गणतंत्र दिवस के दिन हजारों की संख्या में किसानों ने राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में तूफान खड़ा कर दिया। लाठी-डंडे, राष्ट्रीय ध्वज एवं किसान यूनियनों के झंडे लिए हजारों किसान ट्रैक्टरों पर सवार हो बैरियरों को तोड़ते हुए और पुलिस से भिड़ते हुए लालकिले की घेराबंदी के लिए विभिन्न सीमा बिंदुओें से राष्ट्रीय राजधानी में दाखिल हुए। लालकिले में किसान ध्वज-स्तंभ पर भी चढ़ गए। वहीं, किसान नेताओं ने इन प्रदर्शनकारियों से खुद को अलग कर लिया।
किसानों के प्रदर्शन के दौरान लाल किले में मचा बवाल, तस्वीरों में देखिए कैसे रहे हालात
एक युवक को लालकिले में ध्वज-स्तंभ पर एक त्रिकोण आकार का पीले रंग का झंडा फहराते देखा गया। इसी पर देश के स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान झंडा फहराया जाता है। हालांकि बाद में प्रदर्शनकारियों को लाल किले के परिसर से हटा दिया गया। गणतंत्र दिवस के दिन राजपथ पर देश की सैन्य क्षमता का प्रदर्शन किया जाता है। किसानों को गणतंत्र दिवस परेड के आयोजन के बाद तय मार्ग पर ट्रैक्टर परेड़ की अनुमति दी गई थी, लेकिन इन शर्तों का उल्लघंन हुआ।
कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों के बीच झड़प हुई और लाठीचार्ज किया गया। प्रदर्शनकारियों के इन समूहों में अनेक युवा थे जो मुखर और आक्रामक थे। पुलिस ने कुछ जगहों पर अशांत भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। वहीं आईटीओ पर सैकड़ों किसान पुलिसकर्मियों का लाठियां लेकर दौड़ाते और खड़ी बसों को अपने ट्रैक्टरों से टक्कर मारते दिखे। एक ट्रैक्टर के पलट जाने से एक प्रदर्शनकारी की मौत हो गई।
प्रदर्शनकारी मुगल कालीन लाल किले के परिसर में घुस गए और गुंबदों और प्राचीर पर चढ़ने का प्रयास किया। इनमें से कुछ उस ध्वज-स्तंभ पर झंडा फहराने के लिए चढ़ गए जिस पर प्रधानमंत्री प्रत्येक वर्ष स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा फहराते हैं। भीड़ बढ़ने के साथ ही तनाव भी बढ़ने लगा। पुलिस ने लाल किले से प्रदर्शनकारी किसानों को हटाने के लिए हल्का लाठीचार्ज किया। इसके साथ ही योगेंद्र यादव और राकेश टिकैत समेत कई किसान नेताओं ने किसानों से शांति बरतने की अपील की।
पुलिस द्वारा आईटीओ से खदेड़े गए प्रदर्शनकारी किसानों का एक समूह अपने ट्रैक्टर लेकर लाल किला परिसर पहुंच गया। प्रदर्शनकारी किसान और निहंग (पारंपरिक सिख योद्धा) लाल किला परिसर में घुस गए और उस ध्वज-स्तंभ पर अपना झंडा लगाते दिखे, जहां से प्रधानमंत्री 15 अगस्त को राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं। उन्होंने (प्रदर्शनकारी किसानों के समूह ने) लाल किले की कुछ गुंबदों पर भी अपने झंडे लगा दिए।