दिल्ली के वसंत विहार गैंगरेप के चश्मदीद और निर्भया के दोस्त अवनींद्र पांडेय गोरखपुर के रहने वाले हैं। निर्भया कांड के दौरान अवनींद्र निर्भया के साथ उसी साथ बस में थे। इकलौते चश्मदीद गवाह होने के कारण इस केस में उनकी भूमिका बड़ी अहम थी, आरोपियों को फांसी तक पहुंचाने में उनकी गवाही भी अहम कड़ी साबित हुई है। निर्भया के गुनहगारों को सजा दिलाने के लिए लड़ने वाला अवनींद्र खुद इतना टूट गया था कि उसे संभालने में उसके परिवार को चार साल लग गए।
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निर्भया के साथ मौके पर मौजूद दोस्त अवनींद्र व दोषी पवन। File
- फोटो : अमर उजाला
जानकारी के मुताबिक 16 दिसंबर 2012 की रात निर्भया अपने दोस्त अधिवक्ता भानू प्रकाश पांडेय के पुत्र अवनींद्र के साथ बस से जा रही थी। इस दौरान दरिंदों ने ना सिर्फ उसे अपनी हवस का शिकार बनाया बल्कि दरिंदगी की सारी हदें भी पार कर दी। काफी लंबे समय तक अवनींद्र ने गुमनामी की जिंदगी बिताई और अभी भी वह वही जिंदगी जी रहा है।
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Nirbhaya Case: बाएं निर्भया की मां, दाएं अवनींद्र। (File)
- फोटो : अमर उजाला।
पिता भानू प्रकाश पांडेय निर्भया कांड का जिक्र करते ही भावुक हो जाते हैं। उनका कहना है कि अवनींद्र उस रात को कभी भूला नहीं पाया है। उसे हर पल यह दर्द सताता है कि काश, वो उसे बचा पाता। भानू प्रकाश बताते हैं कि चारों आरोपियों ने उन्हें पहले बस में लिफ्ट दी और उनका सामान लूट लिया। इसके बाद दोनों को बेरहमी से बस के अंदर पीटा और निर्भया के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। आरोपियों ने पहले बेटे अवनींद्र को बिना कपड़ें के सड़क पर फेंक दिया और फिर निर्भया को।
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वे बताते हैं कि दरिंदे उन्हें सड़क पर इसलिए फेंक दिए थे कि अगर वे मारने से न मरे तो ठंड से मर जाएंगे। उसके बाद जो हुआ उसे पूरा देश जानता है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि किसी के लिए कहना और सुनना आसान होता है मगर जो घटना हुई और उस रात का पता चला, तब हम लोगों की स्थिति क्या थी उसे शब्दों में बयां नहीं कर सकते हैं। बड़ी मुश्किल से मेरा बेटा इस दर्द से उबरा है।
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गौरतलब है कि गुरूवार को निर्भया के चारों गुनहगारों अक्षय ठाकुर, मुकेश सिंह, विनय शर्मा और पवन गुप्ता की फांसी की चौथी तिथि घोषित कर दी गई है। 20 मार्च की सुबह 5.30 बजे उन्हें फांसी पर लटकाया जाएगा।