Teamwork: किसी संगठन में कर्मचारियों को फीडबैक लेने-देने के लिए प्रोत्साहित करना काफी फायदेमंद होता है। जब लोग नियमित रूप से एक-दूसरे से सुझाव मांगते हैं, तो उनमें विनम्रता बढ़ती है, डर कम होता है और खुलकर सीखने की भावना विकसित होती है।
हालांकि, ऐसी संस्कृति अपने आप नहीं बनती, बल्कि इसके लिए लीडर को टीम से सदस्यों को सही ढंग से फीडबैक लेना-सिखाना, अन्य लीडर्स को उदाहरण बनाना, अच्छे व्यवहार को पुरस्कृत करना और फीडबैक को रोजमर्रा के काम का हिस्सा बनाना होता है। इससे एक ऐसी कार्य संस्कृति बनती है, जहां हर कोई सहजता से सीखता और आगे बढ़ता है। ऐसा करने की कुछ व्यावहारिक रणनीतियां यहां बताई गई हैं।
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सवाल पूछने की कला
कुशलता से सवाल पूछना एक कला है, जिसे सीखना पड़ता है। जब टीम के सदस्य बिना मार्गदर्शन के ऐसा करने का प्रयास करते हैं, तो अक्सर उनके सवाल अस्पष्ट या अधूरे होते हैं। इस वजह से उन्हें सही जवाब नहीं मिल पाता। इसलिए, टीम के सदस्यों को सटीक व प्रभावी सवाल पूछने की क्षमता विकसित करने में मदद करें। उनसे पूछें कि क्या आप बता सकते हैं कि कहीं मेरी बात लंबी तो नहीं लग रही? या मेरे तरीके से बातचीत में कहां फायदा हुआ और कहां टकराव? फॉलो-अप सवाल भी पूछें कि अगर इस चीज को काम में लागू किया जाए, तो परिणाम कैसा मिलेगा?
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केवल दिशा न दिखाएं
लीडर का काम केवल दिशा दिखाना नहीं होता, बल्कि वे संगठन का माहौल और संस्कृति भी तैयार करते हैं। ऐसे में, सिर्फ सवाल पूछना पर्याप्त नहीं है। इसके अलावा, यह जानना भी महत्वपूर्ण है कि आप किसी जवाब पर कैसे प्रतिक्रिया देते हैं, कौन-सी जानकारी साझा करते हैं और सुझावों पर क्या कार्रवाई करते हैं। यही तय करेगा कि आपकी सिखाने और सुधारने की संस्कृति कितनी मजबूत होगी।
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सराहना करना सीखें
टीम का कोई सदस्य जब कोई सवाल पूछे, तो उसकी सराहना करें। उन्हें सोच-समझकर और विचारशील सवाल पूछने के लिए प्रोत्साहित करें। पदोन्नति या प्रोत्साहन की स्थिति में यह स्पष्ट करें कि आपने सुझाव मांगने व सवाल पूछने वाले लोगों की कद्र की है। इससे आप साबित कर सकेंगे कि बेहतर सवाल पूछने वाले भी आगे बढ़ सकते हैं, न कि सिर्फ अच्छे जवाब देने वाले।
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पहले पूछने की आदत
अपनी दिनचर्या में ‘पहले पूछो’ की आदत शामिल करें। इसके लिए साल में दो बार प्रत्येक कर्मचारी को आपसे या सहकर्मियों से दो सराहनीय बातें तथा दो सुधार योग्य पहलू साझा करने के लिए कहें। इससे फीडबैक सामान्य और सहज बन जाता है, प्रदर्शन व टीम के रिश्ते मजबूत होते हैं एवं सीखने की संस्कृति को गहराई मिलती है।