{"_id":"6aa6d9f88eb07b70d80a8008","slug":"dmk-a-raja-remark-r-nirmal-kumar-stalin-misa-detention-controversy-2026-09-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"मंत्री निर्मल कुमार पर टिप्पणी को लेकर घिरे ए. राजा: डीएमके ने जताई नाराजगी, बयान लिया वापस; लेकिन दी चेतावनी","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
मंत्री निर्मल कुमार पर टिप्पणी को लेकर घिरे ए. राजा: डीएमके ने जताई नाराजगी, बयान लिया वापस; लेकिन दी चेतावनी
Sun, 13 Sep 2026 10:44 PM IST
देवेश त्रिपाठी
पीटीआई, चेन्नई
पीटीआई, चेन्नई
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Sun, 13 Sep 2026 10:44 PM IST
सार
तमिलनाडु में डीएमके नेता ए राजा की कानून मंत्री आर. निर्मल कुमार पर की गई व्यक्तिगत टिप्पणी को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। यह मामला उस बयान के बाद सामने आया, जिसमें मंत्री ने स्टालिन के आपातकाल के दौरान मीसा के तहत जेल जाने के दावे पर आधिकारिक रिकॉर्ड होने पर सवाल उठाया था।
विज्ञापन
डीएमके नेता ए राजा
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
डीएमके के उप महासचिव ए. राजा की कानून मंत्री आर. निर्मल कुमार पर की गई तीखी व्यक्तिगत टिप्पणी को लेकर रविवार को पार्टी नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई। विवाद बढ़ने के बाद राजा ने भी अपनी टिप्पणी पर खेद जताया और कहा कि उन्हें अपने शब्द वापस लेने में कोई हिचक नहीं है।
विवाद की शुरुआत सात सितंबर को हुई, जब कुमार ने कहा था कि ऐसा कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं है, जिससे यह पता चले कि डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन को आपातकाल के दौरान कड़े मीसा कानून के तहत जेल भेजा गया था। इस बयान पर डीएमके ने विरोध जताया और शनिवार को राज्यव्यापी प्रदर्शन किया।
डीएमके ने विजय सरकार के खिलाफ किया प्रदर्शन
डीएमके का प्रदर्शन मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय द्वारा करुणानिधि और स्टालिन के नेतृत्व वाली डीएमके सरकारों के दौरान भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़े बयानों के विरोध में भी था। इसके अलावा, स्टालिन को 1976 में आंतरिक सुरक्षा कानून (मीसा) के तहत जेल भेजे जाने को लेकर मंत्री के बयान के खिलाफ भी प्रदर्शन किया गया।
विज्ञापन
सीएम विजय के किस बयान से मचा था विवाद?
12 सितंबर को कुमार ने इस मुद्दे पर फिर बयान दिया। उन्होंने स्टालिन से आधिकारिक हिरासत आदेश की प्रति पेश करने की चुनौती दी और इस दावे पर सवाल उठाया कि आपातकाल के दौरान 1975 से 1977 के बीच उन्हें मीसा के तहत जेल भेजा गया था। कुमार ने कुछ दिन पहले कहा था कि तत्कालीन केंद्र की कांग्रेस नीत सरकार की ओर से आपातकाल लगाए जाने के बाद घोषित 20 सूत्री कार्यक्रम और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बारे में की गई टिप्पणियों के बाद स्टालिन को गिरफ्तार किया गया था।
इसी पृष्ठभूमि में डीएमके के प्रदर्शन के दौरान वरिष्ठ नेता ए राजा ने कुमार पर तीखी व्यक्तिगत टिप्पणी की। इस टिप्पणी का सार मंत्री की मां का अपमान करने वाला था। राजा की टिप्पणी सोशल मीडिया पर तेजी से फैलने के बाद इसकी कड़ी निंदा हुई।
विवाद पर डीएमके सांसद से मिली क्या सलाह?
डीएमके सांसद और पार्टी की उप महासचिव कनिमोझी ने राजा की टिप्पणी का सीधे जिक्र किए बिना तमिल के प्रसिद्ध ग्रंथ 'तिरुक्कुरल' का एक दोहा साझा किया। इसमें 'अपनी जुबान पर नियंत्रण न रखने' के प्रति चेताया गया है और कहा गया है कि ऐसा न करने पर व्यक्ति मुश्किल में पड़ सकता है।
माकपा के प्रदेश सचिव पी. षनमुगम ने भी राजा के भाषण को निंदनीय बताया। उन्होंने कहा, "यह असहनीय है कि डीएमके के कुछ नेता अपने भाषणों में लगातार महिलाओं को अपमानित करते हैं और पार्टी कार्यकर्ता इसे सुनकर उनका उत्साह बढ़ाते हैं।" वामपंथी नेता ने कहा कि कुमार के भाषण की आलोचना की जा सकती है, लेकिन उन्होंने सवाल किया, "जब मंत्री कुमार की मां का अपमान किया गया तो डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन मूकदर्शक कैसे रह सकते हैं।"
उन्होंने कहा कि महिलाओं का अपमान करने वाला कोई भी व्यक्ति हो, संबंधित पार्टी नेतृत्व को आगे आकर उसकी निंदा करनी चाहिए और उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करनी चाहिए। शनमुगम ने कहा, "डीएमके के कुछ सदस्य लगातार मर्यादा का उल्लंघन कर रहे हैं। मुझे उम्मीद है कि डीएमके अध्यक्ष अनुशासन कायम करने की अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे।"
ए. राजा ने वापस लिया बयान, लेकिन दी क्या चेतावनी?
राजा ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कुमार का नाम लिए बिना कहा कि उन्हें "सवाल करने" पर भी खेद है। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि स्टालिन के बलिदानों को जानबूझकर और बार-बार कमतर बताया गया तथा उन्हें "झूठ" करार दिया गया। राजा ने कहा कि वह भावनाओं में बह गए थे और कुमार के बयान से हुई "पीड़ा" को व्यक्त करने के लिए उन्होंने वह टिप्पणी की थी।
राजा ने कहा, "मुझे अपने शब्द वापस लेने में कोई हिचक नहीं है।" हालांकि, उन्होंने कुमार को चेतावनी देते हुए यह भी कहा, "अगर आप नहीं बदलेंगे, तो आपको सुधार दिया जाएगा।"
विज्ञापन
विवाद की शुरुआत सात सितंबर को हुई, जब कुमार ने कहा था कि ऐसा कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं है, जिससे यह पता चले कि डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन को आपातकाल के दौरान कड़े मीसा कानून के तहत जेल भेजा गया था। इस बयान पर डीएमके ने विरोध जताया और शनिवार को राज्यव्यापी प्रदर्शन किया।
विज्ञापन
डीएमके ने विजय सरकार के खिलाफ किया प्रदर्शन
डीएमके का प्रदर्शन मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय द्वारा करुणानिधि और स्टालिन के नेतृत्व वाली डीएमके सरकारों के दौरान भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़े बयानों के विरोध में भी था। इसके अलावा, स्टालिन को 1976 में आंतरिक सुरक्षा कानून (मीसा) के तहत जेल भेजे जाने को लेकर मंत्री के बयान के खिलाफ भी प्रदर्शन किया गया।
विज्ञापन
सीएम विजय के किस बयान से मचा था विवाद?
12 सितंबर को कुमार ने इस मुद्दे पर फिर बयान दिया। उन्होंने स्टालिन से आधिकारिक हिरासत आदेश की प्रति पेश करने की चुनौती दी और इस दावे पर सवाल उठाया कि आपातकाल के दौरान 1975 से 1977 के बीच उन्हें मीसा के तहत जेल भेजा गया था। कुमार ने कुछ दिन पहले कहा था कि तत्कालीन केंद्र की कांग्रेस नीत सरकार की ओर से आपातकाल लगाए जाने के बाद घोषित 20 सूत्री कार्यक्रम और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बारे में की गई टिप्पणियों के बाद स्टालिन को गिरफ्तार किया गया था।
इसी पृष्ठभूमि में डीएमके के प्रदर्शन के दौरान वरिष्ठ नेता ए राजा ने कुमार पर तीखी व्यक्तिगत टिप्पणी की। इस टिप्पणी का सार मंत्री की मां का अपमान करने वाला था। राजा की टिप्पणी सोशल मीडिया पर तेजी से फैलने के बाद इसकी कड़ी निंदा हुई।
विवाद पर डीएमके सांसद से मिली क्या सलाह?
डीएमके सांसद और पार्टी की उप महासचिव कनिमोझी ने राजा की टिप्पणी का सीधे जिक्र किए बिना तमिल के प्रसिद्ध ग्रंथ 'तिरुक्कुरल' का एक दोहा साझा किया। इसमें 'अपनी जुबान पर नियंत्रण न रखने' के प्रति चेताया गया है और कहा गया है कि ऐसा न करने पर व्यक्ति मुश्किल में पड़ सकता है।
माकपा के प्रदेश सचिव पी. षनमुगम ने भी राजा के भाषण को निंदनीय बताया। उन्होंने कहा, "यह असहनीय है कि डीएमके के कुछ नेता अपने भाषणों में लगातार महिलाओं को अपमानित करते हैं और पार्टी कार्यकर्ता इसे सुनकर उनका उत्साह बढ़ाते हैं।" वामपंथी नेता ने कहा कि कुमार के भाषण की आलोचना की जा सकती है, लेकिन उन्होंने सवाल किया, "जब मंत्री कुमार की मां का अपमान किया गया तो डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन मूकदर्शक कैसे रह सकते हैं।"
उन्होंने कहा कि महिलाओं का अपमान करने वाला कोई भी व्यक्ति हो, संबंधित पार्टी नेतृत्व को आगे आकर उसकी निंदा करनी चाहिए और उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करनी चाहिए। शनमुगम ने कहा, "डीएमके के कुछ सदस्य लगातार मर्यादा का उल्लंघन कर रहे हैं। मुझे उम्मीद है कि डीएमके अध्यक्ष अनुशासन कायम करने की अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे।"
ए. राजा ने वापस लिया बयान, लेकिन दी क्या चेतावनी?
राजा ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कुमार का नाम लिए बिना कहा कि उन्हें "सवाल करने" पर भी खेद है। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि स्टालिन के बलिदानों को जानबूझकर और बार-बार कमतर बताया गया तथा उन्हें "झूठ" करार दिया गया। राजा ने कहा कि वह भावनाओं में बह गए थे और कुमार के बयान से हुई "पीड़ा" को व्यक्त करने के लिए उन्होंने वह टिप्पणी की थी।
राजा ने कहा, "मुझे अपने शब्द वापस लेने में कोई हिचक नहीं है।" हालांकि, उन्होंने कुमार को चेतावनी देते हुए यह भी कहा, "अगर आप नहीं बदलेंगे, तो आपको सुधार दिया जाएगा।"