चीन की भौगोलिक साम्राज्यवाद की नीति उसके आर्थिक साम्राज्य को ले डूबेगी। कोरोना वायरस का जनक होने के कारण विश्व में साख गंवा चुका चीन अपनी नाकामियां छिपाने के लिए गलवां घाटी जैसे विवाद को जन्म दे रहा है। चीन के लिए बेहतर होगा कि वह विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत से नहीं उलझे। भगवान बुद्ध के पंचशील सिद्धांत को मानने वाला भारत समय पड़ने पर चीन को मुंहतोड़ जवाब भी दे सकता है लेकिन युद्ध जैसा कदम विश्व में तेजी से उभर विकास कर रहे दोनों देश के हित में नहीं होगा। सोमवार रात लद्दाख की गलवां घाटी में हुई झड़प में भारत के बीस सैनिकों की शहादत और चीनी सैनिकों के हताहत होने की घटना पर शहर के लोगों की कुछ ऐसी ही प्रतिक्रिया रहीं।
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उद्यमी अनूप छापड़िया।
- फोटो : अमर उजाला।
उद्यमी अनूप छापड़िया ने कहा कि भारत पर बेवजह हमला कर चीन ने अपने आर्थिक साम्राज्य पर कुठाराघात किया है। भारत चीनी उत्पाद का सबसे बड़ा खरीदार है। बीस जवानों की शहादत से पूरे देश में चीन की खिलाफत शुरू हो गई है। देश की जनता इसका जवाब चीनी उत्पादों का बहिष्कार करके देगी। अमेरिका, यूरोप महाद्वीप में कई देशों ने चीनी उत्पादों पर प्रतिबंध लगाया है, वैश्विक मांग कम होने से चीन वैसे ही दबाव में है, हमला कर भारत का बाजार भी गंवा देगा। चीन का भौगोलिक साम्राज्य बढ़ाने का यह काम उसके आर्थिक साम्राज्य को ले डूबेगा।
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एसपी अग्रवाल।
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कारोबारी एसपी अग्रवाल ने कहा कि एसपी अग्रवाल एलएसी पर लद्दाख में गलवां में शहीद हुए भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि और नमन। चीन और भारत के बीच एलएसी पर हुए विवाद का हल युद्ध नहीं हो सकता। दोनों ही देश परमाणु शक्ति संपन्न हैं ऐसे में युद्ध सिर्फ इन देशों को ही नहीं विश्व को बुरी तरह प्रभावित करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तो इस समस्या का कूटनैतिक समाधान कर ही देंगे। हम सभी को जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभाते हुए चीन के उत्पादों का बहिष्कार करना चाहिए। भारत वासियों का यह जवाब चीन को आर्थिक रूप से कमजोर करेगा।
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डॉ दीपक मिश्रा।
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सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ कॉमर्स हेड एवं डीन डॉ दीपक मिश्रा ने कहा कि भारत और चीन दोनों ही देश वर्तमान में विश्व की तेज गति से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था वाले देश हैं, ऐसे में दोनों ही देश के लिए युद्ध के बारे में सोचना अच्छा नहीं होगा। भारत सदैव विश्व मे शांति के लिए जाना जाता है। हम भारतीय शांति प्रिय एवं अपनी संस्कृति के अनुसार ही व्यवहार करते हैं। चीन यह समझ ले कि हम शांतिप्रिय हैं कमजोर नहीं यह बात अन्य पड़ोसी देशों को भी समझ लेना चाहिए। वर्तमान में भारत हर तरह से चीन को जवाब देने में सक्षम है। यदि युद्ध होता है तो संपूर्ण विश्व के लिए अच्छा नहीं होगा इसलिए मेरे विचार से जहां तक संभव हो कूटनीतिक अथवा राजनीतिक स्तर पर इस समस्या का हल निकालना उचित होगा।
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दीप कुमार उपाध्याय।
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पूर्व नेपाल राजदूत दीप कुमार उपाध्याय ने कहा कि एलएसी पर गलवां में भारत चीन के सैनिकों के बीच हुई झड़प और उसमें बीस सैनिकों का शहीद होना बहुत ही दुखद है। दोनों ही देशों को एलएसी का सम्मान करना चाहिए और दूसरे के अधिकार क्षेत्र में दखल नहीं देना चाहिए। दोनों ही देश विश्व की महाशक्तियों में शामिल हैं। युद्ध से दोनों देश अस्थिर होंगे और इसका असर दक्षिण पूर्व एशिया ही नहीं पूरे विश्व पर होगा। पड़ोसी देश अस्थिर होंगे तो नेपाल पर भी इसका असर होगा। दोनों देशों की सहमति के अनुरूप कार्यान्वयन होना चाहिए था।