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बेटी ने खुदकुशी कर बाप का 'पैसा बचाया'

Wed, 01 Jun 2016 04:28 PM IST
संजय रमाकांत तिवारी/बीबीसी संवाददाता
संजय रमाकांत तिवारी/बीबीसी संवाददाता Updated Wed, 01 Jun 2016 04:28 PM IST
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Daughter of the father himself " saved money "
वाघोली गांव की कांता भिसे के पास एक ही काम है काम ढूंढना - फोटो : BBC

लातूर के भिसे वाघोली गांव की कांता भिसे के पास एक ही काम है काम ढूंढना। मगर सूखा है तो काम कहां से मिलेगा। वे रोज घर से निकलती है और दोपहर बाद लौट आती है। खाली हाथ। पति कलेक्शन एजेंट है और हाड़तोड़ मेहनत के बावजूद उनके हाथ महीने में सिर्फ एक हजार रुपए आते है। मगर इससे घर नहीं चलता। कांता के दो बच्चे हैं हाईस्कूल में पढ़ रहा बेटा और बेटी। बड़ी बेटी की शादी हो चुकी है। दूसरी बेटी मोहिनी ने 70 फीसदी अंक लेकर पिछले साल 12वीं पास की थी। पर उसे आगे पढ़ाने के लिए दूसरे गांव भेजने की हिम्मत और आर्थिक शक्ति कांता में नहीं थी।

अचानक इस साल 16 जनवरी को दुपट्टे से फांसी लगाई और मर गईं।

Daughter of the father himself " saved money "
women 's - फोटो : indilens.com

लिहाजा उसकी शादी की कोशिश शुरू हुई। मगर पढ़ाई में दिलचस्पी रखने वाली मोहिनी ने अचानक इस साल 16 जनवरी को दुपट्टे से फांसी लगाई और मर गईं। कांता जब भी बेटी के आखिरी खत को देखती है तो उनके आंसू निकल आते है मोहिनी ने मराठी में अपना सुसाइड नोट लिखा था। इसे पढ़ने से पता चलता है कि सूखा झेल रहे इलाकों में लड़कियां क्या सोचती है। सुसाइड नोट में मोहिनी ने अपने पिता से गुहार लगाई है कि वो शराब न पिएं और उसकी मौत के बाद 13वीं या श्राद्ध जैसे कर्मकांडों पर रुपए जाया न करे। आगे वो लिखती है कि यह सब आत्मा की शांति के लिए करते है लेकिन मैं अपनी खुशी से यह कदम उठा रही हूँ। खुशी होगी कि मैंने दहेज और शादी पर आपके जो रुपए खर्च हो जाते मैंने उन्हें बचाया है। आखिर कब तक लड़की वाले लड़के वालों के आगे झुकते रहेंगे

सब दो से चार लाख रुपए के बीच दहेज मांग रहे थे। हम दोनों पति-पत्नी तनाव में थे

Daughter of the father himself " saved money "
parents - फोटो : BBC

कांता बताती है। जो रिश्ते आए थे सब दो से चार लाख रुपए के बीच दहेज मांग रहे थे। हम दोनों पति-पत्नी तनाव में थे। मैंने पति से कहा भी कि हमारे पास जो एक एकड़ खेत है उसे बेच डालेंगे। जब मैं यह कह रही थी। तब मोहिनी सामने के कमरे में टीवी देख रही थी। उसने मेरी बात शायद सुनी होगी। इसलिए उसने ऐसा किया। उसने लिखा था कि मेरे भाई की जमीन छिन जाएगी। उसके पास कोई प्रॉपर्टी नही बचेगी। इसलिए उसने ऐसा कर डाला। मोहिनी के जाने के बाद क्या बदला है जिंदगी में कांता बताती है कुछ नही। अब तो बारिश भी नहीं है और काम का भी सवाल है। किसी ने कोई काम दिया तो हम दोनों कर सकते हैं लेकिन काम नही है। इसलिए हम लोगों से उधार लेकर काम चला रहे है। जिसने उधार वापस मांगा तो दूसरे से लेकर पहला चुकाते है। बैंक अगर हमें बेटी की शादी के लिए एक लाख भी कर्ज दे देता तो हम जैसे-तैसे शादी निपटा सकते थे। 

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चार एकड़ की खेती को संभालना और तीन बेटों की जिम्मेदारी। बड़ा बेटा सेकेंड ईयर से पढ़ाई छोड़कर रोजगार ढूंढ रहा है

Daughter of the father himself " saved money "
women 's - फोटो : BBC

लेकिन एक एकड़ ज़मीन होने के बावजूद बैंक ने हमें सिर्फ़ 20 हजार कर्ज देने की पेशकश की थी। मोहिनी के गाँव भिसे वाघोली में एक साल में तीन खुदकुशी हो चुकी है। गातेगाँव में भी हाल ही में ऐसी घटना हो। चुकी है। 28 अप्रैल को 65 साल के महाकांत माली ने आम के पेड़ पर लटककर खुद को फांसी लगा ली। वजह थी घर बनाने के लिए लिया दो लाख का कर्जा। 60 साल की विधवा कमल पर यह रक़म लौटाने की ज़िम्मेदारी है। सोसायटी का 23 हजार का कर्जा भी है। चार एकड़ की खेती को संभालना और तीन बेटों की जिम्मेदारी। बड़ा बेटा सेकेंड ईयर से पढ़ाई छोड़कर रोजगार ढूंढ रहा है। दो छोटे भाई पढ़ाई के साथ पड़ोस के खेत में काम करते है। जहां दोनों को 300-300 रुपए मिल जाते है। लातूर से लगे बीड़ जिले के वारवा गांव में इस साल फरवरी में 25 लड़कियों ने ग्रुप बनाया और फैसला लिया कि वो सूखा होने की वजह से इस साल शादी नहीं करेंगी। लगातार सूखे की वजह से किसानों का घरेलू बजट तबाह हो चुका है। ऐसे में शादी का मतलब है दहेज। जिसे जुटाने का मतलब है नया कर्ज या जमीन का टुकड़ा या गहने को बेचना।

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मोहिनी के पिता पांडुरंग भिसे कहते है कि यहां कोई काम नहीं है

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women 's - फोटो : indilens.com

मोहिनी के पिता पांडुरंग भिसे कहते है कि यहां कोई काम नहीं है। रोजगार गारंटी योजना का भी काम नहीं। जो मिलते है वो इतने मुश्किल है। कि आम किसान कर नहीं पाते मसलन पत्थर तोड़कर 40 फीट या सौ फीट कुआं खोदना या सड़क के बड़े काम। ठेकेदार बड़ी मशीनों से ये पूरे कर लेते है और बाद में लोगों से जॉब बुक ले जाकर एंट्री कर दी जाती है। महाराष्ट्र के शेतकरी संगठन के मुखिया सत्तार पटेल इससे सहमत है। उनका कहना था कि जो काम मज़दूर नहीं कर सकते वो काम इस योजना में नहीं डाले जाने चाहिए पर यही हो रहा है। लिहाजा विदर्भ के बाद अब मराठवाड़ा भी किसान खुदकुशियों के लिए जाना जा रहा है। हर जिले से ऐसी खबरें आ रही है। पति के जाने के बाद विधवा को घर, खेत और कर्ज का बोझ तीनों की ज़िम्मेदारी लेनी पड़ती है।

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