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बंगाल: मुस्लिमों के टिकट काटे, शिव मंदिर के दर्शन और चंडी पाठ, क्या हिंदुत्व की राह पर दीदी?

Wed, 10 Mar 2021 04:30 PM IST
कुमार संभव कुमार सम्भव जैन, अमर उजाला, कोलकाता
कुमार सम्भव जैन, अमर उजाला, कोलकाता Published by: कुमार संभव Updated Wed, 10 Mar 2021 04:30 PM IST
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west bengal assembly election 2021 cut Muslims cut tickets Shiva temple darshan and Chandi path mamata banerjee on the path of Hindutva bjp tmc congress left asaduddin owaisi abbas siddiqui
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी - फोटो : ANI

पश्चिम बंगाल में बात हमेशा मां, माटी और मानुष की होती थी, लेकिन इस बार 'खेला होबे' का जोर है। दरअसल, मुख्य राजनीतिक दल टीएमसी ने मुस्लिमों के टिकट काट दिए हैं तो पार्टी प्रमुख चंडी पाठ और शिव मंदिर के चक्कर लगाती नजर आ रही हैं। ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि जय श्रीराम और देवी दुर्गा के बीच उलझे पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में क्या ममता बनर्जी भी हिंदुत्व की राह पर निकल गई हैं? क्या अब्बास सिद्दीकी और असदुद्दीन ओवैसी की एंट्री से उन्हें अपना मुस्लिम वोट बैंक खिसकता नजर आ रहा है? या भाजपा को जवाब देने के लिए दीदी ने सियासत का नया सिरा पकड़ लिया है?

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नंदीग्राम में दरगाह पर चादर चढ़ातीं ममता बनर्जी। - फोटो : ANI

ममता ने घटाए मुस्लिम उम्मीदवार
गौरतलब है कि टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के मद्देनजर 291 उम्मीदवारों की सूची जारी कर चुकी हैं। इनमें 42 मुस्लिम उम्मीदवारों पर दांव खेला गया, लेकिन अहम बात यह है कि 2016 के विधानसभा चुनाव में पार्टी कुल 57 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिए थे। ऐसे में मुस्लिम प्रत्याशियों के टिकट काटने को लेकर ममता बनर्जी पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी - फोटो : PTI

सिद्दीकी-ओवैसी की एंट्री का असर
टीएमसी में मुस्लिम उम्मीदवारों के टिकटों की संख्या कम होने को अब्बास सिद्दीकी और असदुद्दीन ओवैसी की एंट्री का असर माना जा रहा है। दरअसल, पश्चिम बंगाल में कांग्रेस ने वामपंथी दलों के साथ चुनावी मैदान में ताल ठोंकी, लेकिन फुरफुरा शरीफ के पीरजादा अब्बास सिद्दीकी से भी हाथ मिलाया है। अब्बास सिद्दीकी अपने इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) के साथ चुनाव में करीब 30 सीटों पर मैदान में उतरेंगे। बता दें कि फुरफुरा शरीफ का असर बंगाल की करीब 100 सीटों पर माना जाता है। इसके अलावा असदुद्दीन ओवैसी ने भी बंगाल की 20 सीटों पर चुनाव लड़ने का एलान किया है, जिसे ममता बनर्जी के लिए मुसीबत माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि सिद्दीकी और ओवैसी का दांव सही पड़ा तो ममता के हाथों से मुस्लिम वोट बैंक खिसक सकता है।

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चंडी मंदिर में पूजा-अर्चना करतीं ममता बनर्जी। - फोटो : ANI

नंदीग्राम में दिखा दीदी का नया रंग
मुस्लिम उम्मीदवारों की संख्या कम करने के बाद नंदीग्राम में भी दीदी का नया रंग नजर आया। उन्होंने रैली को संबोधित करते हुए कहा कि मैं हिंदू परिवार से हूं और रोजाना चंडी पाठ करती हूं। उन्होंने भाजपा को चेताते हुए कहा कि मेरे साथ हिंदुत्व कार्ड न खेलें। इस दौरान दीदी ने मंच पर ही चंडी पाठ के मंत्र भी पढ़े। बता दें कि रैली को संबोधित करने के बाद ममता बनर्जी चंडी मंदिर गईं। हालांकि, उन्होंने मजार पर भी चादर चढ़ाई।

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नामांकन से पहले शिव मंदिर पहुंचीं ममता बनर्जी। - फोटो : ANI

नामांकन से पहले शिव अभिषेक
गौर करने वाली बात यह है कि नामांकन दाखिल करने से पहले भी ममता बनर्जी शिव मंदिर गईं और भोलेनाथ का अभिषेक किया। इसके अलावा दीदी ने पार्टी का मैनिफेस्टो भी शिवरात्रि के दिन जारी करने का एलान किया है। ममता का यह राजनीतिक मिजाज बंगाल की सियासत पर कैसा असर डालेगा, यह तो नतीजों से ही पता लगेगा, लेकिन इतना तय है कि 2011 और 2016 के विधानसभा चुनाव में एकतरफा जीत हासिल करने वाली ममता बनर्जी अपने राजनीतिक जीवन के सबसे बड़े मुकाबले से रूबरू हो रही हैं।

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