दिसंबर 2019 से दुनियाभर में जारी कोरोना महामारी ने लोगों की सेहत को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। अब तक कोरोना के कई वैरिएंट्स सामने आ चुके हैं जिनमें से कुछ को बेहद घातक जबकि कुछ को अति संक्रामक माना जा रहा है। कोरोना का संक्रमण कुछ लोगों में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण भी बना है। संक्रमण के कारण लाखों लोगों की जान भी चली गई। करीब तीन साल से जारी इस महामारी में अब तक 64 लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।
Corona संकट: इस साल अब तक 10 लाख से अधिक की मौत, वैरिएंट्स की गंभीरता कम फिर भी बढ़ रहे मौत के मामले
कोरोना के आंकड़े देखिए
कोरोना के अब तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि 60.51 करोड़ से अधिक लोग संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं जिनमें से 64.86 लाख से अधिक की मौत हुई है, 58 करोड़ से ज्यादा लोग संक्रमण से ठीक भी हुए हैं। भारत के नजरिए से देखें तो यहां अब तक संक्रमितों का आंकड़ा 4.43 करोड़ का है जिसमें से 5.27 लाख की मौत हुई है। कोरोना से मौत का आंकड़ा सबसे अधिक अमेरिका (10 लाख से अधिक) का है।
कोरोना संक्रमण के ये आंकड़े डराने वाले हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना कि भले ही अध्ययनों में नए वैरिएंट्स को अधिक गंभीर न माना जाता रहा हो फिर भी इसको लेकर लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए।
डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने जताई चिंता
इस साल अब तक कोरोना से हुई दस लाख से अधिक मौतों को लेकर चिंता जताते हुए डब्ल्यूएचओ प्रमुख कहते हैं, जो आंकड़े हैं उन्हें देखकर यह तो नहीं कहा जा सकता है कि हम कोविड-19 के साथ जीना सीख रहे हैं, इसी साल 1 मिलियन से अधिक लोग मारे गए हैं। यह स्थिति तब है जब हम महामारी को ढाई साल से अधिक समय से झेलते आ रहे हैं और इन मौतों को रोकने के लिए हमारे पास लगभग सभी आवश्यक उपकरण हैं।
विश्वभर में कोरोना के जिन वैरिएंट्स का सबसे अधिक प्रभाव देखा जा रहा है उन्हें भी अधिक गंभीर रोगों का कारक नहीं माना जा रहा है। ऐसे में एक बात स्पष्ट होती है कि जरूर हम सभी कोरोना को हल्के में लेने की गलती कर रहे हैं।
टीकाकरण की कम रफ्तार बड़ी चिंता
विश्व स्तर पर WHO की रिपोर्ट के अनुसार, कोविड-19 के मामलों में पिछले सप्ताह की तुलना 9% की कमी आई। अधिकारियों ने कोरोना के कारण हो रही मौतों के लिए लोगों के वैक्सीनेशन न कराने को प्रमुख कारण माना है। डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने फिर से टीकाकरण पर जोर देते हुए सभी सरकारों से टीकाकरण की रफ्तार को तेज करके अधिक से अधिक लोगों को जल्द सुरक्षित करने की अपील की है। अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि वृद्ध लोगों और कोमारबिडिटी वाले लोगों में संक्रमण की स्थिति में मृत्यु का जोखिम अधिक होता है, ऐसे लोगों को बूस्टर शॉट देकर अतिरिक्त सुरक्षा देने पर जोर देना चाहिए।
WHO के टीकाकरण का लक्ष्य अब भी बहुत दूर
कई देशों में अब भी वैक्सीनेशन की रफ्तार काफी कम है, इस दिशा में चिंता जाहिर करते हुए डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने कहा, अफ्रीका जैसे देशों में वैक्सीन की असमानता बड़ी समस्या है। करीब 10 देश ऐसे हैं जिनमें कोरोना के गंभीर रोग और इसके कारण मौत के मामले अधिक देखे गए हैं, वहां अब भी टीकाकरण 10% से कम है।
पिछले साल WHO ने 2022 के मध्य तक दुनियाभर के 70% लोगों के टीकाकरण का लक्ष्य निर्धारित किया था, हालांकि इसमें अब भी बड़ा अंतर देखा जा रहा है। जून 2022 तक, केवल 58 देशों ने 70% लक्ष्य को पार किया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने लोगों से जल्द से जल्द वैक्सीनेशन कराने और बचाव के लिए कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर का पालन करते रहने की अपील की है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
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