20 साल पहले तमिलनाडु में समुद्री लहरों ने जो कहर मचाया था, वह लोग आज भी नहीं भूले हैं। 26 दिसंबर 2004 को 6605 लोगों की जान लेनी वाली सुनामी ने जो दर्द दिया वह अब भी ताजा है। समुद्र तट से आई लहरों ने पूरे शहर और राज्य में जो उत्पात मचाया, उसने न जाने कितने परिवारों को खत्म कर दिया। जिंदगियों का हिसाब लगाने में तो महीनों लग गए। 20 साल पहले आई सुनामी के चलते हुए विनाश के सदमे से तो कई लोग आज भी नहीं उबर पाए हैं। जबकि तमाम लोग ऐसे हैं, जिन्होंने मुश्किल हालात के आगे हार नहीं मानी और खुद को मजबूत रखते हुए संकट से मात दी। तस्वीरों में देखिए 2004 में सुनामी से हुई तबाही की झलक।
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तमिलनाडु में 2004 में आई सुनामी के दृश्य।
- फोटो : PTI
मेरा सब कुछ खो गया था : सौम्या
सुनामी के वक्त नागापट्टिनम जिले में बचाई गईं चार साल की सौम्या आज एक बच्ची की मां बन चुकी हैं। सौम्या बताती हैं कि सुनामी में उनका सब कुछ खत्म हो गया। आपदा के बाद उनको एक आईएएस अधिकारी डॉ. जे राधाकृष्णन ने गोद लिया। सौम्या ने अर्थशास्त्र में बीए किया है। उनका विवाह 2022 में तकनीशियन के सुभाष के साथ हुआ। वह इस साल अक्तूबर में एक बच्ची की मां बनीं। वर्तमान में सहकारिता विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राधाकृष्णन ने कहा कि सौम्या को बड़ा होते देखना बहुत ही खुशी की बात है। हमारा परिवार धन्य महसूस कर रहा है।
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तमिलनाडु में 2004 में आई सुनामी के दृश्य।
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पालन-पोषण गृह में मनाया गया जश्न
सुनामी में अपने परिवार को खो देने वाले बच्चों को आपदा के बाद स्थापित अन्नाई सत्या सरकारी बाल गृह में रखा गया था। यहां उनका पालन-पोषण किया गया। सुनामी में मरने वालों की बरसी पर बाल गृह में जश्न मनाया गया।
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तमिलनाडु में 2004 में आई सुनामी के दृश्य।
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यहां सौम्या की मुलाकात मीना से हुई। सौम्या और मीना के साथ ही 40 बच्चे अन्नाई सत्या सरकारी बाल गृह में पले-बढ़े हैं। आपदा में ही अपनों को खोने वाली तमिलारसी विजयबालन अब 35 वर्ष की हो गईं हैं और वे बाल गृह में शिक्षक हैं। यहां अब 100 बच्चों की देखभाल की जाती है। यहां अब दुर्व्यवहार और बाल विवाह के पीड़ित बच्चे रहते हैं।
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तमिलनाडु में 2004 में आई सुनामी के दृश्य।
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अफसरों ने की सराहना
बाल गृह में आईएएस अधिकारी डॉ. जे राधाकृष्णन, उनकी पत्नी कृतिका, पुत्र डॉ. आर अरविंद तथा नागपट्टिनम जिला कलेक्टर पी आकाश भी पहुंचे। उन्होंने बच्चों को आशीर्वाद और उपहार दिया। राधाकृष्णन और उनके परिवार के अलावा कलेक्टर आकाश, जिला बाल संरक्षण अधिकारी वी एझिलारसी और किशोर न्याय बोर्ड के सदस्य एम मलारविझी ने भी जीवित बचे लोगों की सराहना की।