फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों में निमोनिया को सबसे गंभीर संक्रमणों में से एक माना जाता है। अक्सर लोग इसे सामान्य सर्दी, खांसी या वायरल बुखार समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन कई मामलों में यही लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।
Pneumonia: निमोनिया ने ले ली इस मशहूर एक्टर की जान, जानिए क्यों खतरनाक है ये बीमारी और आप कैसे बचें?
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, निमोनिया दुनिया भर में बच्चों और बुजुर्गों में मौत का एक प्रमुख कारण है।निमोनिया में फेफड़ों के छोटे-छोटे वायुकोष में संक्रमण हो जाता है। इनमें तरल पदार्थ भरने लगता है, जिससे शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती।
निमोनिया की समस्या के बारे में जानिए
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, निमोनिया दुनिया भर में बच्चों और बुजुर्गों में मौत का एक प्रमुख कारण है। हालांकि यह बीमारी किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है।
- 5 साल से छोटे बच्चों, 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों, गर्भवती महिलाओं और कमजोर इम्युनिटी वाले मरीजों में इसका खतरा अधिक होता है।
- हालांकि समय पर पहचान और सही इलाज से अधिकांश मरीज पूरी तरह ठीक हो सकते हैं।
डॉक्टर कहते हैं, निमोनिया कई प्रकार के सूक्ष्मजीवों से हो सकता है। कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों में कुछ फंगस भी निमोनिया पैदा कर सकते हैं। कई बार वायरल संक्रमण के बाद शरीर कमजोर होने पर बैक्टीरियल निमोनिया विकसित हो जाता है। धूम्रपान, वायु प्रदूषण और पुरानी फेफड़ों की बीमारी भी जोखिम बढ़ाते हैं।
निमोनिया की पहचान कैस करें?
डॉक्टर बताते हैं, निमोनिया होने पर अक्सर तेज बुखार, ठंड लगने, लगातार खांसी, बलगम आने और सांस फूलने की समस्या हो सकती है।
- कुछ लोगों में सिरदर्द, भूख कम लगने और शरीर दर्द भी हो सकता है।
- बुजुर्गों में कई बार तेज बुखार नहीं आता, बल्कि भ्रम, सुस्ती या अचानक कमजोरी ही पहला संकेत हो सकता है।
- छोटे बच्चों में तेजी से सांस चलना और दूध पीने में परेशानी होना भी इसका संकेत हो सकता है।
सामान्य सर्दी-खांसी और निमोनिया में क्या अंतर है?
डॉक्टर कहते हैं, सामान्य वायरल संक्रमण और सर्दी-जुकाम में अक्सर नाक बहने, हल्का बुखार और गले में खराश होती है। जबकि निमोनिया में तेज बुखार के साथ सांस लेने में कठिनाई, सीने में दर्द और लगातार खांसी हो सकती है। यदि बुखार कई दिन तक बना रहे, शरीर में ऑक्सीजन कम होने लगे या सांस लेने में परेशानी बढ़े, तो इसे सामान्य वायरल संक्रमण मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
निमोनिया हो जाए तो क्या करें?
डॉक्टर कहते हैं, निमोनिया किस कारण से है, उसका इलाज भी इसपर निर्भर करता है।
- बैक्टीरियल निमोनिया में डॉक्टर एंटीबायोटिक दवाएं देते हैं, जबकि वायरल निमोनिया में अधिकतर मामलों में सहायक उपचार किया जाता है।
- गंभीर मरीजों को ऑक्सीजन थेरेपी और जरूरत पड़ने पर आईसीयू में भर्ती करना पड़ सकता है।
- हालांकि बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक नहीं लेना चाहिए।
हाथों की नियमित सफाई, खांसते या छींकते समय मुंह ढकना, धूम्रपान से बचना, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम संक्रमण के खतरे को कम कर सकते हैं। जोखिम वाले लोगों के लिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार निमोकोकल वैक्सीन और इन्फ्लूएंजा वैक्सीन लगवानी चाहिए।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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