सबरीमाला में अयप्पा मंदिर में भगवान के सामने 10 से 50 वर्ष के आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाती और ये मामला अब सर्वोच्च न्यायालय के सामने विचाराधीन है। दिलचस्प है कि सबरीमाला एक अनूठा मंदिर है जहां हिंदुओं के अलावा ईसाइयों, मुसलमानों और यहां तक कि विदेशियों को भी प्रवेश करने की अनुमति है लेकिन रिवाज और लंबे वक्त से चली आ रही परंपरा के मुताबिक 10 से 50 वर्ष की आयु की महिलाओं को अनुमति नहीं है।
धार्मिक स्थल: कहीं महिलायें तो कहीं पुरुषों का जाना है वर्जित...क्या खत्म होंगी मान्यता?
यहां महिलायें नहीं जा सकती अंदर
केरल के शबरीमाला में बना हुआ है भगवान अय्यप्पा का मंदिर। इस मंदिर में 10 वर्ष से लेकर 50 वर्ष तक की महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी है। इस पाबंदी की वजह है मासिक चक्र। एक बार एक 35 वर्षीय महिला ने मंदिर में प्रवेश पा लिया था, तो वहां के पंडितों ने पूरे मंदिर का शुद्धीकरण करवाया था।
श्रीपद्मनाभस्वामी मंदिर में तो महिलाओं के प्रवेश को लेकर बड़ा अजीब कायदा बना हुआ है। यहां महिलाएं मंदिर परिसर में आकर पूजा कर सकती हैं, लेकिन गर्भगृह में प्रवेश नहीं कर सकती हैं। हालांकि ऐसा क्यों है, इसका जवाब मंदिर प्रबंधन के पास भी नहीं है।
पतबौसी सत्र, असम
असम के पतबौसी सत्र मंदिर काफी प्राचीन है और पिछले 500 वर्षों से स्त्रियों का प्रवेश वर्जित है। हालांकि इस बात की लिखित सूचना या जानकारी मंदिर या आसपास कहीं भी नहीं है। लेकिन एक परंपरा का अनुसरण करते हुए इसका पालन किया जा रहा है।
कार्तिकेय मंदिर, पुष्कर
राजस्थान के पुष्कर में बने कार्तिकेय मंदिर के बारे में ऐसा कहा जाता है कि मंदिर में प्रवेश करने पर महिलाओं को आशीर्वाद के स्थान पर श्राप मिलता है। कहा जाता है कि जब कार्तिकेय इस स्थान पर तपस्या कर रहे थे, तब इंद्र उनसे भयभीत हो गए थे। उन्हें भय था कि कार्तिकेय के तप से खुश होकर भगवान ब्रह्मा उन्हें इंद्र से ज्यादा शक्तियां दे देंगे। इसलिए उन्होंने कार्तिकेय के तप को भंग करने के लिए अप्सराओं को भेजा। नाराज होकर कार्तिकेय ने अप्सराओं को पत्थर का बना दिया और श्राप दिया कि जो भी स्त्री इस स्थान पर आएगी वह भी श्राप की भागी बन जाएगी। बस, तभी से यह परंपरा चली आ रही है।