेषण के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई। बोर्ड ने कहा कि जब मौत के आंकड़ों के बारे में सही जानकारी नहीं होती, तो आंकड़ों से अनुमान लगाया जाता है। इसलिए इन मौतों को वायु प्रदूषण से जोड़ना सही नहीं है। 


-------------------
स्रोत और संदर्भ
Ambient air pollution and daily mortality in ten cities of India: a causal modelling study


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें  लाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसे हेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health  and fitness news), लाइव फैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्ट फूड न्यूज़ इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) और यात्रा (travel news in Hindi)  आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed