कोरोना का संक्रमण पिछले कुछ महीनों में वैश्विक स्तर पर बढ़ता देखा गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक ओमिक्रॉन के BA.2.86 वैरिएंट में म्यूटेशन से उत्पन्न JN.1 सब-वैरिएंट इस लहर का प्रमुख कारण माना जा रहा है। इसके कारण अमेरिका और सिंगापुर जैसे देशों में बड़ी संख्या में न सिर्फ अस्पतालों में भीड़ बढ़ी, साथ ही मौत के मामले भी बढ़े हैं।
Covid-19: एक महीने के भीतर देश में संक्रमण और मौत दोनों में दर्ज की गई वृद्धि, ये राज्य सबसे ज्यादा प्रभावित
संक्रमण और मौत के मामले बढ़े
इस महीने जारी विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के कोविड-19 महामारी विज्ञान अपडेट के अनुसार, भारत में पिछले महीने कोविड-19 के संक्रमण और मौत दोनों के मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, 11 दिसंबर 2023 से 7 जनवरी, 2024 तक 28 दिनों की अवधि में, भारत में 15,000 से अधिक नए मामले दर्ज किए गए। ये पिछली रिपोर्टिंग अवधि की तुलना में काफी अधिक है। दिसंबर 2023 से जनवरी 2024 के 28 दिनों की अवधि में रिपोर्ट की गई मौतों की संख्या में भी वृद्धि हुई, इस दौरान 86 लोगों की मौत हुई। नवंबर के शुरुआती हफ्तों में तुलनात्मक रूप से दैनिक मामले 100 या उससे कम बने हुए थे।
देश में कोरोना से मौत के केस
रिपोर्ट से पता चलता है कि देश में कोरोना के कारण मौत के मामले बढ़े हैं, हालांकि, मृत्युदर प्रति 100,000 लोगों पर एक मृत्यु से कम बनी हुई है। रिपोर्ट में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि भारत सहित दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र के 11 में से पांच देशों ने नए मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है।
मौत के ज्यादातर मामले उन लोगों में देखे गए हैं, जो पहले से कोमोरबिडिटी के शिकार रहे हैं या फिर जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता क्रोनिक बीमारियों के कारण काफी कमजोर थी।
71 देशों में फैल चुका है नया वैरिएंट
डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक JN.1 वैरिएंट अब तक 71 देशों में रिपोर्ट किया गया है, वैरिएंट पर निगरानी के महत्व पर जोर दिया जा रहा है। अमर उजाला से बातचीत में स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, JN.1 वैरिएंट को शुरुआत से ही अति संक्रामकता वाला माना जा रहा है। संक्रमण दर अधिक होने से कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों में भी इसका खतरा बढ़ा जिसके कारण रोग के कुछ गंभीर मामले भी रिपोर्ट किए गए।
संक्रमण से बचाव को लेकर बरतें सावधानी
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, दीर्घस्तरीय रूप में देखें तो पता चलता है कि वैक्सीनेशन और प्राकृतिक संक्रमण के कारण अधिकतर लोगों में रोग प्रतिरोधक क्षमता मौजूद है, जो उन्हें संक्रमण या फिर गंभीर रोग के खतरे से सुरक्षित रखने में मदद करती है। नया वैरिएंट कई देशों में तेजी से बढ़ता हुआ देखा गया है, ऐसे में बचाव के लिए सभी लोगों को निरंतर संक्रमण से बचाव के उपायों को लेकर सावधान रहने की आवश्यकता है।
मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग और हाथों की स्वच्छता पर ध्यान देकर कोरोना के खतरे को कम किया जा सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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