फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   AI Designed Viruses: A Medical Breakthrough Or The Next Bioweapon Threat

एक्सप्लेनर: अब एआई बना सकता है नए वायरस, मेडिकल क्रांति के साथ कितना बड़ा है जैविक हथियार का खतरा?

Sat, 12 Sep 2026 03:51 PM IST
संकल्प प्रकाश सिंह स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: संकल्प प्रकाश सिंह Updated Sat, 12 Sep 2026 03:51 PM IST
सार

अब एआई की पहुंच सिर्फ कंप्यूटर और डाटा तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह जैविक विज्ञान में भी नए प्रयोगों की दिशा बदल रहा है। 

विज्ञापन
AI Designed Viruses: A Medical Breakthrough Or The Next Bioweapon Threat
AI Bio Weapon - फोटो : AI Generated

विस्तार

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर अब तक सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की होती रही है कि यह इंसानों की नौकरियां खत्म कर सकता है। लेकिन अब एआई को लेकर चिंता इससे कहीं आगे पहुंच गई है। सवाल यह है कि अगर एआई का इस्तेमाल बायोलॉजिकल रिसर्च जैसे संवेदनशील क्षेत्र में गलत इरादे से किया जाए तो क्या हो सकता है? हाल ही में सामने आए एक मामले ने इस चिंता को और बढ़ा दिया है। एआई की मदद से चिकनगुनिया वायरस के जेनेटिक स्वरूप में बदलाव से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने निकलकर आया है, जिसे जैविक हथियार विकसित करने की कोशिश से जोड़कर देखा जा रहा है।
विज्ञापन


इस मामले के सामने आने के बाद एआई कंपनी एंथ्रोपिक ने संबंधित अकाउंट की पहचान की और उस पर तुरंत रोक लगाने का काम किया। यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि खतरा सिर्फ चिकनगुनिया वायरस तक सीमित नहीं है। असली सवाल यह है कि अगर भविष्य में एआई वैज्ञानिक ज्ञान, बायोलॉजिकल रिसर्च और ऑटोमेटेड लैबोरेट्रीज के साथ जुड़ गया तो क्या होगा? क्या कोई गलत इरादे वाला व्यक्ति एआई की मदद से ऐसे जैविक प्रयोग कर सकेगा जिनके लिए पहले बहुत ज्यादा वैज्ञानिक ज्ञान और विशषज्ञता की जरूरत होती थी?
विज्ञापन

एआई ने डिजाइन किए नए वायरस

इस खतरे को समझने के लिए हाल ही में हुए एक रिसर्च को समझना आपके लिए काफी जरूरी है। वैज्ञानिकों ने एआई मॉडल की मदद से पूरे बैक्टीरियोफेज यानी ऐसे वायरस का पूरा जेनेटिक कोड डिजाइन किया, जो बैक्टीरिया को संक्रमित करता है। इस रिसर्च में एआई को लाखों प्राकृतिक जीनोम से मिले डीएनए सीक्वेंस पर ट्रेन किया गया था। इसके बाद एआई ने बिल्कुल नए जीनोम डिजाइन तैयार किए। वैज्ञानिकों ने इनमें से करीब 300 डिजाइन को लैब में बनाकर टेस्ट किया और 16 ऐसे फेज मिले, जो वास्तव में काम करने वाले थे।
विज्ञापन
विज्ञापन


खास बात यह थी कि ये प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले फेज की सीधी कॉपी नहीं थे। उनके जेनेटिक सीक्वेंस, जीन और दूसरे जैविक गुणों में काफी विविधता थी।  इस रिसर्च का मकसद बीमारी फैलाना नहीं था। बल्कि इसका एक बड़ा संभावित फायदा यह है कि भविष्य में ऐसे एआई से डिजाइन किए गए फेज का इस्तेमाल उन बैक्टीरिया के खिलाफ किया जा सकता है, जो मौजूदा इलाज के प्रति प्रतिरोधी हो चुके हैं।

