दुनियाभर में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामले और तीसरी लहर को लेकर जताई जा रही आशंका लोगों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। हालांकि इन सबके बीच भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने एक राहत भरी जानकारी दी है। आईसीएमआर ने हालिया सीरो सर्वेक्षण के आधार पर बताया है कि देश में करीब 68 फीसदी लोगों में कोरोना वायरस के खिलाफ एंटीबॉडीज विकसित हो चुकी हैं। इस आधार पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि देश में आने वाली संभावित कोरोना की तीसरी लहर का असर काफी कम हो सकता है।
कोरोना की तीसरी लहर: देश की इतनी फीसदी आबादी को माना जा सकता है सुरक्षित, स्वास्थ्य संगठन का बड़ा दावा
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21 राज्य के लोगों पर किया गया सर्वे
देश के 21 राज्यों के 70 जिलों के 28,975 लोगों के बीच यह सर्वे किया गया, इन लोगों में 7,252 स्वास्थ्यकर्मी भी शामिल थे। इन सभी लोगों में से 62.2 प्रतिशत का टीकाकरण नहीं हुआ था जबकि 24.8 फीसदी लोगों को वैक्सीन की एक खुराक और 13 फीसदी लोगों को दोनों खुराक मिल चुकी थी। सर्वे के दौरान पाया गया कि वैक्सीन की एक खुराक लेने वालों में सेरोपोसिटिविटी दर 81 प्रतिशत और दोनों खुराक लेने वालों में 89.8 प्रतिशत थी।
ज्यादातर लोगों में पाई गईं एंटीबॉडीज
सीरो सर्वेक्षण की रिपोर्ट के 6 से 9 साल के 57.2 फीसदी जबकि 10 से 17 साल के 61.6 फीसदी बच्चों में कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडीज पाई गई हैं। 18 से 44 साल के 66.7 फीसदी, 45 से 60 साल के 77.6 फीसदी जबकि 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में 76.7 फीसदी लोगों के शरीर में एंटीबॉडी पाई गई हैं। हालांकि सर्वे में यह अंतर स्पष्ट नहीं हो पाया है कि लोगों के शरीर में यह एंटीबॉडीज कोरोना संक्रमण की वजह से विकसित हुई हैं या फिर टीकाकरण की वजह से। फिलहाल इन लोगों को तीसरी लहर से सुरक्षित माना जा रहा है।
40 करोड़ लोगों पर खतरा अब भी बरकरार
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव ने बताया कि इस सर्वे से प्राप्त नतीजों से हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि अबतक देश की दो-तिहाई आबादी में वायरस के खिलाफ रक्षात्मक एंटीबॉडीज विकसित हो चुकी हैं। हालांकि अभी भी एक तिहाई आबादी यानी करीब 40 करोड़ लोगों में एंटीबॉडी नहीं पाई गई हैं, जिसका यह मतलब है कि इन लोगों में कोरोना की तीसरी लहर का खतरा अधिक हो सकता है। जिन राज्यों के लोगों में कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडीज नहीं विकसित हो पाईं हैं उन्हें विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
कोविड से बचाव के नियमों का पालन करना आवश्यक
डॉ. बलराम भार्गव कहते हैं, एंटीबॉडीज विकसित करने को लेकर प्राप्त आंकड़े सुकून देने वाले हैं, हालांकि हमें फिर भी सावधानी बरतने में कोई लापरवाही नहीं दिखानी चाहिए। सभी लोगों को लगातार कोविड से बचाव के नियमों का पालन करते रहना चाहिए, भले ही आपको वैक्सीन लग चुकी है। कोरोना से सुरक्षित रहने की जिम्मेदारी आपको खुद लेनी चाहिए, किसी प्रकार के भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचें क्योंकि वहां से संक्रमण फैलने का खतरा काफी अधिक हो सकता है।
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नोट: यह लेख भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के हालिया सर्वेक्षण के आधार पर तैयार किया गया है।
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