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Child Health: बेबी फूड्स में इस चीज की मिलावट, बच्चों में हो सकता है इन रोगों का खतरा

Sat, 04 May 2024 11:06 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sat, 04 May 2024 11:06 AM IST
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Added Sugar Found in Baby Foods Linked to Risk of Obesity and Metabolic disorder in children
बेबी फूड्स में ऐडेड शुगर की मात्रा - फोटो : istock

क्या आप भी अपने बच्चों को बेबी फूड्स के नाम पर भर-भर के ऐडेड शुगर खिला रहे हैं? जबकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्पष्ट रूप से कहना है कि छोटे बच्चों बिल्कुल भी शुगर नहीं दिया जाना चाहिए। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका सहित कई हिस्सों में अग्रणी खाद्य और पेय ब्रांड नेस्ले के बेबी फूड्स में ऐडेड शुगर की मात्रा पाई गई है। हालांकि इसी ब्रांड के यूरोप में बेचे जाने वाले उत्पादों में शुगर की मात्रा नहीं थी। इतना ही नहीं भारतीय बाजार में बिकने वाले उत्पादों में ऐडेड शुगर की मात्रा तीन ग्राम से अधिक पाई गई है, जिसके सेवन से बच्चों की सेहत पर गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं। 



स्विस संगठन, पब्लिक आई ने इंटरनेशनल बेबी फूड एक्शन नेटवर्क (आईबीएफएएन) के सहयोग से पेश की रिपोर्ट में बताया है कि बच्चों को दिए जाने वाले कई उत्पादों में ऐडेड शुगर की मात्रा पाई गई है, जिसका अगर लंबे समय तक सेवन किया जाता है तो स्वास्थ्य पर कई प्रकार से नकारात्मक असर हो सकता है।

बचपन में शुगर वाली चीजों का सेवन करने से मोटापे से लेकर मेटाबॉलिज्म, पाचन सहित मस्तिष्क से संबंधित कई प्रकार की दिक्कतें हो सकती हैं। 

Added Sugar Found in Baby Foods Linked to Risk of Obesity and Metabolic disorder in children
नेस्ले - फोटो : amarujala.com

ऐडेड शुगर वाले उत्पाद हानिकारक

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कई खाद्य पदार्थ की प्रोसेसिंग के दौरान उसमें ऐडेड शुगर की मात्रा मिलाई जाती है। इसके अधिक सेवन से मोटापा बढ़ने का खतरा देखा जाता रहा है। कई अध्ययनों में वयस्कों को उन चीजों से दूरी बनाकर रखने की सलाह दी जाती रही है जिनमें शुगर-ऐडेड शुगर ककी अधिकता होती है। बच्चों की सेहत पर इसके और भी कई प्रकार के दुष्प्रभाव हो सकते हैं।  


शिशु उत्पादों की गुणवत्ता में पाई गई कमी पर केंद्र ने सख्ती जताई है। अधिक चीनी मिलाने की रिपोर्ट के बाद CCPA ने  एफएसएसएआई को नोटिस जारी किया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

Added Sugar Found in Baby Foods Linked to Risk of Obesity and Metabolic disorder in children
बेबी फूड्स की गुणवत्ता पर सवाल - फोटो : istock

क्या है डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइन?

पब्लिक आई ने बताया कि कई देशों में इन ब्रांड्स के ऐडेड शुगर वाले बेबी फूड्स को राष्ट्रीय कानून के तहत अनुमति है, बावजूद इसके कि ये विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशानिर्देशों के खिलाफ हैं। साल 2015 में विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशानिर्देश में सिफारिश की गई थी कि वयस्क और बच्चे को अपने दैनिक शुगर का सेवन, कुल ऊर्जा सेवन के 10% से कम रखना चाहिए। ऐडेड शुगर को डायबिटीज, हार्ट की बीमारियों, आर्टरी की समस्या सहित कई प्रकार की क्रोनिक बीमारियों का कारक बताया गया है। 

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Added Sugar Found in Baby Foods Linked to Risk of Obesity and Metabolic disorder in children
Obesity - फोटो : istock

बच्चों की सेहत पर क्या हो सकते हैं इसके दुष्प्रभाव

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (एएचए) के नए दिशानिर्देशों पर नजर डालें तो पता चलता है कि दो से 18 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए प्रतिदिन 25 ग्राम (6 चम्मच) से कम चीनी का सेवन करना चाहिए। वहीं दो साल से छोटे बच्चों को बिल्कुल भी चीनी नहीं देनी चाहिए।

चीनी का मतलब सिर्फ चीनी से नहीं बल्कि चॉकलेट, कैंडी, बिस्कुट या फिर उन बेबी फूड्स से भी है जिनमें ऐडेड शुगर की मात्रा होती है। ज्यादा मात्रा में चीनी वाली या मीठी चीजों का सेवन करने वाले बच्चों को मोटापा, उच्च रक्तचाप और टाइप-2 डायबिटीज हो सकता है। अध्ययनों में शुगर वाली चीजों को बच्चों और वयस्कों में हृदय रोगों का खतरा बढ़ाने वाला भी पाया गया है। 

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Added Sugar Found in Baby Foods Linked to Risk of Obesity and Metabolic disorder in children
मस्तिष्क पर असर - फोटो : istock

गड़बड़ हो सकता है ब्रेन कैमिकल

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया, बच्चों के शुगर वाली चीजों के अधिक सेवन के कारण मस्तिष्क से संबंधित कई प्रकार के विकारों के विकसित होने का भी खतरा रहता है। हमारे मस्तिष्क का अपना रासायनिक संतुलन होता है। शोधकर्ताओं ने बताया कि कम गुणवत्ता वाले या असंतुलित आहार जैसे हाई प्रोसेस्ड फूड्स, चीनी वाली चीजों का अधिक सेवन मस्तिष्क के रासायनिक संतुलन को बिगाड़ सकता है। ऐडेड शुगर मस्तिष्क को ओवरड्राइव मोड में डाल देती है। जब मस्तिष्क अत्यधिक उत्तेजित होता है, तो यह अतिसक्रियता और मूड में बदलाव का कारण बन सकता है। इससे बच्चों में चिड़चिड़ापन, मूड विकार, चिंता और मानसिक विकास प्रभावित होने का भी खतरा रहता है। 


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स्रोत और संदर्भ
How Nestlé gets children hooked on sugar in lower-income countries


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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