आज कई ऐसे बैक्टीरिया मौजूद हैं, जिन पर सामान्य एंटीबायोटिक दवाओं का असर पहले जैसा नहीं रहा। यानी जिन दवाओं से पहले बैक्टीरिया आसानी से खत्म हो जाते थे अब वही दवाएं कई बार उन पर बेअसर साबित होती हैं। ऐसी स्थिति में बैक्टीरियोफेज एक संभावित विकल्प बन सकते हैं क्योंकि इनका काम ही बैक्टीरिया को पहचानकर उन्हें खत्म करना होता है।

भविष्य में एआई की मदद से ऐसे बैक्टीरियोफेज तैयार किए जा सकते हैं, जो किसी खास हानिकारक बैक्टीरिया को ज्यादा सटीक तरीके से पहचानकर उन्हें मार सकें। अगर यह तकनीक सफल हुई, तो आने वाले समय में गंभीर बैक्टीरियल संक्रमणों के इलाज का तरीका काफी हद तक बदल सकता है।

AI Designed Viruses: A Medical Breakthrough Or The Next Bioweapon Threat
AI Bio Weapon - फोटो : AI Generated

गलत इस्तेमाल से विनाशकारी बन सकती है AI की ताकत

यहीं इस पूरी रिसर्च का सबसे महत्वपूर्ण और दूसरा पहलू सामने आता है। इस तकनीक का इस्तेमाल गलत इरादों के लिए भी किया जा सकता है। इसका सकारात्मक इस्तेमाल ऐसे बैक्टीरियोफेज तैयार करने में हो सकता है, जो हानिकारक और दवाओं के प्रति प्रतिरोधी बैक्टीरिया को निशाना बनाएं। दूसरी तरफ एआई पूरे जीनोम के स्तर पर बायोलॉजिकल सिस्टम डिजाइन करने में सक्षम हो रहा है। यही क्षमता गलत हाथों में कितनी खतरनाक हो सकती है? 

सबसे बड़ा डर यह है कि भविष्य में इस तकनीक का इस्तेमाल जैविक हथियार बनाने के लिए भी किया जा सकता है। इस रिसर्च में वैज्ञानिकों ने खास ध्यान रखा कि बनाए गए वायरस इंसानों और पौधों की कोशिकाओं को संक्रमित न कर सकें। लेकिन चिंता यह है कि गलत लोग इसी तरह की तकनीक का इस्तेमाल खतरनाक वायरस बनाने या पहले से मौजूद किसी खतरनाक वायरस को और ज्यादा नुकसानदायक बनाने के लिए कर सकते हैं।

गौर करने वाली बात है कि अभी दुनिया उस स्थिति तक नहीं पहुंची है। हालांकि, जैसे-जैसे एआई के ये मॉडल और ज्यादा अच्छे, सस्ते और आसानी से उपलब्ध होंगे इन्हें इस्तेमाल करना भी आसान हो जाएगा। उस दौरान बिना ज्यादा विशेषज्ञता वाले लोग भी इनका गलत इस्तेमाल करने की कोशिश कर सकते हैं। यही इस तकनीक को लेकर सबसे बड़ी चिंताओं में से एक है।

इसी वजह से आने वाली चुनौती सिर्फ एआई को और ज्यादा शक्तिशाली बनाने की नहीं बल्कि यह तय करने की भी है कि उसकी ताकत की सीमाएं आखिर कहां तय की जाएं। गौर करने वाली बात है कि आज एआई की मदद से तैयार किया गया एक नया वायरस बैक्टीरिया के खिलाफ इलाज की उम्मीद पैदा कर रहा है। वहीं कल को यही तकनीक किसी और मकसद के लिए इस्तेमाल हो, इसकी गारंटी कौन देगा?

सवाल यह भी है कि जब एआई और ऑटोमेटेड लैब एक साथ काम करने लगेंगे तब इंसानी हस्तक्षेप और निगरानी कितनी रह जाएगी? यह एक महत्वपूर्ण सवाल है। तकनीक के विकास की रफ्तार आज के समय काफी तेज हो चुकी है। लेकिन उसके गलत इस्तेमाल से होने वाले नुकसान को रोकने की तैयारी क्या उतनी ही तेज है? यह सबसे महत्वपूर्ण सवाल है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed