उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में कोरोना संक्रमितों की संख्या तेजी से बढ़ने की वजह से अब अधिक सतर्कता की जरूरत है, लेकिन ऐसे समय में ही लोग और बेपरवाह हो गए हैं। छोटी-बड़ी दुकानों से लेकर प्रमुख बाजारों, चौराहों और सड़कों पर लोग एक-दूसरे से सटकर ऐसे खड़े नजर आते हैं, जैसे कोरोना के संक्रमण का खतरा टल गया है। ऐसे लोग खुद के लिए तो मुश्किलें खड़ी ही कर रहे परिजनों और समाज को भी मुश्किल में डाल रहे हैं।
वीडियो: दो गज की दूरी भूलकर मौत को दावत दे रहे हैं लोग, ढील के साथ ही बढ़ गई लोगों की लापरवाही
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कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए नियम है कि लोग एक दूसरे से कम से कम दो गज की दूरी बनाए रखें और मॉस्क जरूर पहनें। दुकानों, बाजारों, शॉपिंग मॉल आदि में सोशल डिस्टेंसिंग का कड़ाई से पालन करने का निर्देश है। अनलॉक शुरू होने पर लोगों ने इसका पालन भी किया, मगर जैसे-जैसे ढील बढ़ रही है लोगों की लापरवाही भी बढ़ती जा रही है।
रोस्टर और थानावार लॉकडाउन खत्म होने के साथ ही दुकानों के खुलने का समय बढ़ा तो शहर से लेकर देहात तक बाजार में भीड़ बढ़ गई। ऐसे में सोशल डिस्टेंसिंग और मॉस्क का इस्तेमाल समेत संक्रमण से बचाव के सभी उपाय अपनाना ज्यादा जरूरी हो गया है, लेकिन हो बिल्कुल उलटा रहा है। लोग न तो दो गज दूरी का पालन कर रहे हैं न ही मॉस्क लगा रहे हैं। सैनिटाइजेशन का भी ख्याल नहीं रख रहे।
साहबगंज, महेवा मंडी की हर दुकान पर अनदेखी
शहर की सबसे बड़ी गल्ला और किराना मंडी साहबगंज की दुकानों पर सोशल डिस्टेंसिंग की सर्वाधिक धज्जियां उड़ रही हैं। दुकानों पर एक ही समय पर 10 से 20 लोग बिना किसी दूरी के खड़े नजर आते हैं। न दुकानदार किसी को रोक-टोक रहे न लोगों को ही यह जरूरी लग रहा। ऐसा ही नजारा महेवा गल्ला व सब्जी-फल मंडी का भी है। वहां भोर से ही सब्जी और फल विक्रेताओं और क्रेताओं की भीड़ जुट जा रही है। लोग एक-दूसरे से सटकर खड़े होकर खरीदारी करते हैं।
खामोशी से हट गई ‘लक्ष्मण रेखा’
लॉकडाउन के बाद जब बाजारों-दुकानों को खोलने की अनुमति मिली तो दुकानदारों ने खुद ही अपनी दुकानों के सामने रस्सी बांध रखी थी ताकि लोग दूर से ही सामान खरीद सकें। इससे दुकानदार और खरीदार दोनों सुरक्षित थे। मगर जब छूट बढ़ी तो ये लक्ष्मण रेखा रूपी रस्सी का वजूद कब खामोशी से मिट गया कोई जान ही नहीं सका।