देश का पूर्वोत्तर का इलाका इस समय भीषण बाढ़ के संकट से जूझ रहा है। सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य असम है, यहां के गांव के साथ-साथ शहरों और कस्बों का हाल भी बुरा है। वर्तमान में कोरोना संकट और फिर बाढ़ ने असम पर दोहरा प्रहार किया है। असम में बाढ़ के कारण इंसान के साथ-साथ बेजुबान जानवर भी बेहाल हैं।
पिछले 24 घंटों में छह लोगों की मौत के साथ ही बाढ़ और भूस्खलन में मरने वालों की संख्या 112 हो गई। राज्य के 30 जिलों के 54 लाख लोग बाढ़ की विभीषिका का सामना कर रहे हैं।
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असम में बाढ़
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असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने शनिवार को बताया कि पिछले एक हफ्ते से बाढ़ की स्थिति में कोई सुधार नहीं आया है। राज्य के 30 जिलों के करीब 53,99,017 लोग बाढ़ की आपदा का सामना कर रहे हैं।
धुबड़ी जिले में बाढ़ की हालत सबसे गंभीर है।यहां नौ लाख से ज्यादा लोग इससे प्रभावित हैं।
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असम में बाढ़
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प्राधिकरण ने बताया कि राज्य में 552 राहत कैंप बनाए गए हैं। 2.4 लाख हेक्टेयर से अधिक कृषि योग्य जमीन बाढ़ की चपेट में आई है जबकि 76,003 लोग बाढ़ प्रभावित इलाकों से निकाले गए हैं। बाढ़ की वजह से राज्य के विभिन्न हिस्सों में छोटे-बड़े पुल और सड़कें टूट गई हैं। ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।
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काजीरंगा नेशनल पार्क का 90 फीसदी हिस्सा डूब गया है। यहां 96 जानवरों की मौत हो चुकी है। इनमें एक सींग वाले पांच गैंडे भी शामिल हैं। अगले तीन दिनों के दौरान भारी बारिश के पूर्वानुमान से हालात के और बदतर होने का अंदेशा है। पूर्वोत्तर के कई राज्यों के अलावा पश्चिम बंगाल के उत्तरी इलाके में भी अलर्ट जारी कर दिया गया है।
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बताया गया है कि बाढ़ के कारण काजीरंगा नेशनल पार्क में एक सींग वाले गैंडों की भी मौत हुई है। नेशनल पार्क ने कहा है कि चार गैंडों की बाढ़ के पानी में डूबने से मौत हो गई। वहीं, एक गैंडे की मौत प्राकृतिक रूप से हुई है।