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कश्मीर का 'मांझी' : दो साल से पत्थरों में तलाश रहा है पत्नी को

Fri, 09 Sep 2016 11:55 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू Updated Fri, 09 Sep 2016 11:55 AM IST
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story of kashmir ka manjhi
saddal - फोटो : Amar Ujala
कभी वीरान आंखों से घंटों आसमान तकता रहता है तो कभी कुदाल लेकर पत्थरों का सीना तोड़ने लगता है। इन बेजान पत्थरों में ही कहीं उसकी जिंदादिल पत्नी सत्या के अवशेष मिल जाएंगे, यह उम्मीद दो साल में पल भर को भी टूटी नहीं है। किस्सों जैसी यह हकीकत सद्दल गांव के कपूर सिंह की है। 
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saddal - फोटो : Amar Ujala
उधमपुर जिले का यह गांव 7 सितंबर 2014 को आए ज़लज़ले में जमींदोज हो गया था। कपूर के कुनबे के सात लोग भी दब गए। छह के शव तो मिल गए, लेकिन कपूर की पत्नी अभी तक नहीं मिली। कपूर की बेमकसद की जिंदगी का इकलौता मकसद अब अपनी सत्या की तलाश ही रह गया है। 
story of kashmir ka manjhi
saddal - फोटो : Amar Ujala
चट्टानों के बीच किसी के खुदाई करने की आवाज सुनाई देती है तो लोग समझ जाते हैं कि यह कपूर ही होगा। यहीं उससे कुछ ही दूरी पर मलबे से पत्थर और लकड़ी हटाता एक और शख्स नजर आता है। यह गिरधारी लाल है। 
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saddal - फोटो : Amar Ujala
खुदाई करते उसे जो सामान मिलता है, वह उसे मवेशियों के लिए बनाए गए शेड में जमा कर लेता है। गिरधारी का भी पूरा परिवार मलबे में दबकर खत्म हो गया। अब वह अकेला है।
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saddal - फोटो : Amar Ujala
सद्दल की तबाही में 40 जाने गईं। सिर्फ 36 शव खोजे जा सके हैं। तमाम सरकारी एजेंसियों ने हाथ खड़े कर दिए। पीड़ित परिवारों ने भी जहां-तहां आसरा ढूंढ़ लिया, लेकिन, जलजले में पूरा परिवार खो चुके गिरधारी और कपूर ने आखिरी सांस तक गांव न छोड़ने की ठान रखी है। 
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