फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

पुलिस की वर्दी का रंग खाकी लेकिन कहीं सफेद भी, जानें इसके पीछे की वजह

Mon, 20 Jul 2020 06:58 PM IST
अमित कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमित कुमार Updated Mon, 20 Jul 2020 06:58 PM IST
विज्ञापन
Why police uniform colour and design is different in states, History of Khaki Colour
दिल्ली पुलिस (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
खाकी। इस रंग का जिक्र आते ही दिन रात हमारी रक्षा में जुटे पुलिसकर्मियों का चेहरा हमारी आंखों के सामने घूमने लगता है। खाकी वर्दी को देश की शान माना जाता है और इसे सम्मान से देखा जाता है। कोरोना काल में भी खाकी वर्दी पहने पुलिसकर्मी 24 घंटे अपनी परवाह किए बिना कानून व्यवस्था बनाए रखने में लगे हुए हैं। 


हम लोग चैन से सोएं, इसलिए खाकी वर्दी पहने देश के ये पहरेदार जागते हैं। सड़कों पर तैनात रहते हैं, ताकि हम अपने घरों में सुरक्षित रहें। मगर हमारी आतंरिक सुरक्षा का पर्याय बन चुके इस खाकी रंग का इतिहास क्या है। क्या सभी राज्यों की पुलिस खाकी रंग की वर्दी पहनती है। आखिर कौन से राज्य की पुलिस कुछ हटकर दिखती है। आइए जानते हैं...।

अंग्रेजों की देन है खाकी वर्दी 

Why police uniform colour and design is different in states, History of Khaki Colour
delhi police - फोटो : PTI
  • दरअसल पुलिसकर्मियों के लिए खाकी वर्दी की शुरुआत अंग्रेजों के शासनकाल में हुई थी। 
  • ब्रिटिश राज में जब पुलिस का गठन हुआ, तो उस समय पुलिस की वर्दी सफेद थी। मगर पुलिसकर्मियों को इसे साफ रखने में काफी दिक्कतें आने लगीं। 
  • गंदगी छिपाने के लिए पुलिसकर्मियों ने इसे अलग-अलग रंग में रंगना शुरू कर दिया। ऐसे में पुलिस अफसरों ने अपनी वर्दी के लिए एक खास किस्म की खाकी रंग की डाई का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। 
  • अफसरों को देखते हुए बाद में अन्य पुलिसकर्मियों ने भी ऐसी शुरुआत कर दी।

1847 में खाकी रंग हो गया आधिकारिक

Why police uniform colour and design is different in states, History of Khaki Colour
Delhi Police Security - फोटो : PTI
  • वर्ष 1847 में सर हैरी लम्सडेन ने आधिकारिक रूप से खाकी रंग की वर्दी को अपनाया। तभी से यह रंग पुलिस की पहचान बन गया। 
  • सर लम्सडेन के नेतृत्व में पहले यह corps of Guide नामक एक बल की वर्दी हुआ करती थी। मगर बाद में उनके कहने पर पुलिस की वर्दी का रंग भी खाकी हो गया। 
विज्ञापन
विज्ञापन

आखिर कोलकाता में क्यों नहीं बदला रंग

Why police uniform colour and design is different in states, History of Khaki Colour
kolkata police
  • पूरे देश से अलग कोलकाता की पुलिस अभी भी सफेद रंग की वर्दी पहनती है। 
  • 1845 में अंग्रेजों ने ही कोलकाता पुलिस का गठन किया था। तब देशभर की तरह उनकी वर्दी भी सफेद ही थी। 
  • दो साल बाद सर लम्सडेन ने सफेद रंग को बदलकर खाकी करने का प्रस्ताव दिया। मगर कोलकाता पुलिस ने इससे इनकार कर दिया। 
  • उनका तर्क था कि कोलकाता तटीय क्षेत्र है, इसलिए यहां नमी ज्यादा है। खाकी में गर्मी ज्यादा लगेगी जबकि सफेद वातावरण के हिसाब से ठीक है। 
पूरे पश्चिम बंगाल में सफेद वर्दी नहीं 
  • ऐसा नहीं है कि कोलकाता पुलिस की तरह पूरा पश्चिम बंगाल ही सफेद वर्दी पहनता है। 
  • सफेद वर्दी सिर्फ कोलकाता पुलिस ही पहनती है। राज्य की बाकी पुलिस अन्य राज्यों की तरह खाकी वर्दी ही पहनती है। 
विज्ञापन

कर्नाटक पुलिस : निक्कर से टी-शर्ट और ट्रैक पैंट तक

Why police uniform colour and design is different in states, History of Khaki Colour
Karnataka State Police
  • कर्नाटक में एक समय था जब पुलिसकर्मी निक्कर पहना करते थे। लेकिन अब इसकी जगह पैंट ने ले ली है। बाद में हेड कान्स्टेबल को कुर्ता और पुलिस कान्स्टेबल को शर्ट पहनने की अनुमति मिल गई। 
  • कर्नाटक में अभी भी रैंक के हिसाब से हैट बनने का नियम है। इसे ऑस्ट्रलियाई सेना को देखकर लागू किया गया था। 
  • दो साल पहले तक कर्नाटक महिला पुलिस को साड़ी पहनती होती थी, लेकिन अब इसकी जगह पैंट-शर्ट ने ले ली है। 
  • इसी तरह पिछले साल राज्य सरकार ने कॉन्स्टेबल और हेड कॉन्स्टेबल के लिए नीले रंग की टी-शर्ट और ट्रैक पैंट पहनने की अनुमति दे दी। 

 
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed