{"_id":"6aa706f3c8670a300a0da3c5","slug":"brics-summit-2026-foreign-journalists-praise-indian-hospitality-2026-09-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"'बेहतरीन मीडिया किट और सबसे स्वादिष्ट खाना': भारतीय मेहमाननवाजी के मुरीद हुए जर्मन-रूसी पत्रकार; क्या बोले?","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
'बेहतरीन मीडिया किट और सबसे स्वादिष्ट खाना': भारतीय मेहमाननवाजी के मुरीद हुए जर्मन-रूसी पत्रकार; क्या बोले?
Mon, 14 Sep 2026 01:56 AM IST
राकेश कुमार
आईएएनएस, नई दिल्ली।
आईएएनएस, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Mon, 14 Sep 2026 01:56 AM IST
सार
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत की मेजबानी, मीडिया किट और खाने ने विदेशी पत्रकारों का ध्यान खींचा। जर्मनी के पत्रकार बेन ने मीडिया किट और भारतीय भोजन की तारीफ की, जबकि रूसी पत्रकार अनास्तासिया ने खाने में भारत की सांस्कृतिक विविधता देखी। सम्मेलन में भारत के चीन और रूस के साथ व्यापार घाटे तथा वैश्विक व्यापार नियमों पर भी चर्चा हुई।
विज्ञापन
विदेशी पत्रकार
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 में भारत की मेजबानी और व्यवस्थाओं की विदेशी पत्रकारों ने जमकर तारीफ की। जर्मनी के पत्रकार बेन ने बताया कि यह भारत का उनका पहला दौरा है और वह चौथी बार ब्रिक्स शिखर सम्मेलन कवर कर रहे हैं। उनके मुताबिक, इस बार मिली मीडिया किट अब तक की सबसे अच्छी थी। वहीं रूसी पत्रकार अनास्तासिया गोल्याकोवा ने मीडिया सेंटर में परोसे गए भारतीय खाने को भारत की संस्कृति और विविधता का प्रतीक बताया।
मीडिया किट में ऐसा क्या था?
जर्मन पत्रकार बेन के मुताबिक, किट में अच्छा बैकपैक, भारतीय शाकाहारी स्नैक्स, कॉफी मग, स्कार्फ, छोटा बैग और कॉफी पाउडर था। रूसी पत्रकार अनास्तासिया को भी बैकपैक में भारतीय खासियतों से जुड़ी चीजें देखकर खुशी हुई। इसमें नमकीन स्नैक्स, चाय और शॉल शामिल थे।
भारतीय खाने को लेकर क्या बोले जर्मन पत्रकार?
बेन ने भारतीय खाने और चाय की तारीफ करते हुए कहा कि उन्हें अब तक का अनुभव बहुत अच्छा रहा। दोस्तों ने भारत आने से पहले उन्हें सलाद को लेकर सावधान रहने की सलाह दी थी, लेकिन उन्हें कोई परेशानी नहीं हुई। उन्होंने कहा कि बर्लिन और बैंकॉक जैसे शहरों में भी भारतीय रेस्तरां हैं और वह भारतीय खाने से परिचित हैं। उनके मुताबिक, यहां मिला उत्तर भारतीय खाना स्वादिष्ट, स्वस्थ, कम वसायुक्त और ज्यादा मीठा नहीं था।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें: चीन में शहर-शहर बारिश का कहर: हैनान प्रांत से 31 हजार से ज्यादा लोगों का रेस्क्यू; अभी कैसे हैं हालात?
क्या आयोजन में कोई कमी भी लगी?
बेन ने मीडिया सेंटर की व्यवस्था को बहुत अच्छा बताया और कहा कि भोजन भी उत्कृष्ट था। हालांकि, उन्होंने वाईफाई में सुधार की गुंजाइश बताई। इसके अलावा उन्होंने भारत में बिताए दो दिनों के अनुभव को अच्छा बताया।
रूसी पत्रकार को खाने में क्या खास लगा?
अनास्तासिया गोल्याकोवा ने कहा कि भारत की राष्ट्रीय संस्कृति उन्हें रसोई में दिखाई दी। शुरुआत में उनके लिए भारतीय व्यंजनों के पारंपरिक नाम समझना आसान नहीं था, लेकिन भारतीय सहकर्मियों ने उन्हें बताया कि भोजन में भारत के अलग-अलग क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व किया गया है। उन्होंने कहा कि आयोजन सिर्फ दो दिनों का है और उनकी इच्छा थी कि यह कम से कम तीन दिन और चलता। उन्होंने भविष्य में भारत के दूसरे कार्यक्रमों को कवर करने लौटने की उम्मीद जताई।
ब्रिक्स में व्यापार का मुद्दा क्यों अहम रहा?
