खगोलीय घटनाओं को वैज्ञानिक नजरिए से देखने-समझने का अभ्यास करने वाले लोगों के लिए चंद्र ग्रहण धर्म से इतर भी गूढ़ अर्थ रखता है। आज साल 2025 के अंतिम चंद्र ग्रहण के दौरान देशभर में 'ब्लड मून' देखा गया। लगभग तीन साढ़े घंटे से अधिक समय तक चांद पर धरती की छाया पड़ती रही। चंद्रग्रहण की पूरी अवधि में पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच रही और चांद पर सूर्य का प्रकाश सीधे नहीं पड़ा। देशभर से इस खगोलीय घटना की तस्वीरें सामने आई हैं। दिल्ली-एनसीआर, लखनऊ, गुवाहाटी, तिरुवनंतपुरम और चेन्नई जैसे शहरों से चांद और 'ब्लड मून' की अलग-अलग छवियां सामने आईं।
ब्लड मून यानी सुर्ख लाल चंद्रमा की चर्चा ज्योतिष, विज्ञान और धार्मिक क्षेत्र तक
चंद्रग्रहण भारत के अलावा यूएई, चीन और पाकिस्तान से भी देखा गया। लाखों लोग रविवार को पूर्ण चंद्रग्रहण की दुर्लभ खगोलीय घटना के साक्षी बने। इस साल का दूसरा और आखिरी चंद्रग्रहण रात 9:57 बजे से 1:26 बजे तक रहा। वैज्ञानिकों ने बताया, रात 11:01 से 12:23 बजे तक 82 मिनट पूर्ण चंद्रग्रहण रहा। इस दौरान ब्लड मून यानी चंद्रमा सुर्ख लाल दिखा। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, सूतक के कारण बद्रीनाथ, केदारनाथ समेत सभी मंदिरों के कपाट बंद रहे। देखिए ब्लड मून यानी रक्त जैसी लालिमा लिए चंद्रमा की चुनिंदा तस्वीरें
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चंद्र ग्रहण 2025 के दौरान चांद की अलग-अलग छवियां
- फोटो : पीटीआई
भारत के अलावा इन देशों में दिखा चंद्र ग्रहण
खबरों के मुताबिक दुनिया के लगभग 77 फीसदी हिस्से में चंद्रग्रहण देखा गया। भारत समेत ब्रिटेन, फ्रांस, दक्षिण अफ्रीका, तुर्किये जैसे देशों में भी चंद्रग्रहण देखा गया। लाखों खगोल विज्ञान प्रेमियों ने चांद पर पड़ती धरती की छाया को देखा और सौरमंडल की अनोखी घटना के साक्षी बने।
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चंद्र ग्रहण 2025 के दौरान चांद की अलग-अलग छवियां
- फोटो : पीटीआई
चांद को कई मिनटों तक निहारते रहे लोग
भारत में करीब साढ़े तीन घंटे बाद चांद धरती की छाया से मुक्त हुआ। वहीं थाईलैंड, चीन, हांगकांग, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में लोगों ने टेलिस्कोप और अन्य वैज्ञानिक उपकरणों की मदद से चांद को कई मिनटों तक निहारते रहे।
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चंद्र ग्रहण 2025 के दौरान चांद की अलग-अलग छवियां
- फोटो : पीटीआई
दुनिया के इन हिस्सों में सबसे खास अनुभव
वैज्ञानिकों के मुताबिक एशिया और ऑस्ट्रेलिया से देखने वालों के लिए यह सबसे अच्छा अनुभव रहा होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि चंद्र ग्रहण चंद्रमा के पेरिगी पर पहुंचने से ठीक 2.7 दिन पहले होने के कारण खास रहा। इस कारण चांद अपने सामान्य आकार से थोड़ा बड़ा दिखाई दिया। पेरिगी कक्षा की उस बिंदु को कहते हैं जहां पहुंचने के बाद चंद्रमा पृथ्वी के सबसे करीब आ जाता है।
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चंद्र ग्रहण 2025 के दौरान चांद की अलग-अलग छवियां
- फोटो : पीटीआई
अनोखे लम्हे को कैमरे में कैद करते दिखे लोग
खगोल विज्ञान के जानकारों के मुताबिक यूरोप और अफ्रीका में चंद्रोदय के समय चंद्र ग्रहण देखा गया। इस दौरान क्षितिज का अद्भुत दृश्य दिखाई दिया। फोटोग्राफी के शौकीन लोगों के लिए ये अवसर बेहद खास साबित हुआ।