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जब गिल के नाम से थर्राते थे पंजाब के दुर्दांत आतंकी, जानिए 10 मशहूर किस्से

Sat, 27 May 2017 06:52 PM IST
amarujala.com- Written by: श्रवण शुक्ला
amarujala.com- Written by: श्रवण शुक्ला Updated Sat, 27 May 2017 06:52 PM IST
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Pubjab's SuperCop KPS Gill passes away, Gill was expert in Anti-Terrorism Tactics
पंजाब के 'सुपरकॉप' KPS गिल की मौत, आतंकवाद की जड़ पर मट्ठा डालने के लिए थे मशहूर - फोटो : Getty Images
पंजाब पुलिस के डीजीपी रहते हुए आतंकवाद की कमर तोड़ने वाले केपीएस गिल की मौत हो गई। गिल को पंजाब में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद पर लगाम लगाने में सफलता मिली थी। पंजाब में वो 'सुपरकॉप' की पहचान रखते थे। जिस समय पंजाब में हिंसा चरम पर थी, उस समय गिल ने आतंकियों का सफाया किया। इस दौरान गिल पर मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप लगे। वो पुलिस सेवा के बाद हॉकी में प्रशासनिकल विवादों को लेकर भी चर्चा में रहे। वो अपनी पुलिसिया सेवा के लिए पद्मश्री से भी सम्मानित किए गए थे। आगे पढ़ें 'सुपरकॉप' की जिंदगी के 'सुपर' किस्से...

केपीएस गिल दो बार बनें पंजाब पुलिस के मुखिया

Pubjab's SuperCop KPS Gill passes away, Gill was expert in Anti-Terrorism Tactics
केपीएस गिल दो बार बनें पंजाब पुलिस के मुखिया - फोटो : Getty Images
केपीएस गिल पंजाब में दो बाद पुलिसिया महकमे के मुखिया बने। पहली बार उन्हें 1984 में पंजाब की पुलिस का जिम्मा दिया गया। साल 1988 से 1990 तक वो पंजाब पुलिस के डीजीपी रहे। इसके बाद 1991 से 1995(रिटायरमेंट तक) फिर से उन्हें डीजीपी बनाया गया। दोनों ही टर्म में वो काफी विवादित रहे। हालांकि पंजाब पुलिस को पाक प्रायोजित आतंकवाद से निजात दिलाने में उनकी अगुवाई का हर कोई कायल रहा। 

गिल ने स्वर्ण मंदिर में 'ऑपरेशन ब्लैक थंडर' चलाया

Pubjab's SuperCop KPS Gill passes away, Gill was expert in Anti-Terrorism Tactics
गिल ने स्वर्ण मंदिर में 'ऑपरेशन ब्लैक थंडर' चलाया - फोटो : Getty Images
केपीएस गिल ने बोल्ड फैसले लेने में कभी देरी नहीं की। उनकी अगुवाई में साल 1988 पंजाब पुलिस ने 'ऑपरेशन ब्लैक थंडर' के तहत स्वर्ण मंदिर में घुसकर 43 खालिस्तानी आतंकियों को मार गिराया, तो 67 लोगों ने आत्मसमर्पण किया। इस बड़े ऑपरेशन के बाद गिल ने कहा था कि वो सेना जैसी भूल दूसरी बार नहीं करना चाहते थे। इस ऑपरेशन में गुरुद्वारे ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा। वहीं, इसके उलट जब सेना ने ऑपरेशन ब्लू स्टार के तहत स्वर्ण मंदिर पर हमला बोला था, तब काफी नुकसान हुआ था। 
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केपीएस गिल ने आतंकियों के सफाए नहीं बरती नर्मी

Pubjab's SuperCop KPS Gill passes away, Gill was expert in Anti-Terrorism Tactics
केपीएस गिल ने आतंकियों के सफाए नहीं बरती नर्मी - फोटो : Getty Images
साल 1991 में जब गिल को दोबारा पंजाब पुलिस का मुखिया बनाया गया, तो सरकार ने आतंकवाद के पूरी तरह से सफाए की जिम्मेदारी उन्हें दी। केपीएस गिल के पंजाब पुलिस के मुखिया के पद पर वापस आने के समय 1991 में करीब 5000 लोगों की मौतें आतंकियों के हमलों हुई, पर 1993 तक ये आंकड़ा महज 500 का रह गया। दरअसल, इसके पीछे गिल की रणनीति थी कि सभी आतंकियों का सिर्फ सफाया हो, उन्हें गिरफ्तार कर जेल में न रखा जाए। उनकी इन्हीं नीतियों की वजह से उनपर मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप लगे, क्योंकि काफी लोग अपने घरों से गायब हो गए थे, तो कई खालिस्तानी आतंकी घरों से उठाए जाने के बाद आसपास मृत अवस्था में मिले थे।
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गिल ने करियर के शुरुआती 28 साल नॉर्थ-ईस्ट में बिताए

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गिल ने करियर के शुरुआती 28 साल नॉर्थ-ईस्ट में बिताए - फोटो : Getty Images
केपीएस गिल ने 24 साल की उम्र में पुलिस सेवा ज्वॉइन की थी। उन्होंने अपने करियर के शुरुआती 28 साल नॉर्थ-ईस्ट में बिताए। उन्होंने असम-मेघालय काडर को चुना था, ताकि वो स्वतंत्रता पूर्वक काम कर सकें। उन्होंने पंजाब इसलिए नहीं चुना, क्योंकि राजनीतिक दबावों के चलते काम करने की आजादी नहीं थी।
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