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'अनोखे बलिदान' की घटना पर चंदा जुटाकर बनी इस फिल्म पर उपजा विवाद
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sun, 03 Dec 2017 12:14 PM IST
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पद्मावती और साको363
- फोटो : अमर उजाला
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पद्मावती, बाजीराव मस्तानी और जोधा अकबर के बाद एक और फिल्म पर विवाद शुरू हो गया है। यह फिल्म राजस्थान में हुए एक अनूठे बलिदान के कथानक पर आधारित है। पेड़ों और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए खेजड़ली में अमृतादेवी बिश्नोई के नेतृत्व में 363 लोगों ने अपनी जान दे दी थी। यह विवाद इस घटना पर आधारित फिल्म 'साको 363' से जुड़ा है।
रिलीज होने से पहले विवाद
फिल्म का एक दृश्य
- फोटो : फाइल फोटो
खेजड़ली में 363 लोगों के बलिदान की घटना पर आधारित 'साको 363' रिलीज होने से पहले ही विवादों में फंस गई है। यूं तो इस फिल्म का विवाद कई महीने से है, लेकिन हाल में एक संगठन ने फिल्म के प्रदर्शन को लेकर जो कदम उठाए है, उससे यह मामला फिर गरमा गया है।
ये है फिल्म से जुड़ा विवाद
फिल्म के सीन में स्नेहा उल्लाल
- फोटो : अमर उजाला
आरोप है कि फिल्म रिलीज से पहले ही उसकी डीवीडी फ्रांस के कांस फिल्म फेस्टिवल में बेचने की कोशिश हुई है। इसकी डीवीडी को चार करोड़ रुपए में बेचने की कोशिश की गई, लेकिन सफलता नहीं मिल पाई। मामला खुला तो आरोपी बचते नजर आ रहे हैं।
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समाज के चंदे से बनी है फिल्म
फिल्म का एक दृश्य
- फोटो : अमर उजाला
फिल्म जम्भेश्वर पर्यावरण एवं जीव रक्षा संस्था और मरुधरा फिल्म की ओर से बनाई गई है। संस्था के प्रदेश अध्यक्ष रामरतन विश्नोई ने मामले की रिपोर्ट दर्ज करवाई है। फिल्म के लिए पांच करोड़ रुपए में से 1.30 करोड़ रुपए कम्पनी और बाकी रुपए विश्नोई समाज की ओर से संस्था ने खर्च किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि फिल्म कम्पनी से जुड़े लोगों ने अपने नाम से डीवीडी कांस में बेचने की कोशिश की है।
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325 लोगों ने लगाया है पैसा
फिल्म का एक दृश्य
- फोटो : अमर उजाला
फिल्म साको 363 विश्नोई समाज की मदद से बनी है। समाज के 325 लोगों ने चंदा दिया तो जाकर फिल्म बन पाई है। इसमें नागौर, जोधपुर, बीकानेर, श्री गंगानगर, जालोर, बाड़मेर के साथ ही पंजाब हरियाणा, गुजरात के लोग भी शामिल हैं।