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लॉकडाउन की कड़वी हकीकत और मजदूरों की मजबूरी, घर वापसी के लिए जद्दोजहद जारी

Fri, 15 May 2020 04:40 AM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Fri, 15 May 2020 04:40 AM IST
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coronavirus lockdown migrant labourers photo who return home journey by truck cycle and by foot
प्रवासी मजदूर - फोटो : पीटीआई

प्रवासी मजदूरों की व्यथा, किसी को बेचने पड़े पत्नी के गहने, तो कोई उधार लेकर कर रहा सफर  


लॉकडाउन के बीच बेरोजगार हुए प्रवासी मजदूरों की घर वापसी के लिए जद्दोजहद जारी है। आर्थिक तंगी के चलते घर लौटने के लिए वे किराये का इंतजाम भी नहीं कर पा रहे हैं। हालांकि राज्य सरकारों का दावा है कि वे इन मजदूरों के लिए भोजन आदि की व्यवस्था कर रही हैं और उनकी घर वापसी के लिए स्पेशल ट्रेनों की व्यवस्था भी है। लेकिन हालात इससे अलहदा हैं। कितनों को यह सरकारी सुविधा मिल पा रही है, इसे सड़कों पर उमड़े मजदूरों के हुजूम से समझा जा सकता है। मुसीबत में घर पहुंचने के लिए किसी को पत्नी के गहने बेचने पड़े तो कोई हताश-निराश साइकिल या पैदल ही चल पड़ा है। 

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प्रवासी कामगार - फोटो : पीटीआई

सबसे ज्यादा 32 हजार उत्तर प्रदेश के लोग
सूत्रों के मुताबिक बाहरी राज्यों में जाने के लिए पंजीकरण करवाने वाले करीब 70 हजार लोगों में से उत्तर प्रदेश के 32 हजार, बिहार के 21 हजार, पश्चिम बंगाल के 2500, पंजाब-मध्य प्रदेश-झारखंड के तीन-तीन हजार, चंडीगढ़ के एक हजार, हरियाणा-उत्तराखंड के डेढ़-डेढ़ हजार लोग हिमाचल के विभिन्न जिलों में फंसे हुए हैं। उत्तर प्रदेश के करीब 18 हजार से ज्यादा लोग सोलन जिला में ही फंसे हुए हैं। अब इन लोगों की घर वापसी का स्वरूप वहां की सरकारों के रुख पर ही तय होगा।

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छोटी बच्चियां - फोटो : पीटीआई
बिहार के लोगों ने उलझा दिया आंकड़ा
हिमाचल से बिहार जाने वाले कई लोगों ने जाने की जगह पोर्टल पर आने के लिए आवेदन कर दिया है। हिमाचल आने के लिए बिहार के लोगों की संख्या अधिक पाए जाने पर जब अफसरों ने संपर्क साधा तो पता लगा कि इन्होंने जाने की जगह गलती से आने का पंजीकरण करवा दिया है। ऐसे लोगों से अब दोबारा से पंजीकरण करवाया जा रहा है।
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प्रवासी कामगार ट्रेन के इंतजार में - फोटो : पीटीआई
श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में गुजरात से वापस लौटे सबसे ज्यादा 4 लाख प्रवासी
रेलवे की तरफ से चलाई जा रही श्रमिक स्पेशल ट्रेनों से यात्रा करने वालों की संख्या ने 10 लाख का आंकड़ा पार कर लिया है। इन ट्रेनों का संचालन लॉकडाउन के चलते बंद हो गए काम-धंधों के कारण परेशानी में फंसे प्रवासी कामगारों को उनके मूल राज्यों तक पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, सबसे ज्यादा घर वापसी की इच्छा गुजरात में फंसे प्रवासी कामगारों ने दिखाई, जहां से बुधवार रात तक 4 लाख से ज्यादा लोग श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में सवार होकर वापस निकल चुके थे। वहीं, घर वापसी का सबसे बड़ा आंकड़ा उत्तर प्रदेश का रहा, जहां करीब 3 लाख से ज्यादा लोग श्रमिक स्पेशल ट्रेनों से पहुंचे हैं। 
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बच्चे के साथ महिला - फोटो : पीटीआई

उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा, मध्य प्रदेश और झारखंड के लिए संचालित 301 ट्रेन
रेलवे अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को बताया कि 1 मई से अब तक 800 श्रमिक स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया जा चुका है, जिनसे 10 लाख से ज्यादा प्रवासी कामगारों ने यात्रा की है। इन 10 लाख में से करीब 40 फीसदी प्रवासी कामगार गुजरात से विभिन्न प्रदेशों के लिए संचालित की गईं 301 ट्रेन में सवार होकर गए हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री कार्यालय के सचिव अश्विनी कुमार के मुताबिक, इन 301 ट्रेन में से 204 उत्तर प्रदेश, 34 बिहार, 30 ओडिशा, 20 मध्य प्रदेश और 8 झारखंड के लिए संचालित की गई हैं। 

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