अर्थशास्त्री वेद जैन ने कहा कि ब्रिक्स का मूल उद्देश्य उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक सहयोग और विकास था। उन्होंने भारत के चीन और रूस के साथ व्यापार घाटे का जिक्र किया। उनके मुताबिक, चीन के साथ फार्मास्युटिकल, कृषि और समुद्री उत्पादों पर गैर-व्यापारिक बाधाएं हटाने पर चर्चा हुई है, जिससे भारत का निर्यात बढ़ सकता है। उन्होंने एकतरफा टैरिफ के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाया और कहा कि वैश्विक व्यापार के लिए अंतरराष्ट्रीय नियम होने चाहिए।
विज्ञापन
मीडिया किट में ऐसा क्या था?
जर्मन पत्रकार बेन के मुताबिक, किट में अच्छा बैकपैक, भारतीय शाकाहारी स्नैक्स, कॉफी मग, स्कार्फ, छोटा बैग और कॉफी पाउडर था। रूसी पत्रकार अनास्तासिया को भी बैकपैक में भारतीय खासियतों से जुड़ी चीजें देखकर खुशी हुई। इसमें नमकीन स्नैक्स, चाय और शॉल शामिल थे।
विज्ञापन
भारतीय खाने को लेकर क्या बोले जर्मन पत्रकार?
बेन ने भारतीय खाने और चाय की तारीफ करते हुए कहा कि उन्हें अब तक का अनुभव बहुत अच्छा रहा। दोस्तों ने भारत आने से पहले उन्हें सलाद को लेकर सावधान रहने की सलाह दी थी, लेकिन उन्हें कोई परेशानी नहीं हुई। उन्होंने कहा कि बर्लिन और बैंकॉक जैसे शहरों में भी भारतीय रेस्तरां हैं और वह भारतीय खाने से परिचित हैं। उनके मुताबिक, यहां मिला उत्तर भारतीय खाना स्वादिष्ट, स्वस्थ, कम वसायुक्त और ज्यादा मीठा नहीं था।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें: चीन में शहर-शहर बारिश का कहर: हैनान प्रांत से 31 हजार से ज्यादा लोगों का रेस्क्यू; अभी कैसे हैं हालात?
क्या आयोजन में कोई कमी भी लगी?
बेन ने मीडिया सेंटर की व्यवस्था को बहुत अच्छा बताया और कहा कि भोजन भी उत्कृष्ट था। हालांकि, उन्होंने वाईफाई में सुधार की गुंजाइश बताई। इसके अलावा उन्होंने भारत में बिताए दो दिनों के अनुभव को अच्छा बताया।
रूसी पत्रकार को खाने में क्या खास लगा?
अनास्तासिया गोल्याकोवा ने कहा कि भारत की राष्ट्रीय संस्कृति उन्हें रसोई में दिखाई दी। शुरुआत में उनके लिए भारतीय व्यंजनों के पारंपरिक नाम समझना आसान नहीं था, लेकिन भारतीय सहकर्मियों ने उन्हें बताया कि भोजन में भारत के अलग-अलग क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व किया गया है। उन्होंने कहा कि आयोजन सिर्फ दो दिनों का है और उनकी इच्छा थी कि यह कम से कम तीन दिन और चलता। उन्होंने भविष्य में भारत के दूसरे कार्यक्रमों को कवर करने लौटने की उम्मीद जताई।
ब्रिक्स में व्यापार का मुद्दा क्यों अहम रहा?
अर्थशास्त्री वेद जैन ने कहा कि ब्रिक्स का मूल उद्देश्य उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक सहयोग और विकास था। उन्होंने भारत के चीन और रूस के साथ व्यापार घाटे का जिक्र किया। उनके मुताबिक, चीन के साथ फार्मास्युटिकल, कृषि और समुद्री उत्पादों पर गैर-व्यापारिक बाधाएं हटाने पर चर्चा हुई है, जिससे भारत का निर्यात बढ़ सकता है। उन्होंने एकतरफा टैरिफ के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाया और कहा कि वैश्विक व्यापार के लिए अंतरराष्ट्रीय नियम होने चाहिए।