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Tsunami: समुद्री लहरों का कहर नहीं भूले लोग, 20 साल बाद भी ताजा है सुनामी की बर्बादी का दर्द; देखें तस्वीरें

Wed, 25 Dec 2024 01:13 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई Published by: बशु जैन Updated Wed, 25 Dec 2024 01:13 PM IST
सार

20 साल पहले तमिलनाडु में समुद्री लहरों ने जो कहर मचाया था, वह लोग आज भी नहीं भूले हैं। 26 दिसंबर 2004 को 6605 लोगों की जान लेनी वाली सुनामी ने जो दर्द दिया वह अब भी ताजा है। समुद्र तट से आई लहरों ने पूरे शहर और राज्य में जो उत्पात मचाया, उसने न जाने कितने परिवारों को खत्म कर दिया। तस्वीरों में देखिए 2004 में सुनामी से हुई तबाही की झलक। 

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People have not forgotten the havoc, even after 20 years the pain of tsunami destruction is fresh
तमिलनाडु में 2004 में आई सुनामी के दृश्य। - फोटो : PTI
20 साल पहले तमिलनाडु में समुद्री लहरों ने जो कहर मचाया था, वह लोग आज भी नहीं भूले हैं। 26 दिसंबर 2004 को 6605 लोगों की जान लेनी वाली सुनामी ने जो दर्द दिया वह अब भी ताजा है। समुद्र तट से आई लहरों ने पूरे शहर और राज्य में जो उत्पात मचाया, उसने न जाने कितने परिवारों को खत्म कर दिया। जिंदगियों का हिसाब लगाने में तो महीनों लग गए। 20 साल पहले आई सुनामी के चलते हुए विनाश के सदमे से तो कई लोग आज भी नहीं उबर पाए हैं। जबकि तमाम लोग ऐसे हैं, जिन्होंने मुश्किल हालात के आगे हार नहीं मानी और खुद को मजबूत रखते हुए संकट से मात दी। तस्वीरों में देखिए 2004 में सुनामी से हुई तबाही की झलक। 

 
People have not forgotten the havoc, even after 20 years the pain of tsunami destruction is fresh
तमिलनाडु में 2004 में आई सुनामी के दृश्य। - फोटो : PTI
मेरा सब कुछ खो गया था : सौम्या
सुनामी के वक्त नागापट्टिनम जिले में बचाई गईं चार साल की सौम्या आज एक बच्ची की मां बन चुकी हैं। सौम्या बताती हैं कि सुनामी में उनका सब कुछ खत्म हो गया। आपदा के बाद उनको एक आईएएस अधिकारी डॉ. जे राधाकृष्णन ने गोद लिया। सौम्या ने अर्थशास्त्र में बीए किया है। उनका विवाह 2022 में तकनीशियन के सुभाष के साथ हुआ। वह इस साल अक्तूबर में एक बच्ची की मां बनीं। वर्तमान में सहकारिता विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राधाकृष्णन ने कहा कि सौम्या को बड़ा होते देखना बहुत ही खुशी की बात है। हमारा परिवार धन्य महसूस कर रहा है।
 
People have not forgotten the havoc, even after 20 years the pain of tsunami destruction is fresh
तमिलनाडु में 2004 में आई सुनामी के दृश्य। - फोटो : PTI
पालन-पोषण गृह में मनाया गया जश्न
सुनामी में अपने परिवार को खो देने वाले बच्चों को आपदा के बाद स्थापित अन्नाई सत्या सरकारी बाल गृह में रखा गया था। यहां उनका पालन-पोषण किया गया। सुनामी में मरने वालों की बरसी पर बाल गृह में जश्न मनाया गया। 
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People have not forgotten the havoc, even after 20 years the pain of tsunami destruction is fresh
तमिलनाडु में 2004 में आई सुनामी के दृश्य। - फोटो : PTI

यहां सौम्या की मुलाकात मीना से हुई। सौम्या और मीना के साथ ही 40 बच्चे अन्नाई सत्या सरकारी बाल गृह में पले-बढ़े हैं। आपदा में ही अपनों को खोने वाली तमिलारसी विजयबालन अब 35 वर्ष की हो गईं हैं और वे बाल गृह में शिक्षक हैं। यहां अब 100 बच्चों की देखभाल की जाती है। यहां अब दुर्व्यवहार और बाल विवाह के पीड़ित बच्चे रहते हैं। 

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People have not forgotten the havoc, even after 20 years the pain of tsunami destruction is fresh
तमिलनाडु में 2004 में आई सुनामी के दृश्य। - फोटो : PTI
अफसरों ने की सराहना
बाल गृह में आईएएस अधिकारी डॉ. जे राधाकृष्णन, उनकी पत्नी कृतिका, पुत्र डॉ. आर अरविंद तथा नागपट्टिनम जिला कलेक्टर पी आकाश भी पहुंचे। उन्होंने बच्चों को आशीर्वाद और उपहार दिया। राधाकृष्णन और उनके परिवार के अलावा कलेक्टर आकाश, जिला बाल संरक्षण अधिकारी वी एझिलारसी और किशोर न्याय बोर्ड के सदस्य एम मलारविझी ने भी जीवित बचे लोगों की सराहना की।
 
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