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283 साल पुराने इस किले पर था 'साया', मारे गए एक राजपूत सैनिक के नाम से दूर हुई बाधा

Tue, 21 Nov 2017 02:51 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर 
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर  Updated Tue, 21 Nov 2017 02:51 PM IST
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The 283-year-old fort wanders on this ghost things, because of its change name
नाहरगढ़ किला - फोटो : File photo
अरावली पर्वतमाला पर ​बसा यह किला करीब 283 साल पुराना है। कहते हैं कि करीब 700 फीट की उंचाई पर स्थित इस किले के निर्माण शुरू होने के दौरान ही यहां अजीबो-गरीब रहस्यमयी घटनाएं होने लगीं। एक तांत्रिकों के कहने पर राजा को इस किले का नाम बदलकर एक मरे हुए राजपूत सैनिक के नाम पर करना पड़ा। विदेशी इसे टाईगर फोर्ट के नाम से भी जानते हैं, लेकिन असल में इस किले के नाम के पीछे बाघों का कोई लेना-देना नहीं है। जानिए, किले से जुड़ी कहानियां...

दिन का निर्माण काम सूर्यास्त के बाद हो जाता था नष्ट

The 283-year-old fort wanders on this ghost things, because of its change name
नाहरगढ़ किले का ​विहंगम दृश्य - फोटो : File photo
हम बात कर रहे हैं राजस्थान की राजधानी जयपुर में बसे नाहरगढ़ किले की। इस किले को सवाई राजा जयसिंह द्वितीय ने सन 1734 में बनवाया था। निर्माण के समय व्यवधान होने लगा। दिनभर में हुआ निर्माण काम सूर्यास्त के बाद रात में स्वत: नष्ट हो जाता था। कहते हैं कि तांत्रिकों ने इस बाधा को दूर करने के लिए किले का नाम एक मरे हुए सैनिक के नाम से रखने की सलाह दी। तब राजा ने किले का नाम सुदर्शनगढ़ से बदलकर नाहरगढ़ कर दिया। प्रसिद्ध कहानियों के अनुसार नाहर नाम एक सैनिक नाहर सिंह भोमियां से लिया गया, जो मर चुका था। उन्हीं की स्मृति में किले के अंदर एक मंदिर का निर्माण करवाया गया। साथ ही भौमिया जी का मंदिर आगरा रोड पर घाट की गूणी के पास स्थापित कराया गया। 

रानियों के लिए 9 महल, दिखने में भूल-भुलैया

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किले का सबसे मनमोहक भाग माधवेंद्र भवन - फोटो : File photo
18 वीं शताब्दी में सवाई राम सिंह के द्वारा किले के अन्दर रानियों के लिए अलग-अलग 9 महल बनवाए। नाहरगढ़ किले का सबसे मनमोहक भाग माधवेंद्र भवन है, जो रॉयल महिलाओ के लिए बनवाया गया था। महल के कमरों को भी गलियारों से जोड़ा गया है। महल में महिलाओ के कमरों को इस कदर बनाया गया है की महाराजा दूसरी रानियों को पता चले बिना ही किसी भी रानी के रूम में जा सके। ये महल दिखने में एक जैसे है और किसी भूल-भुलैया से कम नहीं है। महल के कमरों को गलियारों से जोड़ा गया है और महल में कुछ रोचक और कोमल भित्तिचित्र भी बने हुए हैं।
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विद्रोह के वक्त यहां रुके थे यूरोपियन शासक के पत्नी व बच्चे

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किले के चारों तरफ अभेद मोटी दीवारें - फोटो : FILE PHOTO
इस किले के चारों तरफ सुरक्षा के लिए अभेद मोटी दीवारें बनी हुई हैं। इतिहासकारों के मुताबिक इस किले पर कभी कोई आक्रमण नहीं हुआ। 1857 में भारत विद्रोह के वक्त युरोपियन, जिसमे ब्रिटिश शासकों की पत्नियां और बच्चे भी शामिल थे। उन्हें जयपुर के राजा सवाई राम सिंह ने सुरक्षा के लिए नाहरगढ़ किले में भेज दिया था।
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इस किले में ही शूट हुईं ये हॉरर फिल्में, सीरियल भी

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नाहरगढ़ किले में फिल्म रंग दे बसंती की शूटिंग - फोटो : File photo
नाहरगढ़ किला महाराजाओं का निवास स्थान भी हुआ करता था। यहां बॉलीवुड की कुछ प्रसिद्ध फिल्म जैसे आमिर खान अभिनीत फिल्म 'रंग दे बसंती', 'जोधा-अकबर', 'दाता' सहित कई प्रमुख फिल्मों और हॉरर सीरियल्स के दृश्यों को भी शूट किया गया है। आमेर किले और जयगढ़ किले के साथ नाहरगढ़ किला भी जयपुर शहर को मजबूत सुरक्षा प्रदान करता है। शहर से इस किले को देखना निश्चित ही आनंदमयी होता है।
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