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पांडवों से लेकर पद्मावती के जौहर तक, जानें इस किले के कई अनजाने रहस्य
Wed, 22 Nov 2017 03:52 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Wed, 22 Nov 2017 03:52 PM IST
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Deepika Padukone
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संजय लीला भंसाली की आने वाली फिल्म 'पद्मावती' में जिस किले की कहानी को दिखाया जाएगा, वो है चितौड़गढ़। चितौड़गढ़ यूं तो राजपूतों की वीरता और क्षत्राणियों के जौहर और त्याग के लिए जाना जाता है, लेकिन इस किले का संबंध महाभारत काल के पांडवों से भी है। ऐसे में किले का महत्व और भी बढ़ जाता है। पहले पांडव, मौर्य और फिर राजपूत राजाओं का संबंध इस वीर भूमि से बना रहा है।
भीम ने किया था प्रहार
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भीम
- फोटो : फाइल फोटो
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार चित्तौड़ का निर्माण पाण्डव भीम ने अपने वनवास के दौरान किया था। एक स्थान पर उसने अपना घुटने से प्रहार किया था। वह स्थान अभी एक कुण्ड है और इसे भीमलत कहते हैं।
मौर्यों से भी हैं संबंध
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चित्तौड़ दुर्ग
चित्तौड़गढ़ किला एक भव्य और शानदार संरचना है जो दूसरी सदी में किसी मौर्य शासक सम्भवतः प्रचण्ड मौर्य का उत्तराधिकारी या स्थानीय मौर्य चित्रांगद द्वारा बनाया गया था।
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महाराणा कुंभा की देन है आज का किला
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चित्तौड़ दुर्ग
महाराणा कुम्भा से महाराणा सांगा तक चित्तौड़गढ़ मेदपाट (मेवाड़) नहीं पूरे उत्तर भारत को नियंत्रित करता रहा। इस दौरान इस किले में इतना परिर्वतन आया कि आज का चित्तौड़गढ़ पूरी तरह से महाराणा कुम्भा की देन लगता है। यह के अधिकतर निर्माण कुम्भा के काल के हैं। समुद्र तल से 1338 फीट ऊंचाई पर मेसों के पठार पर बना यह किला तीन मील लम्बा और आधे मील चौड़ा है।
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तब हुआ था अग्निकांड
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चित्तौड़ दुर्ग
मौर्यों के बाद चित्तौड़ नागदा के गुहिलोतों के अधीन रहा। गुहिलोत शासक रावल जैत्रसिंह के समय 1228 में मेवाड़ की राजधानी नागदा (वर्तमान कैलाशपुर एकलिंगजी और उसके आस-पास का 10 वर्गमील में फैला क्षेत्र) पर दिल्ली के मामलुक सुल्तान अल्तमश ने हमला किया। इस हमले में जैत्रसिंह शहरवासियों के साथ पहाड़ी इलाके गोगुन्दा के शहर नान्देशमा चला गया और अल्तमश ने नागद को नष्ट कर आग के हवाले कर दिया। मेवाड़ में यह पहला अग्निकाण्ड था। इसमें जौहर हुआ इसका कोई प्रमाण नहीं मिलता है।
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