बोफोर्स से धनुष तक जानिए भारतीय सेना के तोपखाने की कहानी
80 के दशक से जूझ रही है सेना की आर्टिलरी यूनिट
भारतीय सेना को 155 एमएम की 400 होवित्जर तोप देने के लिए 24 मार्च 1986 को भारत सरकार ने स्वीडन की हथियार निर्माता कंपनी एबी बोफोर्स से सौदा किया था। 1,437 करोड़ रुपये के इस सौदे में यह शर्त भी थी कि एबी बोफोर्स तकनीक का हस्तांतरण करेगी और भारतीय रक्षा कंपनियां देश में बोफोर्स तोप बनाने में सक्षम होगी।
लेकिन एबी बोफोर्स पर यह सौदा हथियाने के लिए 80 लाख डालर की दलाली चुकाने का भी आरोप लगा। यह देश का दुर्भाग्य रहा कि 1986 के बाद से करीब तीन दशक तक भारतीय सेना को कोई दूसरी तोप नहीं मिल पाई। कोई नया तोप सोदा सिरे नहीं चढ़ पाया। जबकि इस दौरान कई बार सेल्फ प्रोपेल्ड, टोड समेत 155 एमएम और 52 कैलिबर की निविदाएं निकली, ट्रायल हुए और सौदा पूरा होने के पहले भारत सरकार ने तोप सौदे की प्रक्रिया को रद्द कर दिया।
बाई एंड मेक प्रोग्राम भी नहीं चढ़ पाया सिरे
लेकिन कारगिल के बाद बनी कारगिल समीक्षा समिति ने भारतीय तोपखाने की गिरती क्षमता को संज्ञान लिया। भारत सरकार और रक्षा मंत्रालय ने 2002-03 में बाई एंड मेक प्रोग्राम के तहत 400ऋ1100(तकनीकी हस्तांतरण) 155 एमएम की तोपें लेने के लिए अंतरराष्ट्रीय कंपनियों से आवेदन मांगे।
2007 में दोबारा रीक्वेस्ट फॉर प्रपोजल मंगाए गए। तीसरी बार फिर 2011 में यही प्रक्रिया दोहराई गई। तीसरी बार के प्रपोजल में बीएई ने भाग नहीं लिया और औईएम(नेक्सटर) एलबिट ने हिस्सा लिया। 2015 में संपन्न हुए ट्रायल में दोनों ही गन फेल कर गई। इसके बाद ट्रायल और रीट्रायल हुए। 2018 में निविदा खुलने के बाद एलबिट की सोल्टम एल1 आ गई, लेकिन अभी तक यह सौदा किसी अंजाम तक नहीं पहुंचा है।
भारत सरकार ने लिया बोफोर्स तोप बनाने का निर्णय
नतीजन एबी बोफोर्स से 80 के दशक में सौदे के साथ मिली तकनीकी के जरिए और कुछ तकनीकी विकास को जोड़कर आर्डिनेंस फैक्टी बोर्ड ने 400 तोप तैयार करने का निर्णय लिया। अब ये धनुष तोप सेना में शामिल होना शुरू हो गई है। नये पैरामीटर में यह बोफोर्स से भी ज्यादा कारगर है।
मेक इन इंडिया: आया डीआरडीओ, बनाई 155एमएम, 52 कैलीबर की नई तोप
इसका आर्क ऑफ फायर न्यूनतम -5 और अधिकतम 75 डिग्री, आर्क ऑफ ट्रेवर्स 60 डिग्री और मार करने की क्षमता करीब 35 किमी(बीटी), 45 किमी(बीबी) तक है। जबकि अंतरराष्ट्रीय कंपनियों की तोपें इसकी तुलना में काफी पीछे है। यहां तक कि निशाने पर मार करने के मामले में भी अच्छे नतीजे आ रहे हैं।