भारतीय राजनीति की धाकड़ बेटियां, जब संभाली देश की कमान तो देखती रह गई दुनिया
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उसी साल नवंबर में गांधी जी के कहने पर इलाहाबाद लॉ जर्नल प्रेस से वह पुस्तक ‘लेटर्स टू अ डॉटर फ्रॉम हर फादर’ के नाम से अंग्रेजी में छप गई। अपने कार्यकाल में इमरजेंसी को लेकर सबसे ज्यादा विरोध और निंदा झेलने वालीं इंदिरा गांधी को उनके साहसी निर्णय की वजह से खुद भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई ने दुर्गा की संज्ञा दी । आज भी वो देश की सबसे लोकप्रिय और प्रेरणा देने वाली बेटी हैं।
2001 में वह दोबारा सत्ता में आईं तो उन्होंने लॉटरी टिकट पर पाबंदी लगा दी। हड़ताल पर जाने की वजह से दो लाख कर्मचारियों को एक साथ नौकरी से निकाल दिया, किसानों की मुफ्त बिजली पर रोक लगा दी, राशन की दुकानों में चावल की कीमत बढ़ा दी, 5000 रुपये से ज्यादा कमाने वालों के राशन कार्ड खारिज कर दिए, बस किराया बढ़ा दिया और मंदिरों में जानवरों की बलि पर रोक लगा दी थी।
मायावती बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। मायावती का जन्म 15 जनवरी 1956 को नई दिल्ली में एक सरकारी कर्मचारी प्रभु दयाल के यहां हुआ था। भारतीय राजनीति में खास दब-दबा रखने वाली मायावती का पूरा नाम मायावती प्रभू दास पर लोग उन्हें बहन जी कह कर ज्यादा पुकारते हैं। मायावती के 6 भाई एवं 2 बहनें हैं। पिछड़े वर्ग से ताल्लुक रखने वाली मायावती ने बीए, बीएड और एलएलबी की डिग्री हासिल की और शिक्षक के तौर पर काम शुरू किया । सन् 1977 में कांशीराम के सम्पर्क में आने के बाद उन्होंने एक पूर्ण कालिक राजनीतिज्ञ बनने का निर्णय ले लिया। कांशीराम के संरक्षण के अन्तर्गत वे उस समय उनकी कोर टीम का हिस्सा रहीं, जब सन् 1984 में बसपा की स्थापना हुई थी। उत्तर प्रदेश की मुख्यंत्री के तौर पर लॉ एंड ऑर्डर को दुरूस्त करने के लिए उनके विरोधी भी उनकी प्रशंसा करते हैं।
ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की वर्तमान मुख्यमंत्री और राजनैतिक दल तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख हैं जिन्हे उनके समर्थक दीदी (बड़ी बहन) के नाम से संबोधित करते हैं। 5 जनवरी 1955 को कोलकाता में जन्म लेने वाली ममता केंद्र में दो बार रेल मंत्री रह चुकी हैं और उन्हें देश की पहली महिला रेल मंत्री बनने का गौरव प्राप्त है।
इसके अलावा ममता केंद्र सरकार में कोयला, मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री, युवा मामलों और खेल के साथ ही महिला व बाल विकास की राज्य मंत्री भी रह चुकी हैं। 2011 में उन्होंने पश्चिम बंगाल में 34 वर्षों से सत्ता पर काबिज वामपंथी मोर्चे का सफाया किया, जिसके बाद 2012 में प्रतिष्ठित 'टाइम' मैगजीन ने उन्हें 'विश्व के 100 प्रभावशाली' लोगों की सूची में स्थान दिया था।ममता ने इतिहास और कानून दोनो विषय में शिक्षा ली।