फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

Coronavirus: साहित्य-संस्कृति से जुड़ी शख्सियतों के लिए क्या नया लाया ‘लॉकडाउन’, पढ़ें ये विशेष खबर

Wed, 01 Apr 2020 08:15 PM IST
Harendra Chaudhary अतुल सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अतुल सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 01 Apr 2020 08:15 PM IST
सार

  • मैत्रेयी पुष्पा को नहीं मिल रहा है एकाग्रता वाला एकांत
  • सरकार और व्यवस्था ने नाराज हैं ममता कालिया
  • रंगकर्मी अरविंद गौड़ ने किया खुद को डिजिटली मजबूत

विज्ञापन
CoronaVirus: Maitreyi pushpa, mamta kalia and others culture and literature related celebrities managing during lockdown
books

लॉकडाउन और अपने अपने घरों में कैद रहने का ये सिलसिला अब तकरीबन हफ्ते भर पुराना हो चुका है। शुरुआत के एकाध दिन तो तमाम लोगों ने सोशल मीडिया के तमाम माध्यमों का मनमाना इस्तेमाल किया, तरह-तरह का खाना पकाया, सफाई की, टिक टॉक बनाया, मीम्स बनाए, चुटकुले बनाए, डर और आतंक का माहौल बनाने वाले तरह तरह के पोस्ट यहां वहां फॉरवर्ड किए, लेकिन गुजरते वक्त के साथ अब यह एकांत लोगों को हद से ज्यादा परेशान करने लगा है।



ऐसे में तमाम रचनात्मक लोग, लेखक, कलाकार, रंगकर्मी आखिर अपना वक्त कैसे बिता रहे हैं? उनके लिए इस एकांत के क्या मायने हैं और इतना लंबा वक्त काटने का उन्होंने कौन सा जरिया ढूंढा है?

CoronaVirus: Maitreyi pushpa, mamta kalia and others culture and literature related celebrities managing during lockdown
maitree pushpa - फोटो : अमर उजाला

मैत्रेयी पुष्पा कहती हैं ‘किसी काम में मन नहीं लगता

जानी-मानी लेखिका मैत्रेयी पुष्पा के लिए यह एकांत बेचैन करने वाला है। कहती हैं ‘किसी काम में मन नहीं लगता। एकांत मिलने के बावजूद लिखने के लिए जो एकाग्रता चाहिए, वो नहीं मिल पाती। पहले लिखने के लिए एकांत तलाशते थे, अब जब मिला तो इसकी पीड़ा समझ में आई। नींद नहीं आती, बेचैनी घेर लेती है। टीवी खोलना चाहती हूं मगर महसूस होता है कि टीवी खोलते ही कोरोना कमरे में फैल जायेगा। पूरे घर पर छा जायेगा, हमें निगल लेगा।‘

बड़ी मुश्किलों से मैत्रेयी पुष्पा ने खुद को पढ़ने के लिए तैयार किया और किताब भी इस जमाने की नहीं सदियों पुरानी दास्तान - ‘स्वप्नवासवासवदत्तम्‘... राजा उदयन और वासवदत्ता की प्रेम कहानी। उदयन वीणा सिखाने वाला गुरु और वासवदत्ता शिष्या रूप में राजकुमारी। उनका कहना है कि ‘मुझे कोरोना जैसी महामारी ने लाख विचलित किया है लेकिन उस विचलन के बरअक्स ही रचना का संसार बनता गया है कि मानसिक रूप से मैं कवि भास की स्वप्नवासवदत्तम् की ओर बढ़ चली और वासवदत्ता के प्रेमी उदयन की प्रेमकथा में लीन हो गयी।‘
CoronaVirus: Maitreyi pushpa, mamta kalia and others culture and literature related celebrities managing during lockdown
mamta kalia - फोटो : mamta kalia

तालाबंदी लोकतंत्र के हित में नहीं: ममता कालिया

लेखिका ममता कालिया के भीतर सरकार और व्यवस्था को लेकर गुस्सा भरा है। खासकर लाखों मजदूरों के पलायन, पुलिस के डंडे और अफरातफरी में लिए गए फैसलों को लेकर। कहती हैं कि इस लॉकडाउन के बहाने भीतर ही भीतर कुछ खतरनाक साजिश चल रही है। आप देखिएगा कि 21 दिनों के बाद बहुत कुछ बदल जाएगा, कई ऐसे नियम कानून गुपचुप बन जाएंगे, जो आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ाएंगे। यह तालाबंदी लोकतंत्र के हित में नहीं है।

लेकिन एकांत के इन दिनों में ममता कालिया की रचनात्मक सक्रियता बढ़ी है। ममता जी बताती हैं कि इस बीच वो अमूर्त कला पर सीरज सक्सेना की किताब पढ़ रही हैं – कला की जगहें। पहली बार उन्होंने अमूर्त कला को इतनी गहराई से समझा और महसूस किया। ‘अब तक मैंने मूर्त कला को ही पढ़ा है, वही समझ में भी आता था। जब मकबूल फिदा हुसैन को पढ़ा था तो फिदा हो गई थी। अब सीरज सक्सेना को पढ़कर अमूर्त कला की परतें खुलने लगी हैं।‘ ममता कालिया इस बीच हंगरी की अपनी यात्रा के संस्मरण भी लिख रही हैं और कुछ अधूरी कहानियों को पूरा करने में लगी हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
CoronaVirus: Maitreyi pushpa, mamta kalia and others culture and literature related celebrities managing during lockdown
Mk raina - फोटो : Social Media

एमके रैना को तालाबंदी के खुलने  का इंतजार

रंगकर्मी और अभिनेता एम के रैना नोएडा के अपने घर में बंद हैं। उनका कहना है कि जब पूरी दुनिया में ये हाल है तो चलो, यहां भी सुरक्षा के लिए ये जरूरी है। बैठे-बैठे करूं क्या, पढ़ता रहता हूं। अपने घर की लाइब्रेरी को ठीक से देखने का वक्त नहीं मिलता था, अब वहां सजी किताबें काम आ रही हैं। तालाबंदी खुले तो कुछ नया करने की सोचूं। फिलहाल तो इस सरकार ने कुछ करने लायक ही नहीं छोड़ा है। हमारे कश्मीर की तो हालत ऐसी कर दी कि लोग इंटरनेट तक नहीं इस्तेमाल कर पा रहे।
विज्ञापन
CoronaVirus: Maitreyi pushpa, mamta kalia and others culture and literature related celebrities managing during lockdown
Arvind Gaur - फोटो : Social Media

अरविंद गौड़ कर रहे हैं यूट्यूब और फेसबुक लाइव

अस्मिता थिएटर ग्रुप के संस्थापक और जाने माने रंगकर्मी अरविंद गौड़ पिछले तीस वर्षों से कभी खाली नहीं बैठे, हर वक्त किसी न किसी नाटक पर काम, रिहर्सल, शो, वर्कशॉप करते रहे हैं। अस्मिता के सैकड़ों रंगकर्मियों की टोली रोजाना अपने नाटकों के लिए मशहूर रही है। ऐसे वक्त में भी अरविंद और उनकी टीम शांत नहीं है।

इसका सदुपयोग अरविंद अस्मिता के क्वारंटाइन थिएटर फेस्टिवल के जरिये कर रहे हैं। अपने नाटकों का रोजाना 7 बजे फेसबुक पर लाइव शो करते हैं। दिनभर नाटकों की रिकॉर्डिंग को छांटना, उन्हें एडिट करना और तमाम तकनीकी पहलुओं से गुजरते हुए इन्हें रोजाना लाइव प्रसारित करना।

अब इसके दो शो हो रहे हैं यू ट्यूब पर शाम 4 बजे लाइव और फेसबुक पर शाम 7 बजे लाइव। अरविंद बताते हैं, इस वक्त का सदुपयोग हमने खुद को डिजिटली मजबूत करने और ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचने में किया है। हमारे जो नाटक 100-200 लोग देखते थे, अब इस लाइव के जरिए 20-25 हजार लोग तक देख ले रहे हैं।
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed