देश में कोरोना महामारी ने इस साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। रविवार सुबह तक बीते 24 घंटे में इस साल पहली बार रिकॉर्ड 25,320 संक्रमित मिले हैं। तीन महीने बाद सक्रिय मरीजों की संख्या भी बढ़कर 2,10,544 हो गई है।
कोरोना: इस साल का रिकॉर्ड टूटा, राज्यों के अति आत्मविश्वास और लोगों की लापरवाही से बढ़ रहा है संक्रमण
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कर्नाटक और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्रियों की चेतावनी
कर्नाटक के सीएम बीएस येदियुरप्पा ने लोगों से अपील की है कि वे दोबारा लॉकडाउन नहीं चाहते हैं, तो संक्रमण रोकने में सहयोग करें। उन्होंने कहा, महामारी बेकाबू होती दिख रही है, फिर लॉकडाउन संभव है। महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे ने लोगों को चेताया कि दोबारा लॉकडाउन के लिए मजबूर न करें। इस बीच, लातूर में भी रात्रि कर्फ्यू लगा दिया गया।
देश में 58वें दिन टीकाकरण तीन करोड़ के पार
कोरोना वायरस से बचाव के लिए देश में टीकाकरण का आंकड़ा तीन करोड़ पार हो चुका है। बीते 16 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना टीकाकरण अभियान का शुभारंभ किया था। रविवार को 58वें दिन वैक्सीन लगवाने वालों की संख्या तीन करोड़ से अधिक हुई।
पिछले एक दिन में 15 लाख से ज्यादा लोगों ने वैक्सीन लगवाई है। इतना ही नहीं बीते 14 दिन में सबसे तेज 90 लाख बुजुर्गों ने कोरोना वायरस से बचाव के लिए सुरक्षा कवच लिया।
जानकारी के अनुसार रविवार दोपहर तक देश में 3.10 करोड़ लोगों को वैक्सीन दी जा चुकी है। शनिवार को 15.19 लाख लोगों ने वैक्सीन ली है। इसी माह एक मार्च से कोरोना टीकाकरण का दूसरा चरण शुरू हुआ है जिसके तहत बुजुर्ग और 45 से 59 वर्ष की आयु के पहले से बीमार व्यक्तियों को वैक्सीन दी जा रही है। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक बुजुर्गों में वैक्सीन के प्रति काफी उत्साह देखने को मिला है।
कोरोना टीकाकरण काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है
एक से 14 मार्च के बीच 90 लाख से अधिक बुजुर्गों ने वैक्सीन लगवाया है जोकि स्वास्थ्य कर्मचारी और फ्रंटलाइन वर्करों की तुलना में सबसे अधिक है।
अब तक 45 से 59 वर्ष की आयु के 15 लाख, 73.47 लाख स्वास्थ्य कर्मचारी और 73.32 लाख फ्रंटलाइन वर्कर कोरोना वायरस से बचने के लिए वैक्सीन की पहली डोज ले चुके हैं। वहीं 43 लाख स्वास्थ्य कर्मचारी और 12 लाख फ्रंटलाइन वर्करों को वैक्सीन की दूसरी डोज भी दी जा चुकी है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के सीईओ और कोविन समिति के चेयरमेन आरएस शर्मा का कहना है कि कोरोना टीकाकरण काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि वैक्सीन लगवाने के लिए जो लोग अस्पताल पहुंच रहे हैं उन्हें सभी प्रकार की जानकारी उपलब्ध कराना उक्त अस्पताल की जिम्मेदारी है। अस्पतालों के इस सहयोग से ही वैक्सीन के प्रति लोगों में खौफ या भ्रामक जानकारियों को खत्म किया जा सकता है।
राज्यों के अति आत्मविश्वास, लोगों की लापरवाही से बढ़ रहा है संक्रमण
कोरोना महामारी पर लगभग नियंत्रण पाने के बाद भारत में संक्रमण के मामले फिर बढ़ने लगे हैं। महाराष्ट्र व केरल के साथ दूसरे राज्यों में भी दैनिक केस बढ़ रहे हैं। वायरस के भौगोलिक प्रभाव पर निगाह रख रहे विशेषज्ञों का मानना है, लोगों की लापरवाही, बढ़ता तापमान और राज्यों का संक्रमण के प्रति अति-आत्मविश्वास ही इसके कारण हैं।
सात राज्यों से लौटी उच्चस्तरीय समितियों को जमीनी स्तर पर काफी लापरवाहियां मिली हैं। एक सदस्य ने बताया, महाराष्ट्र में जनता का सहयोग बहुत कम देखने को मिल रहा है। चेहरे पर मास्क व भीड़ से दूरी का पालन एक फीसदी लोग भी नहीं कर रहे।
एक समिति की रिपोर्ट के अनुसार, कोरोना की पहली लहर कम होने के बाद राज्य सरकारों का ध्यान चुनाव, राजनीति, सरकारी कार्यक्रमों पर बढ़ा है। वहां के अधिकारियों से बातचीत में साफ पता चलता है कि संक्रमण को लेकर अति-आत्मविश्वास है, जिससे संक्रमित रोगियों की सही निगरानी नहीं हो रही और संक्रमण के स्रोत भी लापता हैं।
नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल के मुताबिक, एक संक्रमित पर कम से कम 20 लोगों की निगरानी जरूरी है। जहां एक से अधिक मामले हैं वहां कंटेनमेंट जोन बनाकर इलाके की स्क्रीनिंग बेहद आवश्यक है। इसे लेकर कुछ जगहों पर दिक्कतें हो रही हैं।
तापमान का असर....
स्वास्थ्य मंत्रालय के ही मानस प्रतिम रॉय ने वायरस पर तापमान के असर को जानने के लिए अध्ययन किया है। अध्ययन के मुताबिक, भारत में अधिक तापमान वायरस के प्रसार में मदद कर रहा है।
29 से 30 डिग्री सेल्सियस का तापमान वायरस को आक्रामक बनाने के लिए काफी हो सकता है। महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु, मध्यप्रदेश, कर्नाटक, गुजरात और पंजाब में इस वक्त अधिकतम तापमान लगभग यही है।
रहना होगा सतर्क...
डॉ. वीके पॉल ने कहा, कम संक्रमण वाले राज्यों को भी सतर्कता की जरूरत है। अब भी भारत की स्थिति काफी नियंत्रण में है। लोगों का सहयोग और राज्य सरकारों के प्रयास तेज होने से ही इसे रोक सकते हैं। दिल्ली-एनसीआर जैसे इलाकों पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है, क्योंकि यहां आबादी काफी है और कोविड सतर्कता नियमों का पालन भी सही तरीके से नहीं हो रहा है।
चिंता: सात राज्यों में ज्यादा प्रकोप
सात राज्यों महाराष्ट्र, केरल, पंजाब, कर्नाटक, गुजरात, तमिलनाडु व मध्यप्रदेश में कोरोना का प्रकोप सबसे अधिक है। नए मरीजों में से 87.73% इन्हीं राज्यों से हैं। महाराष्ट्र में सर्वाधिक 16,620, केरल 2035 और पंजाब में 1510 नए मरीज मिले हैं।
राहत: 14 राज्यों में एक भी मौत नहीं
14 राज्यों में एक भी मौत नहीं हुई है। चार राज्यों में पांच से अधिक मौत हुईं। बीते 24 घंटे में सर्वाधिक महाराष्ट्र में 88, पंजाब में 22, केरल 12 और छत्तीसगढ़ में छह मरीजों की मौत हुई।