मथुरा में पुलिस और कथित सत्याग्रहियों के बीच हुए बवाल का सूत्रधार रामवृक्ष यादव शुरू से ही बगावती तेवरों का व्यक्ति रहा है। इन्हीं तेवरों के कारण उसने पिछले दस सालों से अपने घर और गांव से नाता तोड़ रखा था।
बताया जाता है कि 1976 में वह इमरजेंसी के दौरान जेल भी गया था। इसके बाद जयगुरुदेव के संगठन से जुड़कर उसने लोकतंत्र रक्षक सेनानी नाम से अलग संगठन भी बनाया। गांव वाले बताते हैं कि बीस साल पहले उसने गाजीपुर से लोकसभा और विधानसभा का चुनाव भी लड़ा था लेकिन बुरी तरह हार मिली थी।
रामवृक्ष मूल रूप से गाजीपुर के मरदह थाना क्षेत्र के रायपुर बाघपुर की मटिया बस्ती का रहने वाला है। गांव में उसके भाई उदय प्रकाश का परिवार रहता है जो फौज में नौकरी करते हैं। रामवृक्ष के नाम पर गांव में थोड़ी सी जमीन और एक कुटिया है जो फिलहाल खाली पड़ी है।
घरवालों से अलग रहकर वह अपने बेटों-बेटियों और पत्नी के साथ पिछले दो साल से मथुरा के जवाहर बाग में ही रह रहा था। उसका बड़ा बेटा राजनारायण और छोटी बेटी उसके साथ ही रहती है। एक बेटा दिल्ली में रहकर तैयारी कर रहा है तो बड़ी बेटी की शादी कर दी है।
रामवृक्ष के बारे में एक जानकारी ये भी मिली है कि मथुरा से पहले वह बरेली और कानपुर में भी बवाल करा चुका है। बरेली में पुलिस ने उसे खदेड़कर भगा दिया था तो कानपुर में आम लोगों ने ही उसे जमकर पीटा था। उसके बाद उसने मथुरा में आकर डेरा डाल लिया।