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भारतीय राजनीति की धाकड़ बेटियां, जब संभाली देश की कमान तो देखती रह गई दुनिया

Sun, 23 Sep 2018 11:30 AM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला
न्यूज डेस्क,अमर उजाला Updated Sun, 23 Sep 2018 11:30 AM IST
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powerful daughters of indian politics ,when took responsibility left world awestruck
इंदिरा गांघी
इंदु...इसी नाम से पुकारते थे देश की पहली प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को उनके माता-पिता। आजादी की लड़ाई में वानर सेना की कमान संभालने वाली नन्ही इंदु ने देश की कमान भी जब संभाली तो दुनिया में भारत की पहचान एक मजबूत राष्ट्र के तौर पर हुई। पिता पं जवाहरलाल नेहरू के बाद उन्हे प्रधानमंत्री पद के लिए स्वाभाविक तौर पर देखा जाने लगा लेकिन पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं को लगा था कि वो सिर्फ नाम की प्रधानमंत्री होंगी इसलिए 'गूंगी गुड़िया' के नाम से पुकारना शुरू कर किया। लेकिन जब इंदिरा गांधी ने ऑफिस संभाला तो उनके आत्मविश्वास,लगन नेतृत्व शक्ति और निडर कदमों ने सबको चौंका दिया। 

बेटी के तौर पर वो अपने मां-बाप से हमेशा जुड़ी रहीं और अपनी जिम्मेदारी भी निभाई। मां को टीबी की बीमारी हुई तो पिता जेल में थे तब इंदिरा ने ही मां के साथ लंदन और फिर मसूरी में इलाज के दौरान उनकी देखभाल की थी। 
  

 
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पिता के साथ इंदिरा
पिता से एक शिष्य बन अलग-अलग राष्ट्र, धर्म और जातियों के बारे में सवाल पूछती थी इंदिरा गांधी।  1928 की गर्मियां आईं तो इंदिरा मसूरी में थी और पंडित नेहरू इलाहाबाद में इस दौरान उन्होंने इंदिरा को 31 पत्र लिखे और इनमें इंदिरा के उन सवालों का जवाब देते हुए अपने पहले ही पत्र में उन्होंने लिखा- ‘जब तुम मेरे साथ रहती हो तो अक्सर मुझसे बहुत-सी बातें पूछा करती हो और मैं उनका जवाब देने की कोशिश करता हूं। लेकिन, अब, जब तुम मसूरी में हो और मैं इलाहाबाद में, हम दोनों उस तरह बातचीत नहीं कर सकते।  इसलिए मैंने इरादा किया है कि कभी-कभी तुम्हें इस दुनिया की और उन छोटे-बड़े देशों की जो इन दुनिया में हैं, छोटी-छोटी कथाएं लिखा करूं।’ 

उसी साल नवंबर में गांधी जी के कहने पर इलाहाबाद लॉ जर्नल प्रेस से वह पुस्तक ‘लेटर्स टू अ डॉटर फ्रॉम हर फादर’ के नाम से अंग्रेजी में छप गई। अपने कार्यकाल में इमरजेंसी को लेकर सबसे ज्यादा विरोध और निंदा झेलने वालीं इंदिरा गांधी को उनके साहसी निर्णय की वजह से खुद भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई ने दुर्गा की संज्ञा दी । आज भी वो देश की सबसे लोकप्रिय और प्रेरणा देने वाली बेटी हैं।

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जयललिता
तमिलनाडू की मुख्यमंत्री के तौर पर कठोर फैसलों के लिए मशहूर जयललिता को तमिलनाडु में आयरन लेडी और तमिलनाडु की मार्गरेट थैचर भी कहा जाता था। कम उम्र में मां संध्या के गुजर जाने के बाद जयललिता को पूर्व अभिनेता और नेता एमजी रामचंद्रन 1982 में राजनीति में लाए। उसी साल वह एआईएडीएमके के टिकट पर राज्यसभा के लिए मनोनीत की गईं और उसके बाद उन्होंने पीछे मुड़ कर नहीं देखा।जयललिता ने मुख्य रूप से राजनीति 1984 में शुरू की जब उस वक्त इंदिरा गांधी की हत्या हुई थी और एमजी रामचंद्रन बीमार थे। इसकी सहानुभूति पर सवार जयललिता ने एआईएडीएमके और कांग्रेस का गठबंधन कर लिया और चुनाव में कूद पड़ीं। 

2001 में वह दोबारा सत्ता में आईं तो उन्होंने लॉटरी टिकट पर पाबंदी लगा दी।  हड़ताल पर जाने की वजह से दो लाख कर्मचारियों को एक साथ नौकरी से निकाल दिया, किसानों की मुफ्त बिजली पर रोक लगा दी, राशन की दुकानों में चावल की कीमत बढ़ा दी, 5000 रुपये से ज्यादा कमाने वालों के राशन कार्ड खारिज कर दिए, बस किराया बढ़ा दिया और मंदिरों में जानवरों की बलि पर रोक लगा दी थी।

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मायावती

मायावती बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। मायावती का जन्म 15 जनवरी 1956 को नई दिल्ली में एक सरकारी कर्मचारी प्रभु दयाल के यहां हुआ था। भारतीय राजनीति में खास दब-दबा रखने वाली मायावती का पूरा नाम मायावती प्रभू दास पर लोग उन्हें बहन जी कह कर ज्यादा पुकारते हैं। मायावती के 6 भाई एवं 2 बहनें हैं। पिछड़े वर्ग से ताल्लुक रखने वाली मायावती ने बीए, बीएड और एलएलबी की डिग्री हासिल की और शिक्षक के तौर पर काम शुरू किया । सन् 1977 में कांशीराम के सम्पर्क में आने के बाद उन्होंने एक पूर्ण कालिक राजनीतिज्ञ बनने का निर्णय ले लिया। कांशीराम के संरक्षण के अन्तर्गत वे उस समय उनकी कोर टीम का हिस्सा रहीं, जब सन् 1984 में बसपा की स्थापना हुई थी। उत्तर प्रदेश की मुख्यंत्री के तौर पर लॉ एंड ऑर्डर को दुरूस्त करने के लिए उनके विरोधी भी उनकी प्रशंसा करते हैं। 

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ममता बनर्जी

ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की वर्तमान मुख्यमंत्री और राजनैतिक दल तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख हैं जिन्हे उनके समर्थक दीदी (बड़ी बहन) के नाम से संबोधित करते हैं। 5 जनवरी 1955 को कोलकाता में जन्म लेने वाली ममता केंद्र में दो बार रेल मंत्री रह चुकी हैं और उन्हें देश की पहली महिला रेल मंत्री बनने का गौरव प्राप्त है।

इसके अलावा ममता केंद्र सरकार में कोयला, मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री, युवा मामलों और खेल के साथ ही महिला व बाल विकास की राज्य मंत्री भी रह चुकी हैं। 2011 में उन्होंने पश्चिम बंगाल में 34 वर्षों से सत्ता पर काबिज वामपंथी मोर्चे का सफाया किया, जिसके बाद 2012 में प्रतिष्ठित 'टाइम' मैगजीन ने उन्हें 'विश्व के 100 प्रभावशाली' लोगों की सूची में स्थान दिया था।ममता ने इतिहास और कानून दोनो विषय में शिक्षा ली। 

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