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कई सुपरहिट गीत गा चुकीं अनुराध पौंडवाल ने फिल्मों में गाना क्यों छोड़ा? खास इंटरव्यू में खोले राज

Tue, 14 Jan 2020 05:58 PM IST
विजय जैन डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर Published by: विजय जैन Updated Tue, 14 Jan 2020 05:58 PM IST
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famous bollywood singer anuradha paudwal special interview, she perform gorakhpur mahotsav
अनुराधा पौडवाल (फाइल फोटो)। - फोटो : amar ujala
गोरखपुर महोत्सव के समापन दिवस पर लाइव परफार्मेंस के सिलसिले में गोरखपुर आईं बॉलीवुड गायिका अनुराधा पौंडवान ने अमर उजाला से खास मुलाकात की। शास्त्रीय संगीत से लेकर पाश्चात्य संगीत, भजन संगीत की हर विधा में माहिर बॉलीवुड की प्रसिद्ध गायिका अनुराधा पौडवाल गोरखपुर वासियों को अपनी आवाज के जादू में आज बांधेंगी। बाबा गोरखनाथ की धरती पर सुर साधना करने को वह भी उत्साहित नजर आईं। उन्होंने कहा कि बाबा गोरखनाथ की धरती पर आना ही सौभाग्य की बात है। यहां प्रस्तुति देना भी बाबा की पूजा से कम नहीं।
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फाइल फोटो। - फोटो : amar ujala
शहरवासियों को ढेर सारा स्नेह देते हुए अनुराधा ने सभी को मंगलवार रात गोरखनाथ मेले में पहुंचने का आह्वान किया। शहर के होटल रेडिसन ब्लू में पहुंची अनुराधा ने कॅरियर से लेकर संगीत के वर्तमान स्वरूप पर खुल कर चर्चा की। पारंपरिक परिवार से ताल्लुक रखने वाली अनुराधा पौडवाल बताती हैं कि उन्होंने कभी भी पार्श्व गायन की कहीं से भी शिक्षा नहीं ली है। कॉलेज में गानों के शौक की वजह से वह दोस्तों की चहेती थी। बताया कि 1972 में प्रसिद्ध संगीतकार आरडी बर्मन ने फिल्म अभिमान में उनसे एक श्लोक गवाया। इसके बाद सुभाष घई की फिल्म कालीचरण में पूरा गाना गाया।
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अनुराधा पौडवाल (फाइल फोटो)।
बॉलीवुड के लगभग सभी संगीतकारों के साथ वे काम कर चुकी हैं। मनपसंद गाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि सभी गाने उन्हें पसंद हैं लेकिन संगीतकार जयदेव के साथ फिल्म दूरियां का गाना उन्हें हमेशा भाता है। फिल्मों में गाना छोड़कर भजन और धार्मिक संगीत की ओर मुड़ने की वजह पर उनका कहना था कि 1970 के दशक में वह संगीत की दुनिया से दूर रहीं। 1984 में फिल्म कालीचरन से वापसी हुई तो मुड़ कर नहीं देखा। फिल्म आशिकी, दिल है कि मानता नहीं, लाल दुपट्टा मलमल का आदि फिल्मों में गाना गया। टी-सीरीज में धार्मिक संगीत पर जोर था। वहां मैंने दुर्गा सप्तशती, तुलसी, दत्तात्रेय के भजन गाने शुरू किए तो वे खूब लोकप्रिय हुए।
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अनुराधा पौडवाल (फाइल फोटो)।
भजन गायन के साथ ही फिल्मों में पार्श्व गायन जारी रहा। मनपसंद संगीतज्ञ के बारे में उनकी प्रतिक्रिया रही कि वैसे तो हर संगीतकार का अपना एक स्टाइल होता है और उन्होंने सभी के साथ काम किया है लेकिन लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के साथ काम करना हर बार नया अनुभव लेने जैसा होता है। जिंदगी के यादगार क्षणों के बारे में पूछने पर वह भावुक हो गईं। बताती हैं कि भजन का एल्बम बनाने के सिलसिले में उन्होंने देश के हर बड़े मंदिर के दर्शन किए और वहां भजन गाए, यह हमेशा यादगार रहेगा।